Court Ruling on Trump Tariff: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप टैरिफ को ठहराया गैरकानूनी, राष्ट्रपति ने इस नियम का किया उल्लंघन

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट का कहना है कि राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है। ट्रंप ने दुनियाभर देशों पर भारी टैरिफ लगाया है। अदालत ने इसे गैरकानूनी करार दिया और अपने फैसले में कहा कि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने नेशनल इमरजेंसी के लिए रखे गए कानून का इस्तेमाल किया है। जिससे अधिकार क उल्लंघन हुआ है।
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कानून में टैरिफ का नहीं किया जिक्र
कोर्ट ने बताया, "प्रेसिडेंट को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।" यह फैसला चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने 6-3 से दिया है और निचली अदालत के उस फैसले को सही बताया, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बड़े पैमाने पर इंपोर्ट टैक्स लागू करने के लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल किया है। इससे अधिकार का गलत उपयोग हुआ है।
इस कानून को 1977 में बनाया गया था, जो प्रेसिडेंट को नेशनल इमरजेंसी के समय कॉमर्स को रेगुलेट करने का अधिकार देता है, लेकिन इसमें टैरिफ का स्पष्ट तौर पर जिक्र नहीं किया गया है।
कांग्रेस से नहीं मिली इजाजत
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के निर्णय के हवाले से लिखा, "राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की अपनी खास ताकत के दावे को सही ठहराने के लिए 'कांग्रेस से मिली साफ मंज़ूरी दिखानी होगी'।" कोर्ट ने बताया, "वह ऐसा नहीं कर सकते।"
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सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि राष्ट्रपति ने इसे सही ठहराने के लिए युद्ध के समय की इमरजेंसी शक्तियों का हवाला दिया है। लेकिन कोर्ट ने बताया कि युद्ध के दौरान की शक्तियां टैरिफ के लिए IEEPA के इस्तेमाल को गलत मानती है। उसने कहा कि राष्ट्रपति के पास शांति काल में टैरिफ लगाने का कोई भी स्वाभाविक अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने इस आधार पर सुनाया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप टैरिफ के खिलाफ फैसला सुनाया है। वह 6 बनाम 3 के बहुमत से दिया है। जिसमें इमरजेंसी पावर्स लॉ को आधार बनाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह टैरिफ लगभग हर दूसरे देश पर बड़े 'रेसिप्रोकल' टैरिफ लगाया है। इस निर्णय के दौरान ज्यादातर जजों ने कहा कि संविधान "बहुत साफ तौर पर" कांग्रेस को टैक्स लगाने का अधिकार देता है, इसमें टैरिफ भी शामिल है। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा, "संविधान बनाने वालों ने टैक्स लगाने की पावर का कोई भी हिस्सा एग्ज़ीक्यूटिव ब्रांच को नहीं दिया था।"
Created On :   20 Feb 2026 11:23 PM IST












