INDIA Bloc Protest: दिल्ली में राहुल-प्रियंका के धरने का आज तीसरा दिन, जानिए बिना अनुमति प्रदर्शन करने के नियम

डिजिटल डेस्क, भोपाल। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल पिछले तीन दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान कर चुकी है।
राजधानी में किसी भी मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन करना लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि, इसके लिए कुछ कानूनी नियमों का पालन करना जरूरी है। दिल्ली में हर जगह धरना या प्रदर्शन नहीं किया जा सकता। इसके लिए पहले अनुमति लेनी होती है और निर्धारित नियमों का पालन करना पड़ता है। आइए जानते हैं कि दिल्ली में प्रदर्शन करने के क्या नियम हैं।
सबसे पहले लेनी होती है लिखित अनुमति
अगर कोई व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल प्रदर्शन करना चाहता है, तो उसे संबंधित जिले के डीसीपी कार्यालय से पहले लिखित अनुमति लेनी होती है। इसके लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना पड़ता है। आवेदन में प्रदर्शन का उद्देश्य, समय, स्थान और संभावित भीड़ की संख्या जैसी जानकारी देनी होती है।
हर जगह प्रदर्शन की अनुमति नहीं, भीड़ की संख्या भी तय
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए कुछ स्थान निर्धारित किए हैं। छोटे प्रदर्शनों के लिए आमतौर पर जंतर-मंतर का इस्तेमाल किया जाता है, जहां अधिकतम 1,000 प्रतिभागियों की सीमा तय है। वहीं, बड़ी रैलियों के लिए रामलीला मैदान जैसे बड़े स्थानों का इस्तेमाल किया जाता है, जहां लगभग 50,000 लोगों के जुटने की क्षमता है।
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में शाहीन बाग मामले में कहा था कि विरोध-प्रदर्शन के नाम पर सार्वजनिक सड़कों और रास्तों को लंबे समय तक बाधित नहीं किया जा सकता।
तय समय में ही प्रदर्शन, रात में रुकने पर पाबंदी
प्रदर्शन के लिए निर्धारित समय और प्रशासन की शर्तों का पालन करना जरूरी है। प्रदर्शन स्थल पर पूरी रात रुकने, टेंट लगाने और भोजन पकाने की अनुमति नहीं होती, जब तक कि प्रशासन की ओर से इसके लिए विशेष मंजूरी न दी गई हो।
कुछ इलाकों में लागू रहते हैं सख्त प्रतिबंध
संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास और अन्य संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। कई बार इन क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए जाते हैं।
ऐसे आदेश लागू होने पर निर्धारित शर्तों के अनुसार लोगों के इकट्ठा होने और प्रदर्शन करने पर रोक लगाई जा सकती है। इन प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
हथियार और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर नियम
प्रदर्शन के दौरान हथियार, ज्वलनशील सामग्री या प्रतिबंधित वस्तुएं ले जाने की अनुमति नहीं होती। लाउडस्पीकर और साउंड सिस्टम के इस्तेमाल के लिए भी संबंधित नियमों का पालन करना जरूरी है। इसके लिए अलग से अनुमति लेनी पड़ सकती है। ध्वनि प्रदूषण से जुड़े निर्धारित मानकों और समय-सीमा का पालन करना भी अनिवार्य है।
पुलिस की निगरानी और कार्रवाई का अधिकार
पुलिस प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी करती है। जरूरत पड़ने पर वीडियोग्राफी और अन्य निगरानी साधनों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
अगर प्रदर्शन के कारण यातायात बाधित होता है या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका पैदा होती है, तो पुलिस और प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं। यदि किसी सभा को गैरकानूनी घोषित किया जाता है, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत प्रदर्शनकारियों को हटाया जा सकता है या उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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अनुमति नहीं मिले तो क्या करें?
अगर प्रशासन प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार करता है, तो आयोजक फैसले के कारणों की जानकारी मांग सकते हैं। अनुमति से इनकार करने के फैसले को संबंधित नियमों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर चुनौती भी दी जा सकती है।
ऐसी स्थिति में आयोजकों के पास दो विकल्प हो सकते हैं। पहला, वे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष दोबारा आवेदन कर सकते हैं। दूसरा, यदि उन्हें लगता है कि अनुमति देने से गलत तरीके से इनकार किया गया है, तो वे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं। हाईकोर्ट मामले की सुनवाई कर प्रशासन के फैसले की कानूनी समीक्षा कर सकता है और जरूरत पड़ने पर उचित आदेश दे सकता है।
हिरासत या गिरफ्तारी की स्थिति में मौलिक अधिकार
यदि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाता है या गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे भी संवैधानिक और कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं। उसे गिरफ्तारी के कारण जानने, अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने और कानून के अनुसार कानूनी सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। गिरफ्तारी की स्थिति में उसके परिवार या किसी मित्र को इसकी सूचना देने के भी प्रावधान हैं।
इसके अलावा, कानून में महिलाओं की गिरफ्तारी के समय को लेकर विशेष प्रावधान हैं। सामान्य परिस्थितियों में किसी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। हालांकि, असाधारण परिस्थितियों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति से ऐसा किया जा सकता है।
Created On :   9 Oct 2026 11:08 PM IST













