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तरकीब: अहमदाबाद हवाई अड्डे ने सुरक्षा के लिए तैनात किया 'भालू', लंगूरों ने कर रखा था परेशान


डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने लोगों की सुरक्षा के लिए भालू तैनात किया है। यह भालू हवाई अड्डे पर लंगूरों से लोगों की रक्षा करता है। दरअसल, यहां आए दिन लंगूरों के हमले के कारण यात्रियों को परेशानी हो रही थी। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एयरपोर्ट प्रशासन ने एक ऐसा तरीका निकाला, जिसे देखकर हर कोई चकित है। यहां एक कर्मचारी को भालू की ड्रेस पहनाकर तैनात किया गया है, जो लंगूरों को भगाने का काम करता है।

पिछले साल 10 उड़ानें प्रभावित हुई थीं
बता दें कि अहमदाबाद हवाई अड्डा चारों तरफ से पेड़-पौधों से घिरा होने के कारण टर्मिनल पर लंगूरों का दिखना आम बात है। इन लंगूरों से अहमदाबाद हवाई अड्डा प्रशासन बेहद परेशान है। लंबे समय से अधिकारी इनको भगाने का प्रयास कर रहे थे। इसके बाद प्रशासन ने यह तरीका इजाद किया। ज्ञात हो कि पिछले साल अप्रैल में 15 लंगूरों का झुंड ऑपरेशनल क्षेत्र में घुस गया था, जिससे 10 उड़ानें प्रभावित हुई थीं और दो हवाईजहाजों को दूसरी जगह से उड़ान भरना पड़ा था। अप्रैल 2017 में दो उड़ानों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा था, क्योंकि लंगूर रनवे पर आ गए थे और अधिकारी उन्हें वहां से हटाने का प्रयास कर रहे थे। 

भालुओं से डरते हैं लंगूर, इसलिए अपनाई तरकीब
हवाई अड्डे के निदेशक मनोज गंगल ने बताया कि हमारी प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा है। बड़ी संख्या में लंगूर हवाई अड्डे के ऑपरेशनल क्षेत्र में घुस आते हैं। एयर ट्रैफिक कंट्रोल के अधिकारी और अन्य कर्मचारी उन्हें भगाने का प्रयास करते हैं, लेकिन हमने सोचा कि इस प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए। उन्होंने बताया कि हमें इस बात की जानकारी मिली कि लंगूर भालुओं से डरते हैं, जिसके बाद हमने एक कर्मचारी को भालू की ड्रेस पहनाकर लंगूरों को भगाने का काम दिया। यह तरकीब कारगर साबित हुई।

ऑपरेशनल क्षेत्र में जानवर होने पर प्लेन को नहीं दी जाती उतरने की अनुमति
अभी तक हवाई अड्डे पर परंपरागत तरीके से लंगूरों को भगाया जाता था। हवाई अड्डे के नियमों के मुताबिक, अगर कोई जानवर ऑपरेशनल क्षेत्र में घूम रहा है तो वहां उड़ानों को उतरने की अनुमति नहीं दी जाती है। अधिकारियों ने जानवरों को भगाने के लिए पटाखे फोड़ने से लेकर तेज आवाज में सायरन बजाने जैसे उपाय किए, लेकिन इसके बेहतर परिणाम नहीं मिले। निदेशन ने बताया कि ये सभी हमारे परंपरागत तरीके हैं, लेकिन हमें उम्मीद है कि भालू की ड्रेस का तरीका कारगर साबित हो सकता है।

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