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वनडे में इंग्लैंड की सबसे बड़ी जीत, ऑस्ट्रेलिया को 242 रनों से हराया

June 20th, 2018 11:43 IST
वनडे में इंग्लैंड की सबसे बड़ी जीत, ऑस्ट्रेलिया को 242 रनों से हराया

हाईलाइट

  • ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच ट्रेंटब्रिज में खेले गए तीसरे वन-डे मुकाबले में इंग्लैंड ने इतिहास रच दिया।
  • इंग्लैंड की ओर से जॉनी बेरिस्टो (139) और एलेक्स हेल्स (147) ने तूफानी शतक लगाए
  • इससे पहले भी वन डे में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड इंग्लैंड टीम के ही नाम था।

डिजिटल डेस्क, नॉटिंघम। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच ट्रेंटब्रिज में खेले गए तीसरे वन-डे मुकाबले में इंग्लैंड ने इतिहास रच दिया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने पहले तो वन-डे क्रिकेट का सबसे बड़ा स्कोर बनाते हुए 6 विकेट पर 481 रन बनाए और फिर ऑस्ट्रेलिया को महज 237 रनों पर समेटते हुए 242 रनों की रिकॉर्ड जीत दर्ज की। इंग्लैंड की ओर से जॉनी बेरिस्टो (139) और एलेक्स हेल्स (147) ने तूफानी शतक लगाए तो वहीं गेंदबाजी में आदिल रशीद ने 4 ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को आउट किया। इससे पहले भी वन डे में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड इंग्लैंड टीम के ही नाम था। तब इंग्लिश टीम ने इसी मैदान पर 30 अगस्त, 2016 को पाकिस्तान के खिलाफ 3 विकेट पर 444 रन बनाकर रिकॉर्ड बनाया था।

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विशाल स्कोर के दबाव में बिखरी ऑस्ट्रेलियाई टीम

इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए रिकॉर्ड 482 रनों का लक्ष्य दिया था। बड़े स्कोर के दबाव में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखरी नजर आई और 37वें ओवर में 237 रनों पर ऑल आउट हो गई। ऑस्ट्रेलिया की ओर से सलामी बल्लेबाज ट्रेविस हेड ने 51 और मार्कस स्टोइनिस ने 44 रन बनाए। ट्रेंट ब्रिज की तेज पिच पर इंग्लैंड के स्पिनरों ने 7 विकेट झटके। आदिल रशीद ने 4 और मोइन अली ने तीन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को आउट किया। रनों के हिसाब से ये ऑस्ट्रेलिया की वन-डे में सबसे बड़ी हार है। 

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इंग्लैंड ने 6 विकेट पर बनाए 481 रन 

इससे पहले टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। इंग्लिश टीम के ओपनर जेसन रॉय और बेरिस्टो ने तूफानी शुरुआत करते हुए पहले विकेट के लिए 159 रन ठोक डाले। 19वें ओवर की तीसरी गेंद पर जेसन रॉय तेजी से रन चुराने के चक्कर में रन आउट हुए। रॉय ने 61 गेंदों में 7 चौके और 4 छक्के की मदद से 82 रन की पारी खेली। जेसन रॉय के आउट होने के बाद लगा कि रनों की रफ्तार में थोड़ी कमी आएगी लेकिन एलेक्स हेल्स ने आते ही तूफानी बैटिंग शुरू कर दी। उन्होंने और बेरिस्टो ने मिलकर दूसरे विकेट के लिए 151 रनों की साझेदारी की। 34वें ओवर की पहली बॉल पर बेरिस्टो, एश्टन एगार का शिकार बने। उनका कैच रिचर्डसन ने पकड़ा। जिस वक्त बेरिस्टो आउट हुए उस वक्त इंग्लैंड टीम का स्कोर 310 रन था। इसके बाद बैटिंग करने आए जॉस बटलर ज्यादा कुछ नहीं कर पाए और 12 गेंदों में 11 रन बनाकर पैवेलियन लौट गए। बटलर को रिचर्डसन ने आउट किया। बटलर के बाद कप्तान इयॉन मॉर्गन और एलेक्स हेल्स ने तेजी से रन बटोरे और स्कोर को 400 रनों के पार पहुंचा दिया। 47 वें ओवर की दूसरी गेंद पर 459 रनों के स्कोर पर हेल्स, एश्टन एगार को कैच दे बैठे। उन्हें भी रिचर्डसन ने आउट किया।

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हेल्स ने 92 गेंदों में 16 चौके और 5 छक्के की बदौलत 147 रन बनाए। इसके बाद अगली ही गेंद पर रिचर्डसन ने मॉर्गन को चलता किया। मॉर्गन का कैच टिम पेन ने लपका। इंग्लैड की पारी का छटवां विकेट मोइन अली को रूप में गिरा। इस वक्त इंग्लैड का स्कोर 480 रन था। मोइन अली ने 9 गेंदों पर 11 रनों की पारी खेली। जो रूट 4 और डेविड विली 1 रन बनाकर नॉट आउट रहे। कुल 50 ओवरों में इंग्लैंड की टीम ने 481 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया।

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सीरीज में इंग्लैंड की अजेय बढ़त 

242 रनों की इस रिकॉर्ड जीत के साथ इंग्लैंड की टीम ने पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल करते हुए सीरीज अपने नाम कर ली। विदेशी धरती पर ऑस्ट्रेलिया की ये लगातार चौथी सीरीज हार है। ऑस्ट्रेलिया के खराब प्रदर्शन की शुरुआत दक्षिण अफ्रीका में 5 मैचों की वनडे सीरीज से हुई थी, जहां मेजबानों ने कम अनुभवी टीम को 5-0 से हराया था। ऑस्ट्रेलिया के इतिहास में ये पहला मौका था जब किसी टीम ने उन्हें 5 मैचों की सीरीज में एक भी मैच नहीं जीतने दिया था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया को न्यूजीलैंड के खिलाफ 3 मैचों की चैपल-हैडली वनडे ट्रॉफी में 2-0 से हार मिली थी। साथ ही सितंबर 2017 में भारत के खिलाफ भी उसे वनडे सीरीज में 4-1 से हार मिली थी। इसके बाद 2018 की शुरुआत में इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को उसके ही घर में 4-1 से शिकस्त दी थी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।