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अजब-गजब: ये हैं भारत के वो मंदिर जहां भगवान को शराब, सिगरेट से लेकर डोसा चाऊमीन तक का भोग लगाया जाता है! जानिए इन अनोखे मंदिरों और उनकी भोग से जुड़ी मान्यताओं के बारे में

November 20th, 2022

डिजिटल,डेस्क, लखनऊ। देश में कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं जिनमें अलग-अलग भगवानों की पूजा अर्चना की जाती है। इन मंदिरों में हर वर्ष लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन मंदिरों में कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां पर भगवान को अजब-गजब तरह का प्रसाद चढ़ाया जाता है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जहां भगवान को शराब, सिगरेट, गोलगप्पा, टॉफी और यहां तक चाऊमीन व लिट्टी चोखा को भोग लगाया जाता है। इसके अलावा इस भोग को दर्शन करने आए भक्तों में प्रसाद के रुप में वितरित किया जाता है। 

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती के अनुसार भगवान को इस तरह का भोग क्षेत्र, आस्था और परंपराओं के मुताबिक लगाया जाता है। वहीं स्वामी कन्हैया महाराज के मुताबिक कई मंदिरों की अपनी-अपनी मान्यता है। जिसके अनुसार, भक्त अपने आराध्य को भक्ति और समर्पण के हिसाब से भोग लगाते हैं। 

यहां सिगरेट का भोग लगाया जाता है

काशी के अलावा उत्तर प्रदेश के मेरठ में बाबा धन्ना का प्राचीन मंदिर स्थित है। मेरठ के कंकरखेडा में स्थापित यह मंदिर करीबन 400 साल पुराना है। बाबा के मंदिर में सिरगेट का भोग लगाया जाता है। मान्याताओं के अनुसार मंदिर में सिगरेट जलाकर मन्नत मांगने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। 

इस मंदिर में भोग के रुप में चढ़ती है शराब

यूपी के बनारस में काल भैरव का प्राचीन मंदिर स्थित है। यहां शराब का भोग लगाया जाता है। इसके बाद उसका वितरण भी किया जाता है। यह परंपरा आज से नही बल्कि सालों से चली आ रही है। शराब के अलावा बाबा काल भैरव को मिठाई और मेवे का भोग भी लगाया जाता है।   

यहां हनुमान जी को लगाया जाता है बाटी चोखा का भोग

यूपी के अयोध्या में भगवान हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर है। सरयू तट से आगे राजघाट के पास मंदिर स्थापित इस मंदिर में भगवान हनुमान को रोजाना बाटी चोखा का भोग लगाया जाता है। भोग लगने के बाद इसका ही प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। मंदिर के पुजारी बाटी बाबा के नाम से प्रसिद्ध हैं। 

यहां भोग में चढ़ाई जाती है बिस्कुट के साथ टॉफी 

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कमच्छा नाम की जगह है। जहॉ बटुक भैरव का मंदिर स्थित है। इस मंदिर में भगवान भैरव को बिस्कुट, टॉफी, लॉलीपॉप और चॉकलेट का भोग लगाया जाता है। भक्त बाबा भैरव के लिए यही समान लेकर मन्नत मांगने आते हैं, साथ ही इसका प्रसाद चढ़ाते हैं। भगवान के भोग लगने के बाद भक्तों को इसका प्रसाद वितरित किया जाता है। पुराणों के मुताबिक यहां भगवान बटुक यानी बच्चे के अवतार में मौजूद हैं। इसलिए उन्हें इसका ही भोग लगाया जाता है।

भगवान शंकर के इस प्राचीन मंदिर में पान और गोलगप्पे का लगता है भोग

काशी यानी बाबा विश्वनाथ के धाम में पान और गोलगप्पे का भोग लगाया जाता है। सभी पहर की आरती में भगवान विश्वनाथ को भोग स्वरुप पान चढ़ाया जाता है। शाम के वक्त आरती में गोलगप्पा चढ़ाया जाता है। इन चीजों के अलावा भगवान को लड्डू, मिठाई, भांग आदि का भोग लगता है।

 रबड़ी का भोग

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान राम को रबड़ी का भोग लगाया जाता है। इसी वर्ष से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ श्रेत्र ने नई परंपरा की शुरुआत की है। इससे पहले भगवान को बाल भोग में मिश्री, किसमिस के साथ पेड़े का भोग लगता था। 

इनके अलावा पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के टांगरा में चाइनीज काली मां का मंदिर है। यहां देवी को नूडल्स का भोग लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त तामिलनाडू के मदुरै में अलागार मंदिर स्थित है। भगवान विष्णू के इस मंदिर में हर दिन डोसा का भोग लगाया जाता है। इस भोग का वितरण भक्तों में भी किया जाता है।