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व्हाट्सएप ने कहा- जासूसी मामले में की कड़ी कार्रवाई, भारत सरकार के रुख का करते हैं समर्थन

व्हाट्सएप ने कहा- जासूसी मामले में की कड़ी कार्रवाई, भारत सरकार के रुख का करते हैं समर्थन

हाईलाइट

  • एक्टिविस्ट और जर्नलिस्ट की जासूसी के मामले में व्हाट्सएप ने कड़ी कार्रवाई की है
  • शुक्रवार को व्हाट्सएप ने एक बयान में यह बात कही
  • व्हाट्सएप ने सभी नागरिकों की गोपनीयता पर भारत सरकार के रुख का भी समर्थन किया है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एक्टिविस्ट और जर्नलिस्ट की जासूसी के मामले में व्हाट्सएप ने कड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को व्हाट्सएप ने एक बयान जारी कर ये बात कही। व्हाट्सएप ने सभी नागरिकों की गोपनीयता को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर भारत सरकार के रुख का भी समर्थन भी है। बता दें कि एक्टिविस्ट और जर्नलिस्ट की जासूसी करने के लिए इज़राइली सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था।

इससे पहले गुरुवार को फेसबुक के स्वामित्व वाली कंपनी ने कहा था कि इजरायली स्पायवेयर पेगासस की मदद से कुछ अज्ञात संस्थाओं ने भारतीय पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी की। इससे नागरिकों की निजता भंग हुई है। व्हाट्सएप के खुलासे के बाद, भारत सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से इस मामले की व्याख्या करने और लाखों भारतीयों की गोपनीयता को सुरक्षित रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी को 4 नवंबर तक अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा गया है।

व्हाट्सएप के एक प्रवक्ता ने पीटीआई से कहा 'हम सभी भारतीय नागरिकों की गोपनीयता को सुरक्षित रखने की आवश्यकता के बारे में भारत सरकार के बयान से सहमत हैं। इसीलिए हमने साइबर हमलावरों को जवाबदेह ठहराने के लिए यह कड़ी कार्रवाई की है और व्हाट्सएप सभी उपयोगकर्ता संदेशों की सुरक्षा के लिए इतना प्रतिबद्ध है। हालांकि, प्रवक्ता ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की कि व्हाट्सएप ने सरकार की क्वेरी पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

व्हाट्सएप ने कहा था कि वह NSO ग्रुप पर मुकदमा कर रहा है, जो एक इजरायली सर्विलांस फर्म है। कथित तौर पर यहीं फर्म टेक्नोलॉजी के पीछे है जिसकी मदद से अज्ञात संस्था ने लगभग 1,400 उपयोगकर्ताओं के फोन को हैक किया। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि किसके इशारे पर दुनिया भर के पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया।

NSO ग्रुप ने व्हाट्सएप के आरोपों से इनकार किया और कहा कि 'यह आतंकवाद और गंभीर अपराध से लड़ने में सरकारी खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को तकनीक प्रदान करता है।' NSO ने कहा, 'यह मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के खिलाफ उपयोग के लिए डिज़ाइन या लाइसेंस नहीं दिया गया है।' 

बता दें कि वाट्सएप (WhatsApp) ने बताया था कि ये जासूसी 29 अप्रैल से 10 मई के बीच हुई। उस वक़्त देश में आम चुनाव हो रहे थे। वाट्सएप का कहना है कि उन्हें मई में इसका पता चला और फिर उन्होंने इसे ब्लॉक कर दिया। 

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