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Murder Case: पहलवान सुशील कुमार की तलाश में दिल्ली पुलिस की छापेमारी, पीड़ितों के बयान दर्ज

May 09th, 2021 18:30 IST
Murder Case: पहलवान सुशील कुमार की तलाश में दिल्ली पुलिस की छापेमारी, पीड़ितों के बयान दर्ज

हाईलाइट

  • हत्या के मामले में पुलिस ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार की तलाश कर रही
  • मॉडल टाउन थाना पुलिस ने दिल्ली एनसीआर के साथ ही दूसरे राज्यों में छापा मारा
  • पुलिस इस मामले में झज्जर निवासी प्रिंस दलाल (24) को अरेस्ट कर चुकी है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। छत्रसाल स्टेडियम में जूनियर नेशनल चैंपियन रहे सागर पहलवान की हत्या के मामले में पुलिस ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार की तलाश कर रही है। ऐसे में दिल्ली के मॉडल टाउन थाने की पुलिस ने दिल्ली एनसीआर के साथ ही दूसरे राज्यों में छापा मारा। हालांकि पुलिस को सुशील कुमार को कोई भी सुराग हाथ नहीं लगा। सुशील और उनके अन्य साथी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस इस मामले में झज्जर निवासी प्रिंस दलाल (24) को अरेस्ट कर चुकी है।

बता दें कि यह घटना 4 मई की है। देर रात छत्रसाल स्टेडियम की पार्किंग में पहलवानों के दो गुटों में झगड़ा हुआ था। उसमें तीन पहलवान सागर, सोनू और अमित जख्मी हुए थे। इलाज के दौरान सागर की मौत हो गई थी। इस मामले में सुशील और उसके साथियों का नाम सामने आया था। तभी से पुलिस इन लोगों की तलाश कर रही है। मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस की 12 से अधिक टीमें छापेमारी कर रही है। सुशील की आखिरी लोकेशन हरिद्वार में मिली थी। उसके बाद से लगातार उसका मोबाइल बंद आ रहा है।

पुलिस ने सभी पीड़ितों के बयान भी दर्ज किए है। इस दौरान उन्होंने कहा कि सागर और उनके कुछ दोस्त, जिनमें घायल सोनू महल, जो गैंगस्टर काला जत्थेदी का करीबी सहयोगी है, स्टेडियम के पास सुशील से जुड़े घर में रह रहे थे। उन्हें हाल ही में ये घर खाली करने के लिए कहा गया था और उन्हें जबरदस्ती घर से निकाल दिया गया था। सुशील को बाद में पता चला कि सागर ने अन्य पहलवानों के सामने छत्रसाल स्टेडियम में उसके खिलाफ गलत शब्दों का उपयोग किया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।

वहीं पुलिस को इस मामले में गिरफ्तार आरोपी प्रिंस दलाल के मोबाइल फोन से एक वीडियो क्लिप मिली है। बताया जा रहा है कि इसमें सुशील अपने साथियों के साथ सागर व उसके दोस्तों की पिटाई करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने मोबाइल फोन को जांच के लिए एफएसएल भेज दिया है। पुलिस ने सुशील और बाकी आरोपी दोस्तों की सीडीआर भी निकलवाई है। उस दिन उनकी लोकेशन कहां की थी। इसका भी पता लगाया जा रहा है। जिस फ्लैट से सागर और उसके दोस्तों को अगवा कर छत्रसाल स्टेडियम लाया गया था, उस रास्ते में लगे सभी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।