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बालाकोट में फिर एक्टिव हुए ट्रेनिंग कैंप, 500 आतंकी घुसपैठ की फिराक में, सेना अलर्ट पर

September 24th, 2019 09:24 IST

हाईलाइट

  • पाकिस्तान ने बालाकोट में आतंकवादी ट्रेनिंग कैंप को फिर से एक्टिव कर दिया
  • करीब 500 आतंकी भारत में घुसपैठ करने की फिराक में है
  • जानकारी के सामने आने के बाद सेना हाई अलर्ट पर है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी ट्रेनिंग कैंप को 'हाल ही में' फिर से सक्रिय कर दिया है। करीब 500 आतंकी भारत में घुसपैठ करने की फिराक में है। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सोमवार को चेन्नई में अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी में ये बात कही। इस जानकारी के सामने आने के बाद सेना हाई अलर्ट पर है और उसे किसी भी सुरक्षा चुनौती से 'प्रभावी ढंग से' निपटने की पूरी आजादी दी गई है।

बालाकोट आतंकी ट्रेनिंग कैंप
बालाकोट पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मनसेहरा जिले में है, जो एबटाबाद से 63 किमी उत्तर में है, जहां मई 2011 में संयुक्त राज्य की विशेष सेना ने ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। यह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से लगभग 200 किलोमीटर और मुजफ्फराबाद के उत्तर-पश्चिम में 40 किमी दूर है। मुजफ्फराबाद पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) की राजधानी है।

भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में एक पहाड़ी पर मौजूद जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप को तबाह किया था। भारतीय खुफिया एजेंसियों के एक एक डोजियर के अनुसार, ये कैंप छह एकड़ में फैला था। इस कैंप में करीब 600 आतंकवादियों को आसानी से ट्रेनिंग दी जा सकती थी। डोजियर में जैश कैडरों की सूची भी थी जो कैंप में ट्रेनिंग ले रहे थे। कॉम्प्लेक्स में घूम रहे आतंकवादियों के, उनके व्यायाम कक्ष, गोला बारूद और फायरिंग रेंज आदि के फोटोग्राफिक एविडेंस भी इस डोजियर में है।

जिहादी प्रोजेक्ट का केंद्र है बालाकोट
बालाकोट, और वास्तव में पूरा मानसेहरा जिला, लंबे समय से पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान के जिहादी प्रोजेक्ट का केंद्र रहा है। इस क्षेत्र में मस्जिदों और मदरसों की बहुत बड़ी संख्या है। अफगान युद्ध के लिए यहीं पर पहले कैंप की स्थापना की गई थी। बाद में इन कैंपों में कश्मीर में घुसपैठ और आतंकी हमलों के लिए जिहादियों को ट्रेनिंग देना शुरू किया गया।

बालाकोट के करीब गढ़ी हबीबुल्ला है, जहां हिजबुल मुजाहिदीन का ट्रेनिंग कैंप है। 2005 में, मासिक पाकिस्तानी पत्रिका हेराल्ड ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट में मानसेहरा जिले में विभिन्न जिहादी ट्रेनिंग कैंपों के फिर से शुरू होने के जानकारी दी गई थी। इन कैंपों को संयुक्त राज्य अमेरिका में 11 सितंबर, 2001 के आतंकवादी हमलों के बाद कुछ वर्षों तक बंद कर दिया गया था।

जैश गतिविधियों का नर्व सेंटर
भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक के बाद अपनी मीडिया ब्रीफिंग में, विदेश सचिव विजय गोखले ने उल्लेख किया था कि जैश प्रमुख मसूद अजहर ने बालाकोट आतंकी ट्रेनिंग कैंप की देखरेख की जिम्मेदारी अपने बहनोई यूसुफ जौहर को दी थी। मसूद अजहर अपने परिवार के सदस्यों के बीच आतंकवाद के व्यापक साम्राज्य में ‘पोर्टफोलियो’ बांटकर काम करता है।

जैश के इंडियन डोजियर में यूसुफ अज़हर की तस्वीरें हैं, और उस वाहन की भी तस्वीरें है जिसका उपयोग वह रोजाना ट्रेनिंग ग्राउंड और बालाकोट की फायरिंग रेंज पर जाने के लिए करता है। इंडियन इंटेलिजेंस की जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल, 2018 को बालाकोट में आतंकवादी भर्तियों के 'पासिंग आउट' में मसूद अजहर का भाई अब्दुल रऊफ असगर ने भी भाग लिया था।'

जैश के लिए बालाकोट का क्या है महत्व?
जैश के लिए बालकोट का बहुत प्रतीकात्मक महत्व है। इस जगह पर सैयद अहमद शहीद और उसके सहयोगी शाह इस्माइल शहीद को दफन किया गया था। मई 1831 में सिख सम्राट महाराजा रणजीत सिंह की सेना के खिलाफ लड़ते हुए दोनो मारे गए थे। बालाकोट में जैश प्रशिक्षण शिविर का नाम सैयद अहमद शहीद के नाम पर रखा गया है।

भारतीय खुफिया विभाग का मानना ​​है कि मसूद अजहर के दो भतीजों ताल्हा रशीद और उस्मान हैदर के मारे जाने के बाद जैश के सैयद अहमद शहीद ट्रेनिंग कैंप के अंदर की गतिविधियां और ज्यादा संगठित हो गईं। कैंपों में बड़ी संख्या में आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाने लगी।

ताल्हा रशीद अज़हर के बहनोई अब्दुल रशीद का बेटा था। भारतीय सुरक्षा बलों ने 2017 में पुलवामा में एक मुठभेड़ के दौरान ताल्हा को मार गिराया था।

जबकि अजहर के दूसरे भतीजे उस्मान हैदर को अक्टूबर 2018 में त्राल में ढेर कर दिया गया था। उस्मान IC-814 के अपहर्ताओं में से एक था। वह इब्राहिम अजहर का बेटा था। लगभग दो दशक पहले भारतीय जेल में बंद मसूद अजहर को रिहा करवाने के लिए IC-814 को हाईजैक किया किया गया था।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान ने बहावलपुर में जैश के मुख्यालय को खाली करवा दिया था। बड़ी संख्या में आतंकवादी कैडरों को बालाकोट ट्रेनिंग कैंप में शिफ्ट कर दिया गया था। पुलवामा हमले के जवाब में इस साल फरवरी में भारतीय वायुसेना ने एयरस्ट्राइक कर इन कैंपों को तबाह किया था। 

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