PM Modi's Big Warning: ‘देश के दुश्मनों से लड़ना होगा’, PM मोदी ने बताया कौनसी 3 ताकतें भारत के खिलाफ

‘देश के दुश्मनों से लड़ना होगा’, PM मोदी ने बताया कौनसी 3 ताकतें भारत के खिलाफ
देशभर में धूमधाम के साथ अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व दशहरा मनाया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (20 अक्टूबर, 2026) को दिल्ली के आईटी में आयोजित रावण दहन तीन ताकतों को देश के खिलाफ बताया है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में धूमधाम के साथ अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व दशहरा मनाया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (20 अक्टूबर, 2026) को दिल्ली के आईटी में आयोजित रावण दहन तीन ताकतों को देश के खिलाफ बताया है। उन्होंने देश के नागरिकों का आह्वान करते हुए कहा है कि देश के उन दुश्मनों से हमें मिलकर लड़ना होगा।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर कहा, 'हमें देश के दुश्मनों के साथ मिलकर लड़ना होगा। देश के मान-सम्मान को चोट पहुंचाने वाली ताकतें, समाज को बांटने वाले लोग, हमारी संस्कृति से नफरत करने की मानसिकता, ये देश के दुश्मन हैं।'

गौरतलब है कि पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है जब विपक्षी पार्टियों की तरफ से देश में रिजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन कराने को लेकर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन और मार्च किए जा रहे हैं।

पीएम मोदी ने दशहरा कार्यक्रम को किया संबोधित

पीएम मोदी ने कहा, 'हमारे विचार समान हो, हमारी समितियां अर्थात् राष्ट्र की सभी संस्थाएं, सभी राजनीतिक दल, देश के हित के लिए एक साथ खड़े हों। हमें इसी भावना पर चलना होगा, हमें देश के दुश्मनों के साथ मिलकर लड़ना होगा।' उन्होंने कहा, 'देश को चोट पहुंचाने वाली ताकतें, समाज को बांटने वाले लोग, हमारी संस्कृति से नफरत करने की मानसिकता, ये देश के दुश्मन हैं।'

रास्ते की कठनाईयां हमारी यात्रा नहीं रोक सकती - पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, 'संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, चुनौती कितनी भी कठिन क्यों न हो।।। हमें दूसरों के भरोसे नहीं बैठना है। हमें अपना सामर्थ्य पहचानना है। हमें संसाधनों पर विश्वास करना है। अपने संकल्प को शक्ति बनाना है और अपने परिश्रम से समाधान निकालना है। क्योंकि प्रभु श्रीराम ने हमें सिखाया कि रास्ते की कठिनाइयां हमारी यात्रा को रोक नहीं सकती। समुद्र सामने था, लंका दूर थी, लेकिन संकल्प अडिग था, इसलिए रामजी ने जनता की सामूहिक शक्ति को जगाया, जनभागीदारी को अपना संबल बनाया और असंभव लगने वाले लक्ष्य को संभव बनाया। यही सफलता का मूलमंत्र है।'

उन्होंने कहा, 'सदियों तक हमारी धरोहरों को लूटकर विदेश ले जाया गया, लेकिन आज हम अपनी उन धरोहरों को वापिस ला रहे हैं। बीते 12 सालों में साढ़े 600 से ज्यादा प्राचीन मूर्तियों को भारत वापिस लाया गया है। भारत अपने सांस्कृतिक केंद्रों को दुनिया में नई पहचान दिलवा रहा है। ये पर्व हमें साहस देता है कि शत्रु कितना भी बड़ा क्यों न हो, लेकिन जब हम सच्चाई और मानवता के साथ होते हैं तो अंत में जीत हमारी होती है। विजयादशमी की यही भावना हमेशा से भारत की विचारधारा रही है।'

Created On :   20 Oct 2026 11:50 PM IST

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