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आज भी उपस्थित हैं महाभारत काल के ये 35 नगर, जानें इनके बारे में  

BhaskarHindi.com | Last Modified - February 08th, 2019 15:20 IST

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आज भी उपस्थित हैं महाभारत काल के ये 35 नगर, जानें इनके बारे में  

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिन्दू धर्म का प्रमुख काव्य ग्रंथ महाभारत के बारे में सभी ने सुना और पढ़ा है। इस ग्रन्थ को हिन्दू धर्म में पंचम वेद माना जाता है। आज भी यह ग्रंथ प्रत्येक भारतीय के लिए एक अनुकरणीय स्रोत है। वहीं आपने इस ग्रंथ में कई राज्यों और नगरों के बारे में पढ़ा होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं, इस ​कथा में वर्णित कई राज्य और नगर आज भी अस्तित्व में हैं। आइए आज हम महाभारत कथा में वर्णित उन 35 राज्यों और नगरों के बारे में जानते हैं...

1.गांधार  
आज के कंधार को कभी गांधार के रूप में जाना जाता था। यह देश पाकिस्तान के रावलपिन्डी से लेकर सुदूर अफगानिस्तान तक फैला हुआ था। धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी वहां के राजा सुबल की पुत्री थीं। गांधारी के भाई शकुनी दुर्योधन के मामा थे।

2. तक्षशिला  
तक्षशिला गांधार देश की राजधानी थी। इसे वर्तमान में रावलपिन्डी कहा जाता है। तक्षशिला को ज्ञान और शिक्षा की नगरी भी कहा जाता था।

3. केकय प्रदेश  
जम्मू-कश्मीर के उत्तरी भाग का उल्लेख महाभारत में केकय प्रदेश के रूप में है। केकय प्रदेश के राजा जयसेन का विवाह वसुदेव की बहन राधादेवी के साथ हुआ था। उनका पुत्र विन्द जरासंध, दुर्योधन का मित्र था। महाभारत के युद्ध में विन्द ने कौरवों का साथ दिया था।

4. मद्र देश 
केकय प्रदेश से ही सटा हुआ मद्र देश का भावार्थ जम्मू-कश्मीर से ही है। एतरेय ब्राह्मण के अनुसार, हिमालय के निकट होने के कारण मद्र देश को उत्तर कुरू भी कहा जाता था। महाभारत काल में मद्र देश के राजा शल्य थे, जिनकी बहन माद्री का विवाह राजा पाण्डु से हुआ था। नकुल और सहदेव माद्री के पुत्र थे।

5. उज्जनक 
आज के नैनीताल की चर्चा महाभारत में उज्जनक के रूप में की गई है। गुरु द्रोणचार्य यहां पांडवों और कौरवों की अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा देते थे। कुन्ती पुत्र भीम ने गुरु द्रोण के आदेश पर यहां एक शिवलिंग की स्थापना की थी। इस क्षेत्र को भीमशंकर के नाम से भी जाना जाता है। यहां शिव ज्योतिर्लिंग मंदिर है। 

6. शिवि देश  
महाभारत काल में दक्षिण पंजाब को शिवि देश कहा जाता था। महाभारत में महाराज उशीनर की चर्चा है, जिनके पौत्र शैव्य थे। शैव्य की पुत्री देविका का विवाह युधिष्ठिर से हुआ था। शैव्य एक महान धनुर्धारी थे और उन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडवों का साथ दिया था।

7. वाणगंगा
कुरुक्षेत्र से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है बाणगंगा। कहा जाता है कि महाभारत के भीषण युद्ध में घायल पितामह भीष्म को यहां बाण-सैय्या पर लिटाया गया था। महाभारत कथा के अनुसार भीष्मपितामह ने प्यास लगने पर जब जल माँगा तो अर्जुन ने अपने बाण से धरती पर प्रहार किया और गंगा की धारा फूट पड़ी। तभी से इस स्थान को वाणगंगा कहा जाता है।

8. कुरुक्षेत्र 
हरियाणा के अम्बाला को कुरुक्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। यहां महाभारत का युद्ध हुआ था। यही नहीं, आदिकाल में ब्रह्माजी ने यहां यज्ञ का आयोजन किया था। इस स्थान पर एक ब्रह्म सरोवर या ब्रह्मकुंड भी है। श्रीमद् भागवत में लिखा हुआ है कि महाभारत के युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने यदुवंश के अन्य सदस्यों के साथ इस सरोवर में स्नान किया था।

9. हस्तिनापुर  
महाभारत में लिखित हस्तिनापुर आज के मेरठ के पास है। यह स्थान चन्द्रवंशी राजाओं की राजधानी थी। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने हस्तिनापुर को अपने राज्य की राजधानी बनाया।

10. वर्नावत 
यह स्थान भी उत्तर प्रदेश के मेरठ के पास ही है। वर्णावत में पांडवों को छल से मारने के लिए दुर्योधन ने लाक्षागृह का निर्माण करवाया था। यह स्थान गंगा नदी के किनारे स्थित है। 

11. पांचाल प्रदेश
हिमालय की तराई क्षेत्र पांचाल प्रदेश के रूप में अंकित है। पांचाल के राजा द्रुपद थे, उनकी पुत्री द्रौपदी का विवाह पांच पांडव के साथ हुआ था। 

12. इन्द्रप्रस्थ  
वर्तमान में दक्षिण दिल्ली के इस क्षेत्र का वर्णन महाभारत में इन्द्रप्रस्थ के रूप में है। कथा के अनुसार, इस स्थान पर एक वियावान जंगल था, जिसका नाम खांडव-वन था। पांडवों ने विश्वकर्मा की सहायता से यहां अपनी राजधानी बनाई थी। इन्द्रप्रस्थ नामक छोटा सा कस्बा यहां आज भी है।

13. वृन्दावन 
यह स्थान मथुरा से करीब 10 किलोमीटर दूर है। यहां का बांके-बिहारी मंदिर प्रसिद्ध है।

14. गोकुल  
यमुना नदी के किनारे बसा हुआ यह स्थान भी मथुरा से करीब 8 किलोमीटर दूर है। कंस से रक्षा के लिए कृष्ण के पिता वसुदेव ने उन्हें अपने मित्र नंदराय के घर गोकुल में छोड़ दिया था। 

15. बरसाना 
यह स्थान भी उत्तर प्रदेश में है। यहां की चार पहाड़ियों के बारे में कहा जाता है कि ये ब्रह्मा के चार मुख हैं।

16. मथुरा 
यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है। यहां राजा कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। यहीं पर श्रीकृष्ण ने बाद में कंस का वध भी किया था। 

17. अंग देश 
वर्तमान में उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के क्षेत्र का उल्लेख महाभारत में अंगदेश के रूप में है। दुर्योधन ने कर्ण को इस देश का राजा घोषित किया था। इस स्थान को शक्तिपीठ के रूप में भी जाना जाता है।

18. कौशाम्बी 
कौशाम्बी वत्स देश की राजधानी थी। वर्तमान में प्रयागराज के निकट इस नगर के लोगों ने महाभारत के युद्ध में कौरवों का साथ दिया था। परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने कौशाम्बी को अपनी राजधानी बनाया।

19. काशी  
महाभारत काल में काशी को शिक्षा का गढ़ माना जाता था। महाभारत की कथा के अनुसार, पितामह भीष्म काशी नरेश की पुत्रियों अम्बा, अम्बिका और अम्बालिका को जीत कर ले गए थे, ताकि उनका विवाह विचित्रवीर्य से कर सकें। 

20. एकचक्रनगरी  
वर्तमान में बिहार का आरा जिला महाभारत काल में एकचक्रनगरी के रूप में जाना जाता था। लाक्षागृह के षडयंत्र से बचने के बाद पांडव कई दिनों तक एकचक्रनगरी में रहे थे। इस स्थान पर भीम ने बकासुर नामक एक राक्षस का अन्त किया था। 

21. मगध  
दक्षिण बिहार में उपस्थित मगध जरासंध की राजधानी थी। जरासंध की दो पुत्रियां अस्ती और प्राप्ति का विवाह कंस से हुआ था। 

22. पुन्डरू देश 
वर्तमान समय में बिहार के इस स्थान पर राजा पोन्ड्रक का राज था। पोन्ड्रक जरासंध का मित्र था और उसे लगता था कि वह कृष्ण है। उसने न केवल कृष्ण का वेश धारण किया था, बल्कि उसे वासुदेव और पुरुषोत्तम कहलवाना पसन्द था। 

23. प्रागज्योतिषपुर 
गुवाहाटी का उल्लेख महाभारत में प्रागज्योतिषपुर के रूप में किया गया है। महाभारत काल में यहां नरकासुर का राज था, जिसने 16 हजार कन्याओं को बन्दी बना रखा था। बाद में श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया और सभी 16 हजार कन्याओं को वहां से छुड़ाकर द्वारका लाए और सभी से विवाह किया। 

24. कामख्या 
गुवाहाटी से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कामख्या एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। भागवत पुराण के अनुसार, जब भगवान शिव सती के मृत शरीर को लेकर बदहवाश इधर-उधर भाग रहे थे, तभी भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के मृत शरीर के कई टुकड़े कर दिए। सती के अंगों के 51 टुकड़े जगह-जगह गिरे और बाद में ये स्थान शक्तिपीठ बने। कामख्या भी उन्हीं शक्तिपीठों में से एक है।

25. मणिपुर 
नगालैन्ड, असम, मिजोरम और वर्मा से घिरा हुआ मणिपुर महाभारत काल से भी पुराना है। मणिपुर के राजा चित्रवाहन की पुत्री चित्रांगदा का विवाह अर्जुन के साथ हुआ था। उससे एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम था बभ्रुवाहन। राजा चित्रवाहन की मृत्यु के बाद बभ्रुवाहन को यहां का राजा बनाया गया। 

26. सिन्धु देश 
सिन्धु देश का तात्पर्य प्राचीन सिन्धु सभ्यता से है। यह स्थान न केवल अपनी कला और साहित्य के लिए प्रसिद्ध था, बल्कि वाणिज्य और व्यापार में भी यह अग्रणी था। यहां के राजा जयद्रथ का विवाह धृतराष्ट्र की पुत्री दुःश्शाला के साथ हुआ था। 

27. मत्स्य देश 
राजस्थान के उत्तरी इलाके का उल्लेख महाभारत में मत्स्य देश के रूप में है। इसकी राजधानी थी विराटनगरी। अज्ञातवास के दौरान पांडव वेश बदल कर राजा विराट के सेवक बन कर रहे थे। यहां राजा विराट के सेनापति और साले कीचक ने द्रौपदी पर बुरी नजर डाली थी। बाद में भीम ने उसकी हत्या कर दी। अर्जुन के पुत्र अभिमन्यू का विवाह राजा विराट की पुत्री उत्तरा के साथ हुआ था।

28. मुचकुन्द तीर्थ 
यह स्थान धौलपुर, राजस्थान में है। मथुरा पर विजय प्राप्त करने के बाद कालयावन ने भगवान श्रीकृष्ण का पीछा किया तो उन्होंने स्वयं को एक गुफा में छुपा लिया। उस गुफा में मुचकुन्द सो रहे थे, उन पर कृष्ण ने अपना पीताम्बर डाल दिया। कृष्ण का पीछा करते हुए कालयावन भी उसी गुफा में आ पहुंचा। मुचकुन्द को कृष्ण समझकर उसने उन्हें जगा दिया। जैसे ही मुचकुन्द ने आंख खोला तो कालयावन जलकर भस्म हो गया। 

29. पाटन 
महाभारत की कथा के अनुसार, गुजरात का पाटन द्वापर युग में एक प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र था। पाटन के निकट ही भीम ने हिडिम्ब नामक राक्षस का संहार किया था और उसकी बहन हिडिम्बा से विवाह किया। 

30. द्वारका
माना जाता है कि गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित यह स्थान कालान्तर में समुन्दर में समा गया। 

31. प्रभाष 
गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित इस स्थान के बारे में कहा जाता है कि यह स्थान भगवान श्रीकृष्ण का निवास-स्थान रहा है। महाभारत कथा के अनुसार, यहां भगवान श्रीकृष्ण पैर के अंगूठे में बाण लगने से मृत हो गए थे। उनके गोलोकवासी होने के बाद द्वारका नगरी समुन्दर में डूब गई। 

32. अवन्तिका  
मध्यप्रदेश के उज्जैन का उल्लेख महाभारत में अवन्तिका के रूप में मिलता है। यहां ऋषि सांदपनी का आश्रम था। अवन्तिका को देश के सात प्रमुख पवित्र नगरों में एक माना जाता है। यहां भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंगों में एक महाकाल लिंग स्थापित है।

33. चेदी 
वर्तमान में ग्वालियर क्षेत्र को महाभारत काल में चेदी देश के रूप में जाना जाता था। गंगा व नर्मदा के मध्य स्थित चेदी महाभारत काल के संपन्न नगरों में से एक था। इस राज्य पर श्रीकृष्ण के फुफेरे भाई शिशुपाल का राज था। युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के समय चेदी नरेश शिशुपाल को भी आमंत्रित किया गया था। शिशुपाल ने यहां कृष्ण को बुरा-भला कहा, तो कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका शीश काट दिया। 

34. सोणितपुर 
मध्यप्रदेश के इटारसी को महाभारत काल में सोणितपुर के नाम से जाना जाता था। सोणितपुर पर वाणासुर का राज था। वाणासुर की पुत्री उषा का विवाह भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के साथ सम्पन्न हुआ था। 

35. विदर्भ  
महाभारतकाल में विदर्भ क्षेत्र पर जरासंध के मित्र राजा भीष्मक का राज था। रुक्मिणी भीष्मक की पुत्री थीं। भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का अपहरण कर उनसे विवाह रचाया था।

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