टीवीके विधायक सरवनन ने बैनर मामले में एफआईआर रद्द करने के लिए मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

टीवीके विधायक सरवनन ने बैनर मामले में एफआईआर रद्द करने के लिए मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) के विधायक ईसीआर पी. सरवनन ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। वे पिछले साल चेन्नई में बिना इजाजत बैनर लगाने के आरोप में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करवाना चाहते हैं।

चेन्नई, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) के विधायक ईसीआर पी. सरवनन ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। वे पिछले साल चेन्नई में बिना इजाजत बैनर लगाने के आरोप में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करवाना चाहते हैं।

सांसदों और विधानसभा सदस्यों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने सोमवार को शोलिंगनल्लूर के विधायक की उस अर्जी को मंजूरी दे दी, जिसमें एफआईआर की ओरिजिनल कॉपी पेश करने से छूट मांगी गई थी।

जज ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को यह निर्देश भी दिया कि वे एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली उनकी मुख्य याचिका को नंबर दें। यह आदेश विधायक की याचिका के साथ जुड़ी एक प्रक्रियात्मक अर्जी से संबंधित है।

कोर्ट ने अभी यह तय नहीं किया है कि एफआईआर रद्द की जानी चाहिए या नहीं और सोमवार के निर्देश से मुख्य याचिका को आगे के विचार के लिए नंबर देने की अनुमति मिल गई है।

यह मामला 30 नवंबर, 2025 का है, जब इलाके में रूटीन गश्त के दौरान एक पुलिस अधिकारी को अनधिकृत होर्डिंग दिखाई दिए, जिसके बाद नीलांकरई पुलिस ने अपनी पहल पर एफआईआर दर्ज की।

एफआईआर के अनुसार, सब-इंस्पेक्टर जी. प्रभाकरन ने केके रोड पर एक प्राइवेट मैरिज हॉल के पास सार्वजनिक जगह पर होर्डिंग देखे। इसके बाद उन्होंने यह पता लगाने के लिए जांच की कि उन्हें किसने लगाया था और क्या इसके लिए जरूरी सिविक अनुमति ली गई थी।

पुलिस का आरोप है कि ये होर्डिंग लगवाने के लिए सरवनन और टीवीके के एक और पदाधिकारी रवि जिम्मेदार थे। जांच से पता चला कि ये बैनर ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन की मंजूरी के बिना लगाए गए थे।

इन जानकारियों के आधार पर, सब-इंस्पेक्टर ने खुद ही मामला दर्ज किया और उल्लंघन के सिलसिले में विधायक और पार्टी पदाधिकारी का नाम शामिल किया।

एफआईआर में दर्ज आरोप ही उस आपराधिक कार्यवाही का आधार हैं जिसे सरवनन अब अदालत से रद्द करवाना चाहते हैं। पुलिस ने तमिलनाडु ओपन प्लेसेज एक्ट, 1959 की धारा 3 के तहत कार्रवाई की। इस प्रावधान के तहत एक साल तक की जेल, 5,000 रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। सरवनन ने एफआईआर से जुड़ी कार्यवाही को खत्म करने के लिए अदालत से दखल की मांग की है।

असली एफआईआर पेश करने से जुड़ी अर्जी मंजूर होने के बाद रजिस्ट्री को मुख्य याचिका (एफआईआर रद्द करने की याचिका) पर आगे की कार्यवाही करने और उसे नंबर देने का निर्देश दिया गया है। यह मामला रद्द करने लायक है या नहीं, इस सवाल पर अदालत सही समय पर मुख्य याचिका के गुण दोषों के आधार पर विचार करेगी।

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Created On :   12 Oct 2026 9:22 PM IST

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