Congress Protest March: SIR विवाद में कांग्रेस का बड़ा ऐलान, देश के सभी राज्य चुनाव आयोग कार्यालय तक किया जाएगा विरोध मार्च

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस ने मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग के खिलाफ बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। कांग्रेस ने अपनी सभी राज्य इकाइयों से कहा है कि 25 सितंबर को अपने-अपने प्रदेश में राज्य चुनाव आयोग के दफ्तर तक विरोध मार्च निकालें। इसके साथ ही पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनकी गिरफ्तारी की भी मांग की है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि देश की सभी राज्य कमेटियां 25 सितंबर को बड़ा विरोध मार्च निकालेंगी। साथ ही ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में लिए गए सभी फैसलों और चुनावी रोल में हुए बदलावों की स्वतंत्र और व्यापक समीक्षा करने की मांग की गई है।
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इस तारीख को होगा प्रदर्शन का दूसरा चरण
कांग्रेस ने बताया कि इस प्रदर्शन का दूसरा चरण 28 सितंबर को होने वाला है। पार्टी ने बताया कि इस दिन सभी जिला कमेटियां अपने-अपने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय तक मार्च निकालेंगी। कांग्रेस नेता ने बताया कि पार्टी का यह विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हो जाती। इस मुद्दे पर राहुल गांधी ने बताया कि मामले में न्याय मिलना चाहिए। साथ ही बताया कि ये पार्टी नेताओं के बयान हैं, जिन्हें आरोप और मांग के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
क्या हुआ था खुलासा?
समाचार पत्र 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने 23 सितंबर को एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR और चुनावी रोल से संबंधित फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें एक ही दिन में चार आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात बताई गई है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ लिए गए फैसलों और आदेशों पर सवाल भी उठाए थे। उनके अनुसार, उनकी अनुमति के बिना निर्णय लिए गए थे। इसके अलावा उन्होंने नए मतदाताओं के लिए Form-6 में बदलाव और चुनावी डेटा तक अधिकारियों की पहुंच को लेकर भी सवाल उठाए थे। वे मतदाता सूची से संबंधित कुछ फैसलों में भी शामिल थे।
आरोपों पर चुनाव आयोग ने क्या बताया?
यह रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने एक बयान जारी किया था, जिसमें अलग-अलग राय को फैसले लेने की प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताया गया था। इसके साथ ही 14 आपत्तियों के अस्तित्व और उनसे जुड़े रिकॉर्ड को खारिज नहीं किया गया। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट करते हुए बताया कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले आयोग की सामूहिक प्रक्रिया के तहत ही लिए गए थे।
Created On :   24 Sept 2026 6:30 PM IST












