धर्म संसद में एक और कंट्रोवर्सियल बयान- 'हिंदुओं के हाथ में मोबाइल नहीं, हथियार होने चाहिए'

धर्म संसद में एक और कंट्रोवर्सियल बयान- 'हिंदुओं के हाथ में मोबाइल नहीं, हथियार होने चाहिए'

Bhaskar Hindi
Update: 2017-11-26 13:37 GMT
धर्म संसद में एक और कंट्रोवर्सियल बयान- 'हिंदुओं के हाथ में मोबाइल नहीं, हथियार होने चाहिए'

डिजिटल डेस्क, उडुपी। कर्नाटक के उडुपि में चल रही धर्मसंसद से एक और कंट्रोवर्सियल बयान सामने आया है। धर्म संसद के तीसरे दिन स्वामी नरेंद्र नाथ ने कहा है कि हिंदुओं के हाथ में मोबाइल नहीं, बल्कि हथियार होने चाहिए। उन्होंने कहा, "हिंदुओं के पास आत्मरक्षा के लिए हथियार होने चाहिए। लाखों रुपए मोबाइल में खराब करने की बजाय हमें हथियार खरीदने पर ध्यान देना चाहिए। खासकर ऐसे समय पर जब हिंदू मंदिरों पर हमले हो रहे हों और पूजा स्थलों को नष्ट किया जा रहा हो, संसद को निशाना बनाया जा रहा हो, यह जरुरी है।

इससे पहले धर्मसंसद के दूसरे दिन शनिवार को हरिद्वार स्थित भारत माता मंदिर के स्वामी गोविंद देव गिरिजी महाराज ने कहा था कि समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) के लागू होने से पहले हिंदुओं को कम से कम 4 बच्चे पैदा करना चाहिए। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था, "जिन क्षेत्रों में हिंदुओं की संख्या कम हुई, उनमें से कई क्षेत्रों को भारत ने खो दिया। सरकार अभी अधिकतम दो बच्चों पर जोर दे रही है, लेकिन जब तक समान नागरिक संहिता लागू न हो जाए, तब तक हिंदुओं को कम से कम चार बच्चे पैदा करने चाहिए।"

गौरतलब है कि अपने विश्वप्रसिद्ध मंदिरों के लिए जाने वाले उडुपी शहर में हुई धर्म संसद में देश भर से साधु-संतों, मठ प्रमुखों और विहिप के 2000 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह संसद 3 दिनों तक चली। रविवार को इसका अंतिम दिन था। इसमें राम मंदिर, धर्म परिवर्तन और गोरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ ही जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव खत्म करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बता दें कि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) द्वारा आयोजित इस धर्म संसद के पहले दिन उद्घाटन भाषण में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि राम जन्मभूमि पर राम मंदिर बनना तय है और यह उन्हीं लोगों की अगुवाई में बनेगा, जो 20-25 सालों से इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। 

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