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Beed News: रविवार से अधिकमास की शुरूआत, पुरुषोत्तमपुरी गांव में भगवान पुरुषोत्तम के मंदिर में लगता है मेला
Beed News सुनील चौरे . देश में भगवान पुरुषोत्तम का एकमात्र प्रसिद्ध मंदिर बीड जिले के माजलगांव तहसील के पुरुषोत्तमपुरी गांव में स्थित है। यह स्थान माजलगांव से लगभग 20 किलोमीटर दूरी पर है। अधिकमास का महीना हर तीन वर्ष में एक बार आता है, इसलिए इस दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है।
प्राचीन काल से ही अधिकमास के अवसर पर यहां विशाल यात्रा और धार्मिक आयोजन होते आ रहे हैं। यहां स्थित भगवान पुरुषोत्तम का प्राचीन हेमाडपंथी मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। चतुर्भुजधारी भगवान पुरुषोत्तम के हाथों में शंख, चक्र और गदा सुशोभित है। दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
अधिकमास की शुरुआत 17 मई, रविवार से हो रही है। 17 जून तक यह पर्व चलेगा। पुरुषोत्तमपुरी गांव के पास बहने वाली गोदावरी नदी का विशाल पात्र श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। पिछले वर्ष अच्छी बारिश होने के कारण नदी में पर्याप्त पानी है। यहां गोदावरी में स्नान करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु स्नान के बाद भगवान पुरुषोत्तम के दरबार में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं।
भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए गांव में आने-जाने की पूरी व्यवस्था की गई है। अधिकमास के पूरे महीने यहां श्रद्धालुओं का लगातार आगमन बना रहता है। जगह-जगह पानीपोई की व्यवस्था की गई है। महाराष्ट्र शासन ने श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त बस सेवाएं भी शुरू की हैं। इस महीने लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।अधिकमास के दौरान पुरुषोत्तमपुरी गांव में होटल, किराना दुकानें, फूल और प्रसाद की दुकानों सहित अनेक छोटे व्यवसाय शुरू हो गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा।
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अधिक मास में सत्यनारायण भगवान की पूजा : अधिकमास में श्रीहरि यानी भगवान विष्णु की पूजा करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इसलिए अधिकमास में वैसे तो सभी प्रकार के शुभ कार्यों की मनाही होती है।लेकिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करना सबसे शुभफलदायी माना जाता है। अधिकमास में विष्णुजी की पूजा करने से माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और आपके घर में धन वैभव के साथ सुख और समृद्धि आती है।
अधिकमास का महत्व : परमेश्वर श्रीविष्णु द्वारा वरदान प्राप्त अधिकमास ,मलमास अथवा पुरुषोत्तम मास की अवधि के मध्य श्रीमद्भागवत का पाठ, कथा का श्रवण, श्रीविष्णु सहस्त्रनाम, श्री राम रक्षास्तोत्र, पुरुष सूक्त का पाठ ओम नमो भगवते वासुदेवाय ओम नमो नारायणाय जैसे मंत्रों का जप करके मनुष्य श्री हरि की कृपा का पात्र बनता है। इस मास में निष्काम भाव से किए गए जप-तप पूजा-पाठ ,दान-पुण्य, अनुष्ठान आदि का महत्व सर्वाधिक रहता है। परमार्थ सेवा, असहाय लोगों की मदद करना, बुजुर्गों की सेवा करना, वृद्ध आश्रम में अन्न वस्त्र का दान करना, विद्यार्थियों को पुस्तक का दान कथा संत महात्माओं को धार्मिक ग्रंथों का दान करना, सर्दियों के लिए ऊनी वस्त्र कंबल आदि का दान करना सर्वश्रेष्ठ फलदाई माना गया है।इस मास में किए गए जप-तप, दान पुण्य का लाभ जन्म जन्मांतर तक दान करने वाले के साथ रहता है। लगभग तीन वर्षों के अंतराल में पढ़ने वाले इस महापर्व का भरपूर लाभ उठाना चाहिए। जिस चन्द्रवर्ष में सूर्य संक्रांति नहीं पड़ती उसे मलमास कहा गया है जिसका सीधा संबंध सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर निर्धारित होता है।
अधिक मास में दामाद -बेटी का सम्मान : अधिक मास के स्वामी भगवान विष्णु है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दामाद को साक्षात भगवान विष्णु का अवतार मानकर उन्हें सम्मानित किया जाता है, जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। दामाद के आदर-सत्कार का मुख्य उद्देश्य बेटी के सुखी और वैवाहिक जीवन की कामना करना होता है। इस महीने में दामाद और उनकी पत्नी (बेटी) को घर बुलाकर विशेष पकवान खिलाए जाते हैं। उन्हें उपहार के रूप में 33 की संख्या में वस्तुएं (जैसे 33 मालपुए, 33 फल या अन्य उपहार) और अक्सर सोने या चांदी की वस्तुएं दी जाती है।
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Created On :   16 May 2026 7:00 PM IST















