MP News: सरकार के पास मृतक फार्मासिस्टों का डाटा ही नहीं, मृतक फार्मासिस्टों के नाम पर मेडिकल स्टोर चलने की आशंका

सरकार के पास मृतक फार्मासिस्टों का डाटा ही नहीं, मृतक फार्मासिस्टों के नाम पर मेडिकल स्टोर चलने की आशंका
मप्र स्टेट फार्मेसी काउंसिल ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन से मांगी जानकारी, 6 महीने बाद भी नहीं मिला डेटा

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मप्र स्वास्थ्य विभाग के पास मृतक पंजीकृत फार्मासिस्टों की जानकारी ही नहीं है। इस पर आशंका जताई गई है कि कई फार्मासिस्टों की मौत के बाद भी उनके रजिस्ट्रेशन के नाम पर मेडिकल स्टोर संचालित किए जा रहे हैं। मप्र स्टेट फार्मेसी काउंसिल ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है कि कितने पंजीकृत फार्मासिस्ट है जिनकी वर्तमान में मौत हो चुकी है। रजिस्ट्रार भव्या त्रिपाठी ने खाद्य विभाग को यह पत्र मार्च 2026 को लिखा था। 7 दिनों के भीतर जानकारी देने के लिए कहा गया था। लेकिन हैरानी की बात है कि करीब 7 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक मृतक फार्मासिस्टों की जानकारी नहीं मिल सकी है। फार्मेसी काउंसिल ने जानकारी नहीं देने पर औषधि निरीक्षकों द्वारा पत्र को गंभीरता से नहीं लिया जाना बताया। काउंसिल का कहना है कि फार्मासिस्टों की मौत होने के बाद भी मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं। फार्मासिस्ट को जारी हुए पंजीयन निरस्त जो निरस्त होने चाहिए वो वर्तमान में जीवित है। मामले में जनप्रतिनिधियों और समाज सेवी संस्था वर्तमान में संचालित ऐसे मेडिकल स्टोर को बंद करने और पंजीयन निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। काउंसिल ने प्रदेश के सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों (डीआई) को एक बार फिर जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि सरकार के पास ऐसा कोई सिस्टम ही नहीं है जिससे मृत हुए पंजीकृत फार्मासिस्टों की जानकारी लग सके।

डेटा पर रजिस्ट्रेशन होंगे कैंसिल

फार्मेसी काउंसिल के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 1 लाख से अधिक पंजीकृत फार्मासिस्ट हैं। हाल ही में करीब 25 पंजीकृत फार्मासिस्टों की मृत्यु जानकारी अन्य लोगों ने दी है। काउंसिल ने जिलों के डीआई से मृतक फार्मासिस्टों की जानकारी का डेटा मांगा है। ताकि मृत हुए फार्मासिस्ट के पंजीयन पर मेडिकल स्टोर न संचालित हो सके और कोई गलत फायदा न उठा सके। उनके रजिस्ट्रेशन को कैंसिल किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि रिन्यू के समय ही कुछ जानकारियां सामने आती हैं। लेकिन उसके लिए पांच साल का इंतजार करना होता है। लेकिन अगर इस बीच कोई घटना हुई है तो उसकी जानकारी उनके पास नहीं रहती है। जिससे फर्जी मेडिकल स्टोर संचालित होने की आशंका है। काउंसिल का कहना है कि संशोधित फार्मेसी एक्ट 2020 के तहत ये जिम्मेदारी डीआई की है कि वो जानकारी उपलब्ध कराए।

समग्र आईडी से जोड़ने का मिलेगा फायदा

बताया गया कि सितंबर 2025 से नई व्यवस्था के तहत फार्मेसी पंजीयन को समग्र आईडी को जोड़ा गया है। जिससे सारी जानकारी काउंसिल के पास रहेगी। इंटीग्रेटेड सिस्टम होने की वजह से जानकारी औषधि प्रशासन के पास भी उपलब्ध होगी। उसके आधार पर औषधि विभाग इस पर कार्रवाई कर सकेगा। लेकिन 2030 के बाद ही इसका लाभ मिल पाएगा। हालांकि फार्मेसी कौंसिल में भी फार्मेसी ऑफिसर रखने का प्रावधान है। लेकिन अब तक ऐसी कोई नियुक्ति नहीं हुई है। जिससे व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा है।

केंद्र ला सकता है नया बिल

जानकारी के मुताबिक फार्मेसी एक्ट को लेकर केंद्र नया बिल ला सकता है। जिसमें कई संशोधन होंगे। व्यवस्थाओं में बदलाव होंगे। जिसके मुताबिक कार्य किया जाएगा। केंद्र के बिल के साथ राज्य फार्मेसी काउंसिल की व्यवस्था और नियमों में बदलाव हो सकते हैं।

इनका कहना है

मप्र स्टेट फार्मेसी काउंसिल की रजिस्ट्रार भव्या त्रिपाठी ने कहा, 'हमने फार्मेसी एक्ट के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन को पत्र लिखकर ऐसे पंजीकृत फार्मासिस्टों की जानकारी मांगी है जिनकी वर्तमान में मौत हो चुकी है। एक बार फिर इसको लेकर औषधि विभाग को जानकारी देने के लिए कहा गया है। अभी तक जानकारी नहीं मिल सकी है। संभावना है कि उनके नाम पर मेडिकल स्टोर संचालित किए जा रहे हों। ड्रग इंस्पेक्टर फार्मेसी काउंसिल को मृत हुए रजिस्ट्रर फार्मासिस्टों की रिपोर्ट दें, ताकि ऐसे रजिस्ट्रेशन कैंसिल किए जा सकें।'

Created On :   19 Sept 2026 1:19 AM IST

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