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कमजोर दिल वालों को ज्यादा प्रभावित करती है अमावस्या-पूर्णिमा

BhaskarHindi.com | Last Modified - August 08th, 2018 19:18 IST

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कमजोर दिल वालों को ज्यादा प्रभावित करती है अमावस्या-पूर्णिमा

टीम डिजिटल, भोपाल. पूर्णिमा और अमावस्या, नाम सुनते ही लोगों के मन में अलग-अलग धारणाएं बनने लगती हैं.अमावस्या को लेकर सबसे ज्यादा डर सताता है पूर्णिमा को जहां चांद अपने पूर्ण अवतार में नजर आता है वहीं अमावस्या को काली अंधेरी रात होती है. कहते हैं कि इस दिन बुरी आत्माएं विचरण करती हैं. जो कमजोर मन वालों को अपनी पकड़ में ले लेती हैं.  वर्ष में 12 पूर्णिमा और 12 अमावस्या होती हैं. विद्वानों ने इन दोनों ही दिनों के लिए अलग-अलग महत्व बताए हैं. इन दोनों ही दिनों का सीधा संबंध धर्म के साथ-साथ साइंस से भी है। पूर्णिमा और अमावस्या का असर सिर्फ प्रकृति पर ही नहीं हमें अपने शरीर और मन पर भी देखने मिलता है.

बेचैन रहता है मन
पूर्णिमा की रात मन ज्यादा बेचैन रहता है और नींद कम ही आती है. कमजोर दिल-दिमाग वाले लोगों के मन में आत्महत्या या हत्या करने के विचार बढ़ जाते हैं. चांद का धरती के जल से संबंध है. जब पूर्णिमा आती है तो समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है, क्योंकि चंद्रमा समुद्र के जल को ऊपर की ओर खींचता है. मानव के शरीर में भी लगभग 85 प्रतिशत जल रहता है. पूर्णिमा के दिन इस जल की गति और गुण बदल जाते हैं.

चन्द्रमा का प्रभाव काफी तेज
वैज्ञानिकों के अनुसार इस दिन चन्द्रमा का प्रभाव काफी तेज होता है इन कारणों से शरीर के अंदर रक्त में न्यूरॉन सेल्स क्रियाशील हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में इंसान ज्यादा उत्तेजित या भावुक रहता है. एक बार नहीं, प्रत्येक पूर्णिमा को ऐसा होता रहता है तो व्यक्ति का भविष्य भी उसी अनुसार बनता और बिगड़ता रहता है.

न्यूरॉन सेल्स
जिन्हें मंदाग्नि रोग होता है या जिनके पेट में चय-उपचय की क्रिया शिथिल होती है, तब अक्सर सुनने में आता है कि ऐसे व्यक्ति भोजन करने के बाद नशा जैसा महसूस करते हैं और नशे में न्यूरॉन सेल्स शिथिल हो जाते हैं जिससे दिमाग का नियंत्रण शरीर पर कम, भावनाओं पर ज्यादा केंद्रित हो जाता है. ऐसे व्यक्तियों पर चन्द्रमा का प्रभाव गलत दिशा लेने लगता है. इस कारण पूर्णिमा व्रत का पालन रखने की सलाह दी जाती है.

मन का देवता
ज्योतिष में चन्द्र को मन का देवता माना गया है. अमावस्या के दिन चन्द्रमा दिखाई नहीं देता. ऐसे में जो लोग अति भावुक होते हैं, उन पर इस बात का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है. जो व्यक्ति नकारात्मक सोच वाला होता है उसे नकारात्मक शक्ति अपने प्रभाव में ले लेती है. अमावस्या सूर्य और चन्द्र के मिलन का काल है. इस दिन दोनों ही एक ही राशि में रहते हैं.

उल्लेखनीय है कि सूर्य चन्द्रमा से बड़ा होने के कारण अधिक आकर्षण बल रखता है. लेकिन चन्द्रमा सूर्य की अपेक्षा पृथ्वी के अधिक निकट है, इसलिए चन्द्रमा का आकर्षण बल अधिक प्रभावशाली है. सूर्य का आकार चन्द्रमा के आकार से तीन अरब गुना बड़ा है. लेकिन वह चन्द्रमा की अपेक्षा तीन सौ गुना अधिक दूर स्थित है. इसलिए ज्वार उत्पन्न करने की चन्द्रमा की शक्ति सूर्य की अपेक्षा 2.17 गुना अधिक है .

साल की प्रमुख
अमावस्या- भौमवती अमावस्या, मौनी अमावस्या, शनि अमावस्या, हरियाली अमावस्या, दिवाली अमावस्या, सोमवती अमावस्या, सर्वपितृ अमावस्या.
पूर्णिमा- कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा आदि.

उपाय
- इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए. इसके शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम होते हैं.
- किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए.
- इन दोनों ही दिनों पर पवित्र जल में स्नान कर धार्मिक कार्यों में मन लगाना चाहिए.
- अपने मन को शांत रखने का प्रयास करना चाहिए, जिससे गलत भावनाएं आप पर हावी ना हो सकें.
- जंगली जानवरों और अपने पालतु से भी सावधान रहना चाहिए, बुरी शक्तियां के प्रभाव से ये आपको नुकसान भी पहुंचा सकते हैं.

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