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गुजरात में तीसरी ताकत बने हार्दिक करेंगे बीजेपी को सत्ता से बाहर ?

BhaskarHindi.com | Last Modified - February 16th, 2018 18:16 IST

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डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गुजरात में 14 दिसंबर को दूसरे फेस की वोटिंग की वोटिंग होनी है। रैलियों और जनता को लुभाने का दौर जारी है। मंगलवार शाम तक चुनाव प्रचार का दूसरा दौर भी थम जाएगा और 18 दिसंबर को गुजरात में नई सरकार बन जाएगी। इस बार का चुनाव उतना सरल नहीं है, जितना हर बार का था। हर बार चुनावी लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच हुआ करती थी, लेकिन इस बार एक तीसरा फैक्टर भी इस लड़ाई में है और वो है हार्दिक पटेल। 2015 में पाटीदार आंदोलन से उभरे हार्दिक पटेल आज बीजेपी को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। चाहे उनकी रैलियां हों, नुक्कड़ जनसभा हो या फिर रोड शो। जनता हार्दिक की रैलियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है। सोमवार रात को हार्दिक पटेल जब स्टेज पर आए, तो सारी भीड़ 'जय सरदार-जय सरदार' के नारे लगा रही थी। हार्दिक भी बड़े गंभीर अंदाज में अपनी बात रखना शुरू करते हैं और जनता भी बीच-बीच में 'होय-होय' चिल्लाना नहीं भूलती। मानों जनता नारे लगाने का इंतजार ही कर रही हो। हार्दिक भी कहते हैं कि इतनी जोर से चिल्लाएं, कि इसकी आवाज दिल्ली तक पहुंचे। हार्दिक की रैलियों में जनता का जुटना, क्या इस बात की गवाही दे रहा है कि हार्दिक गुजरात में एक बड़ी 'ताकत' बन गए हैं।


अपने खर्चे पर आते हैं लोग 

हार्दिक की रैलियों में भीड़ का आना, इस बात का साफ संकेत हैं कि गुजरात में हार्दिक एक बड़े नेता और बड़ी ताकत बन चुके हैं। हार्दिक की रैलियों भी जनता अपने खर्चे पर पहुंचती है, जबकि बीजेपी और दूसरी पार्टियां अपनी रैली में भीड़ बुलाने के लिए उनके आना-जाने का खर्चा उठाती है। इसके पीछे कारण है, कि हार्दिक सिर्फ उन्हीं मुद्दों की बात करते हैं, जिसका जनता से सीधे लगाव है। जबकि बीजेपी और दूसरी पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप ही लगाती हैं। हार्दिक अपनी रैलियों में पाटीदारों की समस्या उठाते हैं, जबकि दूसरी पार्टियां हमला और बचाव ही करती रहती हैं। इसके साथ ही हार्दिक पटेल के सारे भाषण गुजराती में होते हैं, जो सीधे जनता से कनेक्ट करते हैं। अपने भाषणों में भी हार्दिक ज्यादातर युवाओं का मुद्दा ही उठाते हैं। हार्दिक गुजराती में पूछते हैं कि 'एक युवान हाथ ऊंचो करे कि हूं सरकारी नौकरी करूं छूं...एक युवान हाथ ऊंचो करे कि हूं सरकारी स्कूल-कॉलेज में पढ़ूं छूं...एक युवान हाथ ऊंचो करे कि हूं जे कमाऊं छूं... कोई न... जनता भी ना कहकर जवाब देती है'।



क्यों आ रही है हार्दिक की रैलियों में भीड़? 

हार्दिक पटेल की रैलियों में जबरदस्त भीड़ आ रही है। आखिर इसके पीछे वजह क्या है? क्या हार्दिक युवाओं के आइकन बन चुके हैं या फिर पटेलों को आरक्षण दिलाने के हिमायती? तो इसका जवाब है पटेलों का गुस्सा। राज्य में बीजेपी के खिलाफ पटेलों का गुस्सा इस कदर बढ़ गया है, कि उन्हें हार्दिक में अपना नेता दिखाई देने लगा है। बताया जाता है कि आज भी कई पटेल युवा जेल में बंद है। इसके साथ ही कई पटेलों की हत्या कर दी गई। इन सबने पटेलों को नाराज कर दिया। यही कारण है कि, गुजरात मे दो वर्गों में पटेल एक हो चुके हैं। ये वही पटेल हैं, जिनके मंदिर भी अलग-अलग हैं। इसके साथ ही हार्दिक को सबसे ज्यादा फायदा अपना युवा होना है। हार्दिक युवा हैं, इस वजह से जनता उन्हें पसंद कर रही है। एक तरफ जहां युवाओं के लिए हार्दिक यूथ आइकन बन चुके हैं, वहीं बड़े-बुजुर्गों के लिए हार्दिक एक उम्मीद। युवा होने की वजह से हार्दिक को पसंद किया जा रहा है। इसके साथ ही हार्दिक की रैलियों में पटेलों के साथ-साथ दलित और मुस्लिम भी शामिल हो रहे हैं।



कैसे बढ़ी हार्दिक की लोकप्रियता? 

हार्दिक पटेल इस वक्त सिर्फ 24 साल के हैं, और इतनी कम उम्र में ही हार्दिक एक बड़े नेता बनकर उभरे हैं। दरअसल, बीजेपी के बड़े-बड़े नेताओं ने हार्दिक का विरोध किया, उनपर हमला बोला। इन सबने हार्दिक को कमजोर करने की बजाय मजबूत कर दिया है। हार्दिक अपने भाषणों में युवाओं में जोश भरने के लिए नारे लगवाते हैं। इसके साथ-साथ वो आखिरी में बूम-बूम-बूम बोलते हैं, जिससे जनता में जोश बढ़ता है। इसके साथ ही हार्दिक ने पाटीदार आंदोलन चलाकर पाटीदारों की समस्याओं को उठाया। गुजरात के 57 साल के इतिहास में पाटीदार कम्युनिटी काफी समृद्ध हुई है, लेकिन उसके बावजूद सरकारी मशीनरी में पाटीदार न के बराबर हैं। सरकारी नौकरियों में भी पाटीदारों का दबदबा उतना नहीं है।



मोदी पर वार करते हैं हार्दिक

हार्दिक पटेल अपनी रैलियों में पीएम मोदी पर सीधे वार करते हैं। इस वजह से गुजरात में मोदी बनाम हार्दिक की लड़ाई शुरू हो गई है। हार्दिक ने अपना आंदोलन पटेलों को साथ लेकर शुरू किया था, लेकिन अब उनके साथ दलितों और मुसलमानों के साथ-साथ क्षत्रिय और ठाकोर समाज के लोग भी आ गए हैं। कहा जा रहा है कि हार्दिक अब सिर्फ पाटीदार नेता ही नहीं हैं, बल्कि वो पूरे गुजरात के नेता बन चुके हैं। हार्दिक अपनी रैलियों में सीधे मोदी पर हमला करते हैं। सोशल मीडिया पर भी हार्दिक मोदी और अमित शाह पर ही निशाना साधते हैं। हार्दिक अब अपनी रैलियों में सिर्फ पटेलों की नहीं बल्कि सभी समुदायों की बात करते हैं। वो अपने भाषणों में महंगाई की, नौकरियों की, किसानों की बात करते हैं। वो ऐसी समस्याओं को उठाते हैं, जिससे जनता परेशान है।



क्या हार्दिक एक बड़ी ताकत बन गए हैं? 

गुजरात में हार्दिक पटेल एक बड़ी ताकत बन गए हैं? तो इसका जवाब है- हां। गुजरात में हार्दिक पटेल एक बड़े नेता बनकर उभरे हैं, जो हर मोर्चे पर बीजेपी और विरोधियों को टक्कर दे सकते हैं। उनके भाषणों में भी युवाओं और किसानों की बात होती है, जो कि बीजेपी और कांग्रेस की रैलियों में देखने को नहीं मिलती। हार्दिक को सुनने लोग रैलियों में बढ़-चढ़कर आते हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी हार्दिक को फॉलो किया जाता है। उनके भाषणों की लाइव स्ट्रीमिंग जब सोशल मीडिया पर की जाती है, तो लोग सुनते हैं। इतना ही नहीं, अगर हार्दिक रैली में आने में देरी भी कर जाएं, तो भी जनता उनके इंतजार में बैठी रहती है। भले ही देखने में लगे कि हार्दिक से सिर्फ बीजेपी को नुकसान है, ये कहना गलत होगा। क्योंकि हार्दिक अब विपक्षी नेता बनकर उभरे हैं, जिससे कांग्रेस को नुकसान होगा। 

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