भास्कर एक्सक्लूसिव: बड़ी जीत हासिल करने वाले थलापति विजय क्या बनेंगे तमिलनाडु के 'केजरीवाल'? गठबंधन पर गलत फैसला बदल सकता है इतिहास

बड़ी जीत हासिल करने वाले थलापति विजय क्या बनेंगे तमिलनाडु के केजरीवाल? गठबंधन पर गलत फैसला बदल सकता है इतिहास
डीएमके को तमिलनाडु में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में एक बड़ा झटका लगा है, डीएमके ने जिन 164 सीटों पर सीधे चुनाव लड़ा था, उनमें से वह केवल 59 सीटें ही जीत पाई और विपक्ष में चली गई।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पहली बार चुनावी जंग के मैदान में अभिनेता से नेता बने विजय थलापति की टीवीके पार्टी ने सत्तारूढ़ डीएमके पार्टी को हराकर ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया। विजय की जीत भी ठीक उसी तरह हुई जैसे 2013 में दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने जीत दर्ज की थी। अब देखना ये है कि क्या वो भी पहली जीत को सत्ता की कुर्सी में बदल सकेंगे या नहीं?

पहली बार कैसे बनी केजरीवाल सरकार?

आपको बता दें 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चुनावी जंग में पहली बार उतरे केजरीवाल ने दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में 28 सीटें जीती और उस समय सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार को चुनावी मात दी थी। केजरीवाल की आप पार्टी ने 40 फीसदी सीटें जीती ,2013 में दिल्ली सीएम शीला दीक्षित की हार के साथ उनकी सरकार के अधिकाश मंत्रियों की हार हुई, जीतने के बाद भी आप पार्टी बहुमत से 8 सीट दूर रही, जबकि बीजेपी 31 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन बहुमत 36 सीटों से 5 सीट कम थी। सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी बीजेपी की दिल्ली में सरकार नहीं बन सकी, ऐसा बीजेपी के साथ पिछले विधानसभा चुनाव में बिहार और महाराष्ट्र में भी हो चुका है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी सबसे अधिक सीटों पर चुनाव जीती थी, लेकिन दूसरे नंबर पर आई बीजेपी ने जेडीयू के साथ मिलकर सरकार बना ली थी। महाराष्ट्र में भी 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 105 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन शिवसेना ,एनसीपी और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनी ली थी। 2013 में आप ने जिस कांग्रेस पार्टी को सत्ता से बेदखल किया था, उसी कांग्रेस के बाहरी गठबंधन के साथ केजरीवाल ने सरकार बनाई, हालांकि 49 दिनों बाद केजरीवाल ने सरकार को भंग करवा दिया और दिल्ली में दोबारा से विधानसभा चुनाव हुए। दोबारा विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की पार्टी यानी कि आप भरपूर मेजोरिटी के साथ जीती और सदन में वापसी करने में कामयाब रही। उस समय केजरीवाल का कॉन्फिडेंस और आप की लोकप्रियता ठीक वैसे ही थी जैसे आज थलापति विजय की नजर आ रही है।

विजय ने दोहराया इतिहास

अब बात करते है तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की, इस चुनाव में अभिनेता से नेता बने विजय ने पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर एम के स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके को सत्ता से बेदखल कर दिया, और राज्य के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, टीवीके को करीब 46 फीसदी विधानसभा सीटों पर जीत मिली है। विजय की अगुवाई में टीवीके ने डीएमके चीफ व मुख्यमंत्री स्टालिन समेत सरकार के कई मंत्रियों को हार का मुंह देखने पर मजबूर कर दिया। पहले ही चुनाव में विजय की पार्टी ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की है। सरकार बनाने के लिए विजय को मात्र 10 और विधायकों की जरूरत है।

किसके साथ गठबंधन?

अब देखना है कि टीवीके किस पार्टी के साथ गठबंधन करती है। केजरीवाल ने 2013 में जिस पार्टी को सत्ता से बेदखल किया था, उसी के साथ गठबंधन किया। वो पार्टी थी कांग्रेस। विजय के पिता भी कांग्रेस के साथ गठबंधन की बात कह चुके हैं। लेकिन पार्टी ने अब तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की,कांग्रेस तमिलनाडु चुनाव में सिर्फ पांच सीटों पर सिमट गई है। 108 सीट वाली टीवीके को बहुमत के लिए 10 सीटों की जरुरत है। ऐसे में केवल कांग्रेस के साथ से सरकार बनाने का सपना पूरा नहीं हो सकता। टीवीके को अन्य दलों और निर्दलियों को साथ में लेकर सरकार बनानी होगी। दूसरा ये भी है कि अगर टीवीके बहुमत हासिल करने में अन्य विधायकों को लाने में असमर्थ रहती है तो वह डीएमके या AIADMK साथ गठबंधन कर सकती है। अगर डीएमके या AIADMK किसी एक के भी साथ भी विजय गठबंधन करने में कमजोर पड़ते है या असमर्थ रहते हैं। तब धुर विरोधी डीएमके -एआईएडीएमके अन्य विधायकों के साथ मिलकर सरकार बना सकती है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो तमिलनाडु में सरकार बनाना ना केवल विजय बल्कि राज्य के पुराने और बड़े दलों के सामने भी संकट बना रहेगा। तमिलनाडु में सरकार बनाने पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं बनी तो तमिलनाडु में दोबारा विधानसभा चुनाव भी हो सकते है। ये आगामी समय में ही पता चल सकेगा की तमिलनाडु सीएम की कुर्सी पर कौन बैठेगा।

Created On :   5 May 2026 3:26 PM IST

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