MP News: एमपी यूपी से ब्राह्मण वर्सेज यादव हुई सड़क की सियासत, राजभर ने बताया किसका सगा अफसर, तो ससुर तक पहुंचा मामला

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश में हाइवे के आसपास जमीन केस ने अब सियासी तूल पकड़ लिया है। धीरे धीरे ये मामला उत्तरप्रदेश तक जा पहुंचा है। कांग्रेस के आरोपों से शुरु इस लड़ाई में बीजेपी और सपा आमने सामने हो गए है। सुभासपा चीफ व योगी सरकार में शामिल मंत्री ओमप्रकाश राजभर सपा पर निशाना साध रहे हैं। 6 महीने बाद यूपी में विधानसभा चुनाव होने है। धीरे धीरे ये लड़ाई यादव बनाम ब्राह्मण होती जा रही है। ये हम नहीं कह रहे, इस केस के पीछे की वजह और उसकी क्रोनोलॉजी को धीरे धीरे समझने का प्रयास करेंगे तो ये साफ हो जाएगा कि इसकी वजह क्या है? सियासत की जंग अब सगे-ससुर तक पहुंच गई है।
दो IAS और उनकी कहानी
आपको बता दें इस केस में जिस आईएएस का नाम उछाला जा रहा है उनका नाम भरत यादव है, जो एमपीआरडीसी के मौजूदा एमडी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता यश भारतीय अपनी एक फेसबुक पोस्ट में लिखते है जिन दो सड़क परियोजनाओं की प्रशासकीय स्वीकृति की बात की जा रही है, वो इनका पदभार संभालने से पहले की है। उस समय एमपीआरडीसी के एमडी अविनाश लवानिया थे। आईएएस अविनाश लवानिया मूल रूप से उत्तरप्रदेश के हैं, जबकि उनकी ससुराल मध्यप्रदेश के दतिया में है। जबकि आईएएस भरत यादव मूल रूप से दतिया के है, उनकी ससुराल उत्तरप्रदेश में है।
ससुर-सगे और सियासत की स्टोरी
अब आपको बताते है, ससुर-सगे और सियासत की पूरी कहानी। ओपी राजभर ने अपनी एक एक्स पोस्ट के जरिए कहा है, भरत यादव सपा नेता चंद्रपाल सिंह यादव के सगे हैं? जो समाजवादी पार्टी के कोषाध्यक्ष भी हैं। जिनके अखिलेश यादव से अच्छे संबंध हैं।
इससे पहले सपा प्रवक्ता यश भारतीय ने फेसबुक पर एक पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि जिन दो सड़क परियोजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृति तत्कालीन मैनेजिंग डायरेक्टर के रहते मिली, जो आजकल दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में निदेशक के पद पर तैनात हैं। इस विभाग के केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान है। तत्कालीन एमडी अविनाश लवानिया मध्यप्रदेश में बीजेपी के कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के दामाद है। अप्रैल 2023 से जनवरी 2025 तक वे एमपीआरडीसी के MD रहे। इनके एमडी रहते हुए ही ‘इंदौर-उज्जैन 6 लेन अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट को 20 फरवरी 2024 को प्रशासकीय अनुमति मिली। इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड परियोजना’ का प्रशासकीय अनुमोदन की मंजूरी 11 दिसंबर 2024 को मिली। भरत यादव को 28 जनवरी 2025 को जिम्मेदारी मिली।
आरोपों के सियासी मंसूबे सबसे बड़ा सवाल
अब आप सियासत का पूरा खेल समझ गए होंगे कि कहानी का मुख्य कर्ताधर्ता या किरदार कौन हैं? और उनके सियासी मंसूबे क्या हैं? सियासी गलियारों में ऐसी खबरें है कि दिल्ली से विपक्ष होते हुए मध्यप्रदेश आया यह सियासी खेल यूपी पहुंचा। और यूपी से ससुर और दामाद पर टिक गया। अब देखते है कौन किसको घेरता, विपक्ष सरकार पर निशाना साध रहा है, और पड़ोसी राज्य यूपी में बीजेपी सरकार का मंत्री विपक्ष पर हमलावर हो रहा हैं। अब आने वाला समय ही बताएंगा कौन सा विपक्ष-कौन सी सरकार सही है? या आरोप -प्रत्यारोप का ये सियासी खेल -खेल बनकर रह जाएगा।
Created On :   27 Jun 2026 4:39 PM IST












