विपक्ष का हमला: सरकारी फाइलों पर अब भी औरंगाबाद का नाम! दानवे ने निशाना साधते कहा - यह है मुगलों वाली मानसिकता

सरकारी फाइलों पर अब भी औरंगाबाद का नाम! दानवे ने निशाना साधते कहा - यह है मुगलों वाली मानसिकता
  • नाम बदलने का दावा करने वाली महायुति सरकार की पोल खुली
  • पोल अब खुद सरकारी दस्तावेजों ने खोल दी है
  • अंबादास दानवे ने सरकार के दोहरे रवैये पर कड़ा हमला बोला

Sambhaji Nagar News. छत्रपति संभाजीनगर नाम बदलने का दावा करने वाली महायुति सरकार की पोल अब खुद सरकारी दस्तावेजों ने खोल दी है। शिवसेना (उबाठा) नेता अंबादास दानवे ने सरकार के दोहरे रवैये पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने सबूत पेश करते हुए दिखाया कि जिस नाम को खत्म करने का दावा भाजपा-शिंदे-पवार सरकार कर रही है, वही “औरंगाबाद” आज भी सरकारी कागजों में मौजूद है।

“शाही फरमान” जारी कर रहा है मंत्रालय

दानवे ने एक सरकारी जीआर का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नामांतरण का ढोल पीटने वाली सरकार की नाक के नीचे ही राजस्व विभाग के दस्तावेजों में अब भी “औरंगाबाद” दर्ज है। यह अधिकारियों की मुगल मानसिकता और सरकार के दोगलेपन को दर्शाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब मंत्रालय “शासन निर्णय” कम और “शाही फरमान” ज्यादा जारी कर रहा है।

सबूत के साथ घेरा

दानवे द्वारा सार्वजनिक किया गया राजस्व विभाग का पत्र राज्य के छह राजस्व विभागों के पुनर्गठन और पदों की समीक्षा से संबंधित है। इस आधिकारिक दस्तावेज में विभागों की सूची दी गई है—कोंकण, पुणे, नाशिक, अमरावती, नागपुर… और फिर आता है वही नाम, जिसे सरकार कागजों से हटाने का दावा करती है—“औरंगाबाद”।

विपक्ष का हमला तेज

सरकारी दस्तावेज में “छत्रपति संभाजीनगर” की जगह पुराने नाम के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है। दानवे ने इसे सरकार का वैचारिक अंधापन बताते हुए आरोप लगाया कि एक ओर सरकार नाम के मुद्दे पर विकास निधि रोकने की धमकी देती है, वहीं दूसरी ओर खुद सरकारी कागजों में औरंगाबाद लिखती है। उनके मुताबिक, यह प्रशासन पर अब भी हावी मुगल सामंतवाद का असर है।

Created On :   7 April 2026 8:53 PM IST

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