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कृषि बिल: मोदी का विपक्ष पर वार- राजनीतिक स्वार्थ के लिए किसानों से हमेशा झूठ बोलने वाले अफवाहें फैला रहे


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पंडित दीनदयाल उपाध्याय (Pandit Deen Dayal Upadhyaya) की जयंती पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। पीएम ने कहा, आज हमारे बीच, ऐसे कम ही लोग हैं जिन्होंने दीनदयाल जी को जीते जी, देखा, सुना या उनके साथ काम किया हो। उनके बताए रास्ते, उनका दर्शन हमें प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कृषि बिलों के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर विपक्ष पर हमला बोला। पीएम ने कहा, किसानों से हमेशा झूठ बोलने वाले कुछ लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ की वजह से किसानों को भ्रमित करने में लगे हैं। अफवाहें फैला रहे हैं। किसानों को ऐसी अफवाहों से बचाना बीजेपी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है। हमें किसान के भविष्य को उज्ज्वल बनाना है।

पीएम मोदी ने कहा, मैं बीजेपी के हर कार्यकर्ताओं को उनके सेवाभाव और परिश्रम के लिए नमन करता हूं। ये हमारे लिए एक प्रेरणा बनी रहेगी। मैं सभी कार्यकर्ताओं और उनके परिवार के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। सभी कार्यकर्ता सामन्य जन की सुरक्षा और सेवा के लिए समर्पित भाव से निरंतर काम कर रहे हैं। कोरोना की चुनौतियों के बीच भी बीजेपी कार्यकर्ताओं ने अपनी इस सेवा साधना को बिना रुके, बिना थके जारी रखा है। इसमें हमारे कई कार्यकर्ताओं को अपना जीवन भी खोना पड़ा है। हमारे जिन साथियों ने अपनी जीवन लीला समाज की सेवा करते-करते समाप्त की है, मैं उन सभी दिवंगत साथियों को श्रद्धांजलि देता हूं।

पीएम ने कहा, देशभर में फैले बीजेपी कार्यकर्ताओं को दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर शुभकामनाएं देता हूं। उन्होंने जो हमें मार्ग दिखाया है, उस रास्ते पर हम पूरे समर्पित भाव से हम आगे बढ़ पाएं। दीनदयाल जी ही थे, जिन्होंने भारत की राष्ट्रनीति, अर्थनीति और समाजनीति, इन तीनों को भारत के अथाह सामर्थ्य के हिसाब से तय करने की बात मुखरता से कही थी, लिखी थी।

बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा:-

  • 21वीं सदी के भारत को विश्व पटल पर नई ऊंचाई देने के लिए, 130 करोड़ से अधिक भारतीयों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए, आज जो कुछ भी हो रहा है, उसमें दीन दयाल जैसे महान व्यक्तित्वों का बहुत बड़ा आशीर्वाद है। 
     
  • हमारे देश के किसान, श्रमिक भाई-बहन, युवाओं, मध्यम वर्ग के हित में अनेक अच्छे और ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। जहां-जहां राज्यों में हमें सेवा करने का मौका मिला है वहां-वहां इन्हीं आदर्शों को परिपूर्ण करने के लिए उतने ही जी जान से लगे हुए हैं।
     
  • आज जब देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक-एक देशवासी अथक परिश्रम कर रहा है, तब गरीबों को, दलितों, वंचितों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, आदिवासी, मजदूरों को उनका हक देने का बहुत ऐतिहासिक काम हुआ है। आजादी के अनेक दशकों तक किसान और श्रमिक के नाम पर खूब नारे लगे, बड़े-बड़े घोषणापत्र लिखे गए, लेकिन समय की कसौटी ने सिद्ध कर दिया है कि वो सारी बातें कितनी खोखली थी। देश इन बातों को भली-भांति जानता है।
     
  • किसान और श्रमिक के नाम पर देश में, राज्यों में अनेकों बार सरकारें बनीं लेकिन उन्हें मिला क्या? सिर्फ वादों और कानूनों का एक उलझा हुआ जाल। एक ऐसा जाल, जिसको ना तो किसान समझ पाता था और ना ही श्रमिक।किसानों को ऐसे कानूनों में उलझाकर रखा गया, जिसके कारण वो अपनी ही  उपज को, अपने मन मुताबिक बेच भी नहीं सकता था। नतीजा ये हुआ कि उपज बढ़ने के बावजूद किसानों की आमदनी उतनी नहीं बढ़ी। उन पर कर्ज जरूर बढ़ता गया।
     
  • बीजेपी के नेतृत्व में NDA सरकार ने निरंतर इस स्थिति को बदलने का काम किया है। पहले लागत का डेढ़ गुना MSP तय किया, उसमें रिकॉर्ड बढ़ोतरी की और रिकॉर्ड सरकारी खरीद भी सुनिश्चित की।
  • बीते सालों में ये निरंतर प्रयास किया गया है कि किसान को बैंकों से सीधे जोड़ा जाए। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत देश के 10 करोड़ से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में कुल एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा ट्रांसफर किए जा चुके हैं। सरकार ने इस बात का भी प्रयास किया है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड हो, उन्हें खेती के लिए आसानी से कर्ज उपलब्ध हो। पहले सिर्फ उसी किसान को KCC का लाभ मिलता था जिसके पास 2 हेक्टेयर जमीन हो। हमारी सरकार इसके दायरे में देश के हर किसान को ले आई है।

  • UPA सरकार के पिछले 6 साल में किसान क्रेडिट कार्ड द्वारा किसानों को करीब 20 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया गया था। बीजेपी सरकार के 5 वर्ष में किसानों को लगभग 35 लाख करोड़ रुपये KCC के माध्यम से दिए गए हैं।

  • किसानों को कर्ज लेने की मजबूरी से बाहर निकालने के लिए हमने एक अहम काम पूरी ताकत से शुरू किया है। अब दशकों बाद किसान को अपनी उपज पर सही हक मिल पाया है। कृषि में जो सुधार किए हैं उसका सबसे ज्यादा लाभ छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा।

  • गरीब हो, किसान हो, श्रमिक हो, महिलाएं हों, ये सभी आत्मनिर्भर भारत के मजबूत स्तंभ हैं। इसलिए, इनका आत्मसम्मान और आत्मगौरव ही, आत्मनिर्भर भारत की प्राण-शक्ति है और प्रेरणा हैं। इनको सशक्त करते ही भारत की प्रगति संभव है। हमारा वैचारिक तंत्र और राजनीतिक मंत्र साफ है। हमारे लिए राष्ट्र सर्वोपरि है। राष्ट्र प्रथम (Nation First) यही हमारा मंत्र है, यही हमारा कर्म है।

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