मिलावटी दूध बेचने पर एक साल की सजा, न्यायालय ने एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया

मिलावटी दूध बेचने पर एक साल की सजा, न्यायालय ने एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया

Bhaskar Hindi
Update: 2019-08-03 08:00 GMT
मिलावटी दूध बेचने पर एक साल की सजा, न्यायालय ने एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी आशीष ताम्रकार ने मिलावटी दूध बेचने के मामले में मरवाह डेयरी गोरखपुर के संचालक नरेन्द्र पाल को एक साल की सजा सुनाई है। न्यायालय ने डेयरी संचालक पर एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।

सैम्पल मिलावटी होना पाया गया 
अभियोजन के अनुसार खाद्य विभाग ने 11 अप्रैल 2008 को गोरखपुर स्स्थित मरवाह डेयरी की जांच की थी। जांच के दौरान दूध विक्रय का लायसेंस मांगा गया, लेकिन मौके पर मौजूद नरेन्द्र पाल, महेन्द्र कौर और जसविन्दर कौर ने कहा कि उनके पास लायसेंस नहीं है। खाद्य विभाग की टीम ने 40 लीटर के कैन में भरे दूध का सैम्पल लिया। दूध के सैम्पल को राज्य खाद्य प्रयोगशाला भोपाल जांच के लिए भेजा गया। सहायक जिला अभियोजन अधिकारी दीपक बंसोड़ ने तर्क दिया कि प्रयोगशाला में कराई गई जांच में दूध का सैम्पल मिलावटी होना पाया गया है। सुनवाई के बाद न्यायालय ने खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम की धारा 20 (1) के तहत डेयरी संचालक नरेन्द्र पाल को एक साल की सजा और एक हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।

बैंक ऑफ इंडिया के कृषि अधिकारी और उसके दलाल को 5-5 साल की सजा

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसके चौबे ने रिश्वत लेने के आरोप में बैंक ऑफ इंडिया सिवनी के कृषि अधिकारी नितिन कुमार पटेल और उसके दलाल मोतीराम बघेल को 5-5 साल की सजा सुनाई है। न्यायालय ने कृषि अधिकारी पर 10 हजार रुपए और दलाल पर 5 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया है। सीबीआई की ओर प्रस्तुत आरोप पत्र में कहा गया कि नितिन पटेल बैंक ऑफ इंडिया में कृषि अधिकारी के पद पर कार्यरत था। शिकायतकर्ता चंदन सिंह राजपूत और उसकी पत्नी रीतेश्वरी राजपूत ने किसान क्रेडिट कार्ड से एक लाख 42 हजार और एक लाख रुपए ऋण के लिए आवेदन दिया। 21 जनवरी 2014 को कृषि विस्तार अधिकारी नितिन पटेल ने ऋण स्वीकृत करने के लिए 5 प्रतिशत रिश्वत दलाल मोतीराम बघेल के जरिए मांगी । शिकायतकर्ता के खाते से 10 हजार रुपए दलाल मोतीराम बघेल के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए। इसके साथ ही 3 हजार रुपए नकद रिश्वत ली गई। शिकायत के बाद सीबीआई ने जांच कर न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने कृषि अधिकारी को 5 साल की सजा और 10 हजार रुपए अर्थदंड और दलाल को 5 साल की सजा और पांच हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।
 

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