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बृहस्पति स्मृति : मिलता है पुण्य, महादान है इन तीन चीजों का दान

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 08th, 2017 07:31 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। किसी भी कार्य के संपूर्ण होने में गुरू की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। गुरू अर्थात बृहस्पति, जो कि देवताओं के गुरू हैं। गुरू के अस्त होने पर शुभ कार्य भी नही होते। इससे गुरू बृहस्पति के महत्व का अनुमान लगाया जा सकता है। यहां हम आपको तीन ऐसे दानों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें महादान कहा गया है और इनका उल्लेख बृहस्पति स्मृति में भी मिलता है। कहा जाता है कि इनके दान से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं एवं उसे उत्तम लोक की प्राप्ति होती है...


गोदान अर्थात गाय का दान
वेद पुराणों में गोदान का अत्यधिक महत्व बताया गया है। गाय के दान से पुण्य प्राप्त होता है। देवताओं का आशीर्वाद लगता है और इस दान के पुण्य फल से स्वर्ग प्राप्त होता है। गाय का दान हिंदू धर्म में महादान माना गया है। 
 

विद्यादान अर्थात विद्या का दान
ज्ञान जितना दिया जाए उतना ही बढ़ता है। बीते जमाने में गुरू के चरणों में या समीप बैठकर ज्ञान प्राप्त किया जाता था। इन्हें ही उपनिषद कहा गया है। मनुष्य अपने ज्ञान को जितना बांटे अर्थात उसका दान करे उसे उतना ही पुण्य प्राप्त होता है। धर्म, विद्या और संसार में स्वयं को रहने योग्य बनाने की शिक्षा देना भी महादान माना गया है। इससे मां सरस्वती का आशीर्वाद सदा ही आप पर बना रहता है। 


भूदान अर्थात भूमि की दान
पुरातन काल में राजा-महाराजा भूमि का दान करते थे। किसी से प्रसन्न होने पर उसे भूमि उपहार स्वरूप दे दिया करते थे। असल में इसका मुख्य कारण महादान था। भूमिदान करना अर्थात किसी को उसके पालन-पोषण व रहने के लिए स्थान व सहयोग देना। इस दान को भी अति उत्तम व महादान माना गया है। इस तरह के दान का उल्लेख वेदों में भी मिलता है। विशेष रूप से राजा बलि द्वारा दिया गया दान।

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