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अजब-गजब: ऐसा मंदिर जहां मुसलमान भी टेकते हैं मत्था, जानें मंदिरों से जुड़े रहस्य

अजब-गजब: ऐसा मंदिर जहां मुसलमान भी टेकते हैं मत्था, जानें मंदिरों से जुड़े रहस्य

डिजिटल डेस्क, मुंबई। भारत एक विविध संस्‍कृति वाला देश है। हिमालय की अनश्‍वर बर्फ से लेकर दक्षिण के दूर दराज में खेतों तक, पश्चिम के रेगिस्‍तान से पूर्व के नम डेल्‍टा तक, सूखी गर्मी से लेकर पहाड़ियों की तराई के मध्‍य पठार की ठण्‍डक तक, भारतीय जीवन शैलियां इसके भूगोल की भव्‍यता स्‍पष्‍ट रूप से दर्शाती हैं। ये तो सब जानते हैं कि भारत अपनी संस्कृति, धर्म और मंदिरों के लिए पुरे विश्व में जाना जाता है, लेकिन पड़ोसी देश जो एक मुस्लिम बाहुल्य देश है, वहां भी कुछ ऐसे प्रसिद्द हिन्दू मंदिर हैं जिनकी विशेषताओं के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मुसलमान देश होने के बावजूद इन मंदिरों में हिन्दू ही नहीं बल्कि मुसलमान भी सिर झुकाते हैं। 

51 शक्तिपीठों में से एक है ये मंदिर
बलूचिस्तान में स्थित हिंगलाज मंदिर अपनी पौराणिक कथा से जाना जाता है। दरअसल इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि विष्णु भगवान ने सती माता का शीश काटने के लिए चक्र फेंका था। उस चक्र से शीश कटकर जिस जगह पर गिरा, यह वही जगह है। दरअसल ये मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान से 120 किलोमीटर की दूरी पर हिंगुल नदी के तट पर स्थित है। ये मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। 

गजनी ने इस मंदिर को कई बार लूटा था
मुल्तान में स्थित इस मंदिर में करीब 1500 साल पहले घूमने के लिए आए चीनी बौद्ध भिक्षुओं ने इस मंदिर के बारे में कई बातें लिखी हैं। चीनी बौद्ध भिक्षु ने इस मंदिर के बारे में बताया कि, मोहम्मद बिन कासिम और मोहम्मद गजनी ने इस मंदिर को कई बार लूटा था। 

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कराची स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर को लेकर यह मान्यता है कि यह मंदिर करीब 2000 साल पुराना है। त्रेतायुग से 17 लाख साल पुरानी हनुमान जी की एकमात्र मूर्ति इसी मंदिर में स्थापित है। इस मंदिर का पुनर्निर्माण साल 1082 में कराया गया था। भारत में राम मंदिर को लेकर हर राम भक्त के अंदर बहुत गहरी आस्था है। लेकिन पाकिस्तान में भी कुछ राम मंदिर स्थित हैं जिनमें सबसे विशेष इस्लाम कोट का राम मंदिर है। 

स्वामी नारायण मंदिर पाकिस्तान के कराची शहर के बंदर रोड पर स्थित है। ये मंदिर करीब 32,306 हजार स्कवेयर यार्ड में बना हुआ है। यह मंदिर करीब 160 साल पुराना है। यहां मुलमान भी मत्था टेकते हैं। यही नहीं जब देश का बटवारा हो रहा था तो उस दौरान इस हिंदू मंदिर का उपयोग रिफ्यूजी कैंप की तरह किया गया था। इस मंदिर के परिसर में एक गुरु नानक गुरुद्वारा भी मौजूद है। 

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