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जानिए क्या है गुड़ी पड़वा का महत्व, क्यों इसी दिन शुरू होता है हिंदुओं का नववर्ष 

BhaskarHindi.com | Last Modified - March 18th, 2018 08:31 IST

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जानिए क्या है गुड़ी पड़वा का महत्व, क्यों इसी दिन शुरू होता है हिंदुओं का नववर्ष 


डिजिटल डेस्क । हिंदुओं का नववर्ष गुड़ी पड़वा से शुरू होता है। इस दिन हर घर के दरवाजे पर आपको गुड़ी दिखाई दे जाएगी, जिसकी पूजा की जाती है। इस बार 18 मार्च को गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जा रहा है. क्या आप जानते है कि आखिर इस दिन का महत्व क्या है। चैत्र ही एक ऐसा महीना है, जिसमें वृक्ष तथा लताएं फलते-फूलते हैं। शुक्ल प्रतिपदा का दिन चंद्रमा की कला का प्रथम दिवस माना जाता है। जीवन का मुख्य आधार वनस्पतियों को सोमरस चंद्रमा ही प्रदान करता है। इसे औषधियों और वनस्पतियों का राजा कहा गया है। इसीलिए इस दिन को वर्षारंभ माना जाता है। इस शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा, वर्ष प्रतिपदा, उगादि (युगादि) कहा जाता है। इस दिन हिन्दू नववर्ष का आरंभ होता है। 'गुड़ी' का अर्थ होता है - 'विजय पताका' 'युग' और 'आदि' शब्दों की संधि से बना है 'युगादि' । गुड़ी पड़वा को संस्कृत में चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के नाम से जानते हैं, ये चैत्र महीने के पहले दिन मनाया जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार गुड़ी पड़वा यानि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ माना जाता है। 

भारत के विभिन्न भागों में इस पर्व को भिन्न-भिन्न नामों से मनाया जाता है। गोवा और केरल में कोंकणी समुदाय इसे 'संवत्सर पड़वो' नाम से मनाता है। कर्नाटक में ये पर्व 'युगाड़ी' नाम से जाना जाता है। आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना में 'गुड़ी पड़वा' को 'उगाड़ी' नाम से मनाते हैं। कश्मीरी हिन्दू इस दिन को 'नवरेह' के तौर पर मनाते हैं। मणिपुर में यह दिन 'सजिबु नोंगमा पानबा' या 'मेइतेई चेइराओबा' कहलाता है। इस दिन चैत्र नवरात्रि भी आरंभ होती है।

सामान्य तौर पर इस दिन हिन्दू परिवारों में गुड़ी का पूजन किया जाता है और इस दिन लोग घर के दरवाजे पर गुड़ी लगाते हैं और घर के दरवाजों पर आम के पत्तों से बना बंदनवार सजाते हैं। ऐसा माना जाता है कि ये बंदनवार घर में सुख, समृद्धि और खुशियां लाता है।

गुड़ी पड़वा के लिए इमेज परिणाम

क्यों मनाते हैं ये पर्व ?

इस पर्व के मनाने के पीछे विशेष महत्व भी है। इससे कई कहानियां भी जुड़ी हैं। पौराणिक कथाओं में कहा जाता है कि इस दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था और मानव सभ्यता की शुरुआत हुई थी। अत: मुख्यत: ब्रह्माजी और उनके के जरिए बनीं इस सृष्टि के प्रमुख देवी-देवताओं, यक्ष-राक्षस, गंधर्व, ऋषि-मुनियों, नदियों, पर्वतों, पशु-पक्षियों और कीट-पतंगों का ही नहीं, रोगों और उनके उपचारों तक का भी पूजन किया जाता है। इसी दिन से नया संवत्सर शुरू होता है। अत: इस तिथि को 'नवसंवत्सर' भी कहते हैं।

इसी दिन हुई हिंदू पंचाग की रचना?

इस दिन से हिन्दुओं का नववर्ष आरंभ होता है, कहा जाता है महान गणितज्ञ भास्कराचार्य द्वारा इसी दिन से सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, मास और वर्ष की गणना कर पंचांग की रचना की गई थी। इसी कारण हिन्दू पंचांग का आरंभ भी गुड़ी पड़वा से ही होता है।

हिन्दुओं में पूरे साल के दौरान साढ़े तीन मुहूर्त बहुत शुभ माने जाते हैं। ये साढ़े तीन मुहूर्त हैं–गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया, दशहरा और दीवाली, दिवाली को आधा मुहूर्त माना जाता है।

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