comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

ताजमहल के आगंतुकों के लिए संख्या की सीमा हटाने की मांग

November 20th, 2020 11:30 IST
 ताजमहल के आगंतुकों के लिए संख्या की सीमा हटाने की मांग

हाईलाइट

  • ताजमहल के आगंतुकों के लिए संख्या की सीमा हटाने की मांग

आगरा (उप्र) 20 नवंबर (आईएएनएस)। आगरा के महापौर नवीन जैन ने ताजमहल में रोजाना केवल 5,000 आगंतुकों को अनुमति दिए जाने के प्रतिबंध को हटाने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संस्कृति मंत्रालय को पत्र भेजा है।

सितंबर में फिर से खुलने के बाद ताजमहल में गुरुवार को पहली बार दिन में 5,000 लोग पहुंचे थे। वल्र्ड हेरिटेज वीक की शुरूआत के मौके पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने गुरुवार को आगरा में संरक्षित स्मारकों में आगंतुकों को मुफ्त में प्रवेश देने का फैसला किया था।

आगरा के मेयर और ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ मेयर्स (एआईसीएम) के अध्यक्ष नवीन जैन ने कहा, कोविड-19 लॉकडाउन के बाद सभी प्रकार के व्यवसाय, उद्योग, ट्रेन, बसों का संचालन शुरू हो गया है, लेकिन ताजमहल में आगंतुकों के प्रवेश पर प्रतिबंध जारी है। यह आगरा के पर्यटन उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। आगरा में 3.5 लाख से अधिक लोग पर्यटन से आने वाले राजस्व पर निर्भर हैं।

उन्होंने कहा, आगरा ईको-सेंसिटिव ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में आता है। ऐसे में पर्यावरण प्रतिबंधों के बाद उद्योगों और व्यवसायों को संचालित करने के वैसे ही कम रास्ते बचते हैं। लोग पैसे कमाने के लिए शहर छोड़ने को मजबूर हैं। ताजमहल से आगंतुकों की संख्या 5,000 तक सीमित करने का प्रतिबंध हटाना चाहिए। ताजमहल पर टिकटों की कालाबाजारी से पर्यटन उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था के राजस्व का नुकसान हो रहा है। ऑफलाइन टिकटिंग प्रक्रिया को बिना देरी के फिर से शुरू करना चाहिए।

गुरुवार को ताजमहल देखने वाले पर्यटकों की संख्या 5,800 थी, जिसमें 800 बच्चे थे। 15 साल तक के बच्चों के लिए कोई टिकट नहीं है। वहीं आगरा के किले में 2,500 लोग पहुंचे। जबकि कोविड काल से पहले ताज और आगरा में रोजाना औसतन क्रमश- 25,000 और 15,000 लोग पहुंचते थे।

एएसआई (आगरा सर्कल) के सुपरिटेंडिंग आॅर्कियोलॉजिस्ट वसंत स्वर्णकार ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार सभी कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है।

एसडीजे-एसकेपी

कमेंट करें
LPKaQ
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।