हरित बिजली का रिकॉर्ड: सौर ऊर्जा उत्पादन और पवन ऊर्जा उत्पादन में बढ़ोतरी, पहली बार तिमाही उत्पादन 100 अरब यूनिट पार, सौर ऊर्जा में 39% उछाल

सौर ऊर्जा उत्पादन और पवन ऊर्जा उत्पादन में बढ़ोतरी, पहली बार तिमाही उत्पादन 100 अरब यूनिट पार, सौर ऊर्जा में 39% उछाल
  • कोयला आधारित संयंत्रों का पीएलएफ घटकर पहुंचा 68%
  • बिजली की अधिकतम मांग 270 गीगावाट पर पहुंची
  • पहली बार तिमाही उत्पादन 100 अरब यूनिट पार, सौर ऊर्जा में 39% उछाल

डिजिटल डेस्क, मुंबई. देश में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड बना है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में बड़े जलविद्युत संयंत्रों को छोड़कर हरित (नवीकरणीय) बिजली उत्पादन पहली बार 100 अरब यूनिट के पार पहुंच गया। इस दौरान उत्पादन 101 अरब यूनिट दर्ज किया गया। सौर ऊर्जा उत्पादन में 39% और पवन ऊर्जा उत्पादन में 29% की सालाना वृद्धि ने इस उपलब्धि में अहम योगदान दिया। वहीं देश का कुल बिजली उत्पादन सालाना आधार पर 11% बढ़कर 536 अरब यूनिट हो गया। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के विश्लेषण के अनुसार दूसरी तिमाही में बिजली की अधिकतम मांग रिकॉर्ड 270 गीगावाट तक पहुंच गई। इसके बावजूद कोयला आधारित बिजली संयंत्रों का प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) घटकर 68% रह गया। जबकि पहली तिमाही में यह 73% था। पीएलएफ से पता चलता है कि कोई बिजली संयंत्र अपनी अधिकतम संभावित क्षमता के मुकाबले कितनी बिजली पैदा कर रहा है। सीआरईए के विश्लेषक मनोज कुमार ने कहा कि रिकॉर्ड बिजली मांग के बावजूद दूसरी तिमाही में कोयला आधारित संयंत्रों का पीएलएफ केवल 68% रहा।

सौर ऊर्जा उत्पादन पहली बार कुल बिजली का 10%

सौर ऊर्जा देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रमुख बिजली स्रोत बन रहा है। दूसरी तिमाही में इसका उत्पादन सालाना आधार पर 39% बढ़कर 51 अरब यूनिट हो गया। कुल बिजली उत्पादन में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी पहली बार 10% तक पहुंची। 30 सितंबर को सौर बिजली उत्पादन ने एक दिन में 705 मिलियन यूनिट का नया रिकॉर्ड भी बनाया।

पवन ऊर्जा उत्पादन में भी 29% की बढ़ोतरी

पवन ऊर्जा उत्पादन में भी सालाना आधार पर 29% की वृद्धि दर्ज की गई और यह 45 अरब यूनिट तक पहुंच गया। सौर और पवन ऊर्जा में बढ़ोतरी के साथ बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं से उत्पादन में भी तेजी आई। पहली तिमाही के 39 अरब यूनिट के मुकाबले दूसरी तिमाही में जलविद्युत उत्पादन 60 अरब यूनिट रहा। यह तिमाही आधार पर 53% की वृद्धि है। हालांकि, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के मुकाबले जलविद्युत उत्पादन अभी भी 20% कम रहा।

कोयले की आपूर्ति घटी

बिजली क्षेत्र में कोयले की उपलब्धता चिंता का विषय बनी हुई है। मई से सितंबर के दौरान कोयले की खपत करीब 79 मिलियन टन प्रति माह रही। लेकिन बिजली संयंत्रों में इसकी आपूर्ति मई के 74 मिलियन टन से घटकर अगस्त में 66 मिलियन टन रह गई। कोयले की ढुलाई के लिए औसत रेक लोडिंग भी जून में करीब 290 रेक प्रतिदिन से घटकर अगस्त में 280 रेक रह गई। 30 सितंबर तक बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार घटकर 21 मिलियन टन रह गया जो 58 मिलियन टन की मानक आवश्यकता का केवल 36% है।

Created On :   12 Oct 2026 9:05 PM IST

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