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दौड़ में जिन्सन जॉनसन का डबल धमाका, 800m में सिल्वर के बाद 1500m रेस में जीता सोना

August 31st, 2018 11:33 IST
दौड़ में जिन्सन जॉनसन का डबल धमाका, 800m में सिल्वर के बाद 1500m रेस में जीता सोना

हाईलाइट

  • भारत के जिनसन जॉनसन ने 1500मी रेस में गोल्ड जीता है।
  • भारत 12 साल बाद इस इवेंट में कोई मेडल जीत सका है।
  • मंजीत 1500मी में चौथे स्थान पर रहे।

डिजिटल डेस्क, जकार्ता। भारत के जिन्सन जॉनसन ने 1500मीटर रेस में गोल्ड जीता है। इसी के साथ भारत 12 साल बाद इस इवेंट में कोई मेडल जीत सका है। इससे पहले सीनीमोल पॉउलोज ने 2006 में ब्रॉन्ज जीता था। जॉनसन का यह 2018 एशियन गेम्स में दूसरा मेडल है। इससे पहले 800मीटर रेस में उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। वहीं 800मी रेस में गोल्ड जीतने वाले मंजीत 1500मी में चौथे स्थान पर रहे। मंजीत 0.69 सेकेंड के अंतर से ब्रॉन्ज जीतने से चूक गए।

जॉनसन ने गोल्ड के लिए 3 मिनट और 44.72 सेकेंड का समय लिया। वह इस रेस में 1200मी तक तीसरे नम्बर पर चल रहे थे। अंतिम 300मी में जॉनसन ने अपनी स्पीड बढ़ाते हुए एक-एक करके सभी को पीछे छोड़ दिया। वह अंतिम 100मी में दूसरे रेसर से काफी लीड ले चुके थे। ईरान के अमीर मोरादी 3 मिनट 45.62 सेकेंड के साथ दूसरे स्थान पर रहे। वहीं बहरीन के मोहम्मद तिओली ने 3 मिनट 45:88 सेकेंड के साथ ब्रॉन्ज अपने नाम किया। वहीं भारत के मंजीत 3 मिनट 46:57 सेकेंड के साथ चौथे स्थान पर रहे।

जॉनसन का जन्म 15 मार्च 1991 को केरल के कोझिकोड जिले के चक्किट्टापारा शहर में हुआ था। उन्होंने अपने हाई स्कूल के बाद कोट्टायम के केरल स्पोर्ट्स काउंसिल में एडमिशन ले लिया। इसके बाद 2009 में वह भारतीय सेना में शामिल हो गए। जॉनसन जुलाई 2015 तक हैदराबाद में जूनियर कमीशन ऑफिसर के रूप में कार्यरत रहे। इसके बाद उन्होंने 800मी और 1500मी के रेस में भाग लेना शुरू कर दिया।

जॉनसन का नाम सबसे पहले 2015 में चर्चा में आया था। जॉनसन ने वुहान में आयोजित 2015 एशियन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप के 800मी में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। इसी साल उन्होंने थाईलैंड में आयोजित एशियन ग्रैंड प्रीक्स में तीन गोल्ड मेडल जीते थे। जॉन्सन ने 2016 में बैंगलोर में आयोजित क्वालिफिकेशन राउंड में 1:45.98 का अपना बेस्ट टाइम निकालते हुए समर ओलंपिक 800मी रेस के लिए क्वालीफाई किया था। इसके बाद जून 2018 में जॉनसन ने 58वें नेशनल इंटर स्टेट सीनीयर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 800मी रेस में 1 मिनट 45:65 सेकेंड का समय लेते हुए नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले यह रिकॉर्ड श्रीराम सिंह के नाम था। उन्होंने मॉन्ट्रिअल ओलंपिक में 1:45:77 सेकेंड का रिकॉर्ड बनाया था। 

इसी के साथ यह 2018 एशियन गेम्स में एथलेटिक्स में भारत अब तक सात गोल्ड, दस सिल्वर और दो ब्रॉन्ज समेत कुल 19 मेडल्स जीत चुका है। वहीं सभी खेलों को मिलाकर भारत के नाम 13 गोल्ड, 21 सिल्वर और 25 ब्रॉन्ज हैं। भारत  59 मेडल्स के साथ आठवें स्थान पर है। अगर 1500मी के पुरुष और महिला दोनों को मिला दिया जाए तो, 2002 के बाद, यह पहला गोल्ड मेडल है। 2002 में बुसान एशियन गेम्स में सुनीता रानी ने 1500मी रेस में गोल्ड जीता था।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।