दैनिक भास्कर हिंदी: भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम का दिल्ली एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत 

September 6th, 2018

हाईलाइट

  • बांग्लादेश को व्हीलचेयर क्रिकेट सीरीज 2018 में हराकर भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम नई दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे पर पहुंची।
  • टीम का स्वागत एक सेरेमोनियल रिसेप्शन के अंदाज में किया गया।
  • इस अवसर पर सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के एमओएस कृष्ण पाल गुर्जर भी खिलाड़ियों को बधाई देने के लिए मौजूद थे।
  • व्हीलचेयर क्रिकेट इंडिया (डब्ल्यूसीआई) का निर्माण 2011 में अंतरराष्ट्रीय पैरा-एथलीट और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता प्रदीप राज ने किया था।

डिजिटल डेस्क। भारत के क्रिकेट के दीवाने हर गली में मिल जाएंगे, लेकिन इनमें बहुत कम लोग ही ये जानते होंगे कि हमारे देश की एक व्हीलचेयर क्रिकेट टीम भी है। जी हां, व्हीलचेयर क्रिकेट टीम भी हमारी नेशनल क्रिकेट टीम से किसी मामले में पीछे नहीं है। फर्क है तो बस इतना सा कि इस टीम को नेशनल टीम जितनी लोकप्रियता हासिल नहीं हुई है। हाल ही में बांग्लादेश में हुए क्रिकेट टूर्नामेन्ट में भारत की व्हीलचेयर क्रिकेट टीम ने जीत हासिल कर दुनिया भर में देश का नाम रोशन कर दिया।  

आईजीआई हवाई अड्डे पर हुआ टीम का स्वागत 

बांग्लादेश को व्हीलचेयर क्रिकेट सीरीज 2018 में हराकर भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम नई दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे पर पहुंची। टीम का स्वागत एक सेरेमोनियल रिसेप्शन के अंदाज में किया गया। इस अवसर पर सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के एमओएस कृष्ण पाल गुर्जर भी खिलाड़ियों को बधाई देने के लिए मौजूद थे।

इस तरह से हुई थी इस खेल की शुरुआत 

व्हीलचेयर क्रिकेट इंडिया (डब्ल्यूसीआई) का निर्माण 2011 में अंतरराष्ट्रीय पैरा-एथलीट और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता प्रदीप राज ने किया था। असल में ये आइडिया कोरिया जाने के बाद प्रदीप के दिमाग में आया, जहां उन्हें बांग्लादेश और पाकिस्तान के व्हीलचेयर क्रिकेट डेलिगेशन्स के साथ बात करने का मौका मिला। इसी मुलाकात के बाद ये खेल भारत में भी शुरू किया गया।

बीसीसीआई से नहीं मिली कोई तवज्जो
 
प्रदीप राज को ये उमीद है कि एक दिन व्हीलचेयर क्रिकेट दुनिया भर में पैरालाम्पिक्स से भी ज्यादा लोकप्रियता हासिल करेगा। प्रदीप ने बताया कि इसे लोकप्रिय बनाने के लिए और खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाएं दिलाने के लिए उन्होंने कई कोशिशें की है। प्रदीप के मुताबिक उन्होंने खेल मंत्रालय और बीसीसीआई को इसे लेकर कई बार अपील की लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।