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कड़ी फटकार: हाईकोर्ट की एमएसआरटीसी को कड़ी फटकार, मीडिया रिपोर्ट पर ड्राइवर को बिना जांच नौकरी से निकालना अवैध

Sambhaji Nagar News. बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) की मनमानी कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी कर्मचारी को केवल टीवी न्यूज या अखबारों की खबरों के आधार पर बर्खास्त करना न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के भी खिलाफ है।
हादसे के बाद मीडिया ट्रायल बना आधार
यह मामला 31 जुलाई 2019 का है, जब अमलनेर-इंदौर रोड पर एसटी बस का एक्सीडेंट हुआ था। हादसे के बाद मीडिया में खबरें प्रसारित हुईं कि ड्राइवर अनिल प्रताप निकम नशे की हालत में वाहन चला रहा था। जलगांव संभाग के एमएसआरटीसी अधिकारियों ने बिना किसी विभागीय जांच के, केवल इन मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर नियम 6(1) का हवाला देते हुए ड्राइवर को सेवा से बर्खास्त कर दिया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अजीत बी. कड़ेठाणकर ने निगम के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट सबूत नहीं होतीं। टीवी या अखबार की खबरें किसी विधिवत विभागीय जांच का विकल्प नहीं हो सकतीं। जब ड्राइवर ने आरोप स्वीकार ही नहीं किया, तो बिना जांच उसे बर्खास्त करना न्यायसंगत कैसे हो सकता है?
अवमाननापूर्ण रवैया
कोर्ट ने यह भी माना कि लेबर कोर्ट ने 2021 में ही ड्राइवर को पुनः नियुक्त करने का आदेश दिया था, लेकिन निगम ने उस आदेश की अनदेखी की। इसे कोर्ट ने गंभीर और अवमाननापूर्ण रवैया बताया।
अंतिम निर्देश: 4 हफ्ते में बहाली, 2 हफ्ते में भुगतान
हाईकोर्ट ने निगम की याचिका खारिज करते हुए आदेश दिया कि ड्राइवर अनिल निकम को 4 हफ्तों के भीतर नौकरी पर वापस लिया जाए। साथ ही, लेबर कोर्ट द्वारा निर्धारित 50% बकाया वेतन 2 हफ्तों के भीतर अदा किया जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ड्राइवर की ओर से अधिवक्ता एम.वी. भामरे ने पैरवी की, जबकि एमएसआरटीसी की ओर से अधिवक्ता एम.डी. शिंदे ने पक्ष रखा।
Created On :   1 April 2026 5:26 PM IST













