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मुबंई : इसे कहते हैं पढ़ाई का जज्बा, पिता ने बेटे के साथ किया ग्रेजुएशन

September 06th, 2018 16:25 IST

डिजिटल डेस्क, मुंबई।  ये सच है पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती लेकिन अपने जवान बेटे के साथ एक साथ परीक्षा की तैयारी करना और परीक्षा देने के लिए साहस होना बड़ी बात है। अक्सर ये कहा जाता है कि कुछ सीखने या पढ़ने की कभी कोई उम्र नहीं होती और यह सही भी है। अगर आपके दिल में कुछ सीखने की लगन है, तो कोई चाह कर भी आपके इस जज्बे के बीच नहीं आ सकता। इतना ही कुछ लोग आर्थिक तंगी के चलते भी पढ़ाई नहीं कर पाते लेकिन अधिकतर लोग ऐसे भी होते है जो इस सब दौर से गुजरते हुए भी पढ़ाई के लिए अपनी लगन कम नहीं होने देते। आज हम आपको ऐसे ही एक व्यक्ति से रूबरू कर रहे हैं, जो एक टैक्सी ड्राइवर है। यह व्यक्ति मुबंई निवासी है, जो आज अखबारों की सुर्खियों में है। 

दरअसल मुबंई के एक टैक्सी ड्राइवर ने अपने बेटे के साथ स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी की है। इस टैक्सी ड्राइवर का नाम मोहम्मद फारूक शेख है। जिस उम्र में लोगों जीने के लिए दो वक्त की रोटी कमाने के लगे रहे है, वहीं मोहम्मद फारूक शेख ने अपमे काम के साथ ही स्नातक की उपाधि हासिल की है। उन्होंने यशवंतराव चव्हाण ओपन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। अपनी इस कामयाबी पर फारूक शेख बेहद ही खुश है। मोहम्मद फारूक शेख ने कहा, "पढ़ाई करने की कोई उम्र नहीं है। मुझे खुशी है कि मैंने अपना स्नातक किया है। अध्ययन की ओर मेरा उत्साह बढ़ गया है। मुझे उम्मीद है कि मैं एमकॉम करूंगा।

उनके बेटे ने कहा," मैं खुश हूं। मैं उसकी कठिनाइयों को हल करने में मदद करता था और उसे सिखाता था। मैं नियमित क्लासेस लेता था,  इसलिए मैं उन्हें रात में पढ़ाता था।

हालांकि यह कोई पहला मामला नही है कि उम्र की वजह से लोग पढ़ाई नही करते। देश में ऐसे कई लोग है, जिनमें 90 की उम्र में भी कुछ लोगों ने अपने पढ़ने का सपना पूरा किया है।  हाल ही में केरल के अलप्पूझा जिले की रहने वाली 96 साल की कर्थयायनी अम्मा साक्षरता मिशन के तहत फोर्थ ग्रेड में एडमिशन ले रही हैं। उन्होंने 10वीं क्लास तक पढ़ने का फैसला किया है। उन्हें सबसे उम्रदराज स्टूडेंट माना जा रहा है। कर्थयायनी अम्मा के पिता पेशे से ट्यूटर थे। पर इसके बावजूद वो और उनकी बहन ने 12 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी थी। 

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