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शिव ने इसी प्रश्नावली खोजीं थीं माता सती, भविष्य को जानने का आसान तरीका

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 17th, 2017 07:47 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भविष्य को देखने और इसके बारे में जानने के अनेक तरीके बताए गए हैं। कोई इनके बारे में दूरदृष्टि से जानने का दावा करता है तो कोई ये बताता है कि किस विधि से भविष्य को जान सकते हैं। हाथ की रेखाएं और मस्तक पढ़ना भी इसी में शामिल है, लेकिन आज हम यहां बात कर रहे हैं रमन प्रश्नावली की। कहा जाता है कि जब भगवान शिव सती के वियोग से विचलित थे तब भैरव ने उनके सामने चार बिंदू बनाए और भोलेनाथ से उसी में सती को खोजने के लिए कहा। इस पर शिव ने सातवें लोक में जगतजननी को विशेष विधान से देखा। 

शिव और शक्ति से संबंध

एक अन्य कथा के अनुसार साक्षात सती ने अपने भक्त को अरब सागर के रेगिस्तान से निकालने के लिए उसके समक्ष चार बिंदू बनाए थे जिससे वह वहां से बाहर निकलने का मार्ग खोज पाया। इन दोनों कथाओं का संबंध शिव और शक्ति से है।

प्रकाण्ड ज्ञाता 

कहा जाता है कि तभी से इस शास्त्र की उत्पत्ति हुई और इसके जरिए भविष्य जानने का प्रयास किया जाने लगा। ये भी बताया जाता है कि इस विद्या का द्वापरयुग में अत्यधिक प्रचलन था। माय दानव से लेकर आदि शंकराचार्य तक इस विद्या के जानकर व प्रकाण्ड ज्ञाता थे। 

प्रश्नावली...
इसके अंतर्गत चौकोर पाट चंदन की लकड़ी से बनवाया जाता है जिस पर 1, 2,3 और 4 खुदवा दिया जाता है। फिर उसी के तीन पासे बनाए जाते हैं जिन पर इसी प्रकार के अंक लिखे होते हैं। इसके पश्चात माता कुष्मांडा का ध्यान किया जाता है और इन पासों को छोड़ा जाता है। इसमें जो भी अंक आता है उसका फल भी लिखा होता है। इस तरह आप करीब 444 प्रश्नों के फल या हल जान सकते हैं। इस प्रश्नावली के बारे में अधिक जानकारी इसके जानकर से प्राप्त की जा सकती है। इसका प्रयोग किसी विद्वान के मार्गदर्शन में ही करें तो उत्तम होगा। हालांकि इसके साथ ही गणेश प्रश्नावली रामचरितमानस, राम शलाका प्रश्नावली भी होती है, जो आमतौर पर कैलेंडर में दी जाती है। इसका प्रयोग भी आप अपने प्रश्नों का हल या परिणाम जानने के लिए कर सकते हैं। 

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