- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- बीड
- /
- सूखे की भयावह स्थिति देख केंद्रीय...
फसल का नुकसान: सूखे की भयावह स्थिति देख केंद्रीय दल ने लिया जायजा, किसानों की बर्बाद फसलों और जल संकट पर जताई चिंता

डिजिटल डेस्क, बीड। जिले में सूखे की स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय दल ने गेवराई और बीड तहसील के विभिन्न गांवों का दौरा किया। इस दौरान फसलों को हुए नुकसान, जलस्रोतों की स्थिति और पेयजल संकट की समीक्षा की गई। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुक्तानंद अग्रवाल के नेतृत्व में पहुंचे दल ने खेतों में जाकर फसलों की स्थिति का निरीक्षण किया और किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। बारिश में लंबे अंतराल के कारण किसानों की मेहनत और खेती पर किया गया खर्च बर्बाद होने की स्थिति सामने आई।
केंद्रीय दल में महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र के उपनिदेशक सुनील कुमार दुबे, नीति आयोग के सलाहकार डॉ. जसपाल सिंह तथा पशुपालन एवं डेयरी विभाग की पशुधन अधिकारी डॉ. साक्षी भदौरिया शामिल थीं। इस दौरान राज्य के कृषि सचिव परिमल सिंह, बीड के जिलाधिकारी विवेक जॉन्सन, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितिन रहमान और जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी सुभाष सालवे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
यह भी पढ़े -प्लांट के मिक्सर में गिरने से 16 वर्षीय बाल मजदूर की दर्दनाक मौत, पांच घंटे तक फंसा रहा शव
जातेगांव फाटा में फसलों की स्थिति का जायजा
केंद्रीय दल ने गेवराई तहसील के जातेगांव फाटा क्षेत्र में खेतों का निरीक्षण कर दौरे की शुरुआत की। अधिकारियों ने खेतों में खड़ी फसलों की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया और किसानों से बातचीत कर बारिश की कमी तथा खेती में आ रही समस्याओं की जानकारी प्राप्त की।
कपास, गन्ना और शहतूत की फसलों को नुकसान
गेवराई तहसील के अर्धमसला और रानमला क्षेत्र में केंद्रीय दल ने किसानों से संवाद कर फसलों को हुए नुकसान की जानकारी ली। अर्धमसला के किसान सुरेश बाबूराव नरवाडे के गट क्रमांक 94 में 1.40 हेक्टेयर क्षेत्र में लगी कपास की फसल का निरीक्षण किया गया। वहीं, संतोष बाबूराव नरवाडे के गट क्रमांक 331 में 0.67 हेक्टेयर क्षेत्र में लगी गन्ने की फसल का जायजा लिया गया। इसके अलावा गेवराई के किसान मदन रामभाऊ मोटे के 0.80 हेक्टेयर क्षेत्र में लगी कपास की फसल को हुए नुकसान की जानकारी भी अधिकारियों ने प्राप्त की।
शहतूत की फसल के निरीक्षण के दौरान पानी की कमी के कारण पौधों की वृद्धि रुकने और अपेक्षित उत्पादन मिलने में कठिनाइयां आने की बात सामने आई। बारिश में लंबे अंतराल से कपास, गन्ना और शहतूत उत्पादक किसान आर्थिक संकट में घिर गए हैं। फसलों पर खर्च किए गए हजारों रुपये डूबने की आशंका है। वहीं, सूखकर जली फसलों का पशुओं के चारे के रूप में भी उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
खेतों में की गई मेहनत, फसलों पर किया गया खर्च और अच्छी पैदावार की उम्मीद बारिश के लंबे अंतराल के कारण प्रभावित हुई है। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
खेती के साथ पेयजल संकट भी गंभीर
गेवराई के किसान मदन रामभाऊ मोटे के तुअर और कपास की फसलों का निरीक्षण करते हुए केंद्रीय दल ने जुलाई के पहले सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण हुए नुकसान की जानकारी ली। किसान मोटे ने अधिकारियों को बताया कि कुएं का पानी सूख जाने के कारण पीने के पानी के लिए उन्हें अपने खर्च पर टैंकर मंगवाना पड़ रहा है। क्षेत्र के अन्य किसानों ने भी गन्ने की फसल सूखकर बर्बाद होने की जानकारी दी।
खेती के लिए पानी उपलब्ध नहीं होना, कुओं का सूख जाना और पेयजल के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना क्षेत्र की गंभीर समस्या बन गई है। इससे खेती के साथ आम जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है। किसानों के साथ हुई बातचीत में जल संकट की भयावह स्थिति सामने आई।
यह भी पढ़े -हत्यारोपी बीडीओ ने नहीं किया सरेंडर, कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
पारगांव जप्ती में सोयाबीन की फसल का निरीक्षण
केंद्रीय दल ने तहसील के पारगांव जप्ती में किसान सतीश सखाराम देवले के गट क्रमांक 50 में 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में लगी सोयाबीन की फसल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। बारिश की कमी के कारण फसल की बिगड़ी स्थिति का जायजा लेते हुए अधिकारियों ने खेती में हुए नुकसान की जानकारी प्राप्त की।
बारिश में लंबे अंतराल के कारण सोयाबीन की वृद्धि और संभावित उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। किसानों ने खेती पर किए गए खर्च के अनुरूप उत्पादन मिलने को लेकर अनिश्चितता जताई। फसल की स्थिति को देखते हुए किसानों के सामने आर्थिक नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
यह भी पढ़े -हत्यारोपी बीडीओ ने नहीं किया सरेंडर, कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
सिंदफणा नदी का पात्र सूखा, जल संरक्षण पर जोर
तहसील के नांदूरा हवेली में केंद्रीय दल ने सिंदफणा नदी के सूखे पात्र का निरीक्षण कर क्षेत्र में जल संकट की स्थिति का जायजा लिया। नदी में घटते जलस्तर, सिंचाई पर पड़ रहे प्रभाव और भविष्य में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की गई। इस दौरान अधिकारियों को बताया गया कि माजलगांव बांध में जल भंडारण औसत क्षमता के मुकाबले घटकर 26 प्रतिशत रह गया है।
बारिश के दौरान बहकर जाने वाले पानी को रोकने के लिए बांधों और बंधारों का निर्माण, भूजल पुनर्भरण बढ़ाने तथा गाद से भरे कुओं का पुनर्जीवन करने जैसे उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया गया। स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण के प्रभावी उपाय अपनाने से भविष्य में पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
बारिश के पानी का अधिकतम भंडारण करने और जमीन में पानी के रिसाव की मात्रा बढ़ाने से जल संकट की गंभीरता कम की जा सकती है। निरीक्षण के दौरान जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
दूसरे दिन भी विभिन्न गांवों का निरीक्षण
केंद्रीय दल ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्यक्ष निरीक्षण कर किसानों की समस्याओं, फसलों को हुए नुकसान और पेयजल संकट की स्थिति को समझा। इन निरीक्षणों के आधार पर जिले में सूखे की स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन केंद्रीय दल बीड तहसील के मांजरसुंबा, खंडाला, वैद्यकिन्ही, सोनगांव और पाटोदा में फसलों तथा जलस्रोतों का निरीक्षण करेगा। इसके बाद जिलाधिकारी विवेक जॉन्सन की उपस्थिति में जिलाधिकारी कार्यालय के नियोजन सभागृह में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
Created On :   9 Oct 2026 8:22 PM IST
Tags
- बीड़
- महाराष्ट्र समाचार
- Beed News
- Maharashtra News
- अंबाजोगाई समाचार
- Ambajogai News
- माजलगांव समाचार
- Majalgaon News
- परली समाचार
- Parli News
- गेवराई समाचार
- Gevrai News
- आष्टी समाचार
- Ashti News
- पाटोदा समाचार
- Patoda News
- केज समाचार
- Kaij News
- धारूर समाचार
- Dharur News
- वडवणी समाचार
- Wadwani News
- शिरूर कासार समाचार
- Shirur Kasar News
- बीड जिला समाचार
- Beed District News
- मराठवाड़ा समाचार
- Marathwada News













