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मां सरस्वती की उत्पत्ति है बसंत पंचमी, जानिए पूजा विधि, शुभ-मुहूर्त और पीले रंग का महत्व

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 25th, 2018 18:00 IST

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। इस सुंदर प्रकृति में बसंत पंचमी का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। इस दिन से बसंत ऋतु का प्रारंभ होता है। यूं तो भारत में 6 ऋतुएं होती हैं, लेकिन बसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। विद्या की देवी मां सरस्‍वती का जन्‍म बसंत पंचमी के दिन ही हुआ था, इसीलिए इस दिन मां सरस्वती की पूजा-वंदना की जाती है। पंचाग के अनुसार बसंत पंचमी माघ महीने की पंचमी तिथ‍ि को मनाई जाती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार इस बार बसंत पंचमी का त्यौहार 22 जनवरी सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन पवित्र नदियों में स्‍नान का व‍िशेष महत्‍व है। पवित्र नदियों के तट और तीर्थ स्‍थानों पर बसंत मेला भी लगता है।

बसंत पंचमी पर मां सरस्‍वती का जन्म
सृष्टि की रचना के समय भगवान ब्रह्मा जी को कुछ कमी सी महसूस हो रही थी। उन्हें इस सृष्टि में मनुष्य और जीव-जंतु तो दिखाई दे रहे थे, लेकिन उनके बीच कोई संवाद नहीं था। प्रकृति भी काफी शांत शांत सी महसूस हो रही थी। चारों ओर एक अजीब सा सन्‍नाटा छाया पसरा हुआ था। इसको दूर करने के लिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का और चार हाथों वाली एक सुंदर देवी प्रकट हुईं। जिन्हें हम मां सरस्वती के नाम से पूजते हैं।

मां के एक हाथ में वीणा और दूसरा हाथ वर देने की मुद्रा में था, बाकि दोनों हाथों में पुस्तक और माला थी। ब्रह्मा जी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी मिल गई। हवा सरसराहट कर बहने लगी। जल धारा कोलाहल करने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहकर पुकारा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणा वादनी और वाग्देवी समेत कई नामों से पूजा जाता है। वो विद्या, बुद्धि और संगीत की देवी हैं। इसीलिए इस दिन से बसंत पंचमी मनाया जाने लगा और इस दिन को मां सरस्वती के जन्म दिन के तौर पर मनाते हुए उनकी पूजा-वंदना की जाने लगी।

किसानों के लिए बसंत पंचमी
बसंत पचंमी को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इस दौरान मौसम काफी सुहाना हो जाता है। पेड़-पौधों में नए फल-फूल पल्‍लवित होने लगते हैं। मगर दूसरी ओर यह बसंत पंचमी का त्यौहार किसानों के लिए भी काफी महत्व रखता है। कारण यह है कि इस दिन से बसंत ऋतु का आगमन हो जाता है और सारे सरसों के खेत लहलहा उठते हैं। चना, जौ, ज्‍वार और गेहूं की बालियां ख‍िलने लगती हैं। इस दिन पलाश के लाल फूल, आम के पेड़ों पर आए बौर, हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को सुहाना बना देती है। कड़कड़ाती ठंड के बाद प्रकृति की छटा देखते ही बनती है।

बसंत पंचमी पर कामदेव की पूजा
बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है। बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है। इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है। इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है। इनके बाणों का कोई कवच नहीं है।

बसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व
बसंत पंचमी त्योहार पर पीले रंग का बड़ा महत्व माना गया है। बताया गया है कि बसंत का पीला रंग समृद्धि, ऊर्जा, प्रकाश और आशावाद का प्रतीक है। इसलिए इस दिन पीले रंग का काफी महत्व माना गया है। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनते और व्यंजन बनाते हैं।

बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है। न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का पूजन शुभ मुहूर्त में करने से विद्या, धन, वैभव सभी कुछ पाया जा सकता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त...
इस बार बसंत पंचमी 22 जनवरी को मनाई जाएगी। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 17 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक है। यानी कुल 5 घंटे 15 मिनट तक देवी सरस्‍वती की आराधना का शुभ मुहूर्त है।


पढ़ें इस दिन मां सरस्‍वती की पूजा-विधि...

  • - बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं।
  • - मां सरस्वती के बीज मंत्र "ॐ ऐं नमः" या "ॐ सरस्वत्यै नमः" का जाप करें
  • - इस दिन मां सरस्वती की दूध, दही, मक्खन, घी, नारियल से पूजा करनी चाहिए।
  • - बच्चे की जुबान पर शहद से ओम बनाना चाहिए इससे बच्चा ज्ञानी बनता है।
  • - इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है।
  • - इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है। उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं।
  • - इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
  • - पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करें तो यह भी शुभ होता है।
  • - इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन किया जाता है। बंगाल में इस द‍िन पीले रंग की ख‍िचड़ी खाई जाती है।

मां सरस्‍वती का श्‍लोक
मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:
ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।
कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।
वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।
रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।
सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च

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