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MP News: बाघ दिवस पर अरोप वनों में तेजी से बढ़ा भूमि कारोबार, बाघ संरक्षण को भ्रष्टाचार के गठजोड़ से उजाड़ रहे

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बाघ दिवस (आज बाघ दिवस है) को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा बाघ बचाने के दावे और जंगल उजाड़ने की नीति साथ-साथ नहीं चल सकती। मप्र में बाघ संरक्षण को विकास परियोजनाओं और भ्रष्टाचार के गठजोड़ से उजाड़ा जा रहा। केन-बेतवा लिंक परियोजना, भोपाल का पश्चिमी बाईपास, विभिन्न सड़क और रेल परियोजनाएं तथा वन क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते भूमि कारोबार पर पुनर्विचार हो।
सरकार बाघों की संख्या बढ़ने और संरक्षण की उपलब्धियों का श्रेय लेती है, लेकिन अंदर की सच्चाइयां कुछ और हैं । लाखों पेड़ों की कटाई, हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र का नुकसान और बाघों सहित अनेक वन्यजीवों के आवास पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर वर्षों से विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय की समिति ने केन बेसिन में अतिरिक्त जल की अवधरणा पर सवाल खड़े किये हैं। कई स्वतंत्र पर्यावरण विशेषज्ञों ने परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाए हैं।
वन्यजीव गलियारों में अधिकारियों ने खरीदी जमीन
सिंघार ने कहा भोपाल का पश्चिमी बाईपास परियोजना में वन्यजीव गलियारे में प्रस्तावित मार्ग के आसपास कुछ अधिकारियों ने पहले जमीन खरीदी की। आरोप है कि परियोजना के कारण उसकी कीमतों में भारी वृद्धि हुई। जिसकी स्वतंत्र जांच हो। विकास का उद्देश्य कुछ लोगों की संपत्ति का मूल्य बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज का संतुलित और न्यायपूर्ण विकास होना चाहिए।
परियोजना और उनसे जुड़ी पर्यावरणीय चिंता
-केन-बेतवा लिंक परियोजना में पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र के डूबने, लाखों पेड़ों की कटाई, बाघों के आवास के विखंडन तथा घड़ियाल और गिद्ध जैसे वन्यजीवों पर प्रभाव की आशंका है।
-दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे (पश्चिमी कॉरिडोर) में विशेषज्ञों के अनुसार यदि पर्याप्त वन्यजीव-अनुकूल संरचनाएं न हों तो बाघों की आवाजाही बाधित हो सकती है और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
-कान्हा–पेंच–बांधवगढ़–पन्ना टाइगर कॉरिडोर सड़क पर चार प्रमुख टाइगर रिजर्वों को जोड़ने वाली इस सड़क में वैज्ञानिक डिज़ाइन का अभाव होने पर बाघों के प्राकृतिक आवागमन में रुकावट और पर्यटन का अतिरिक्त दबाव बढ़ने की आशंका है।
- एनएच -45 (हिरन–सिंदूर खंड) में नौरादेही अभयारण्य और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले इस मार्ग पर पिछले दो वर्षों में 237 वन्यजीव-वाहन टक्कर और 94 वन्यजीवों की मौत दर्ज होने के कारण वन्यजीव सुरक्षा उपायों की चिंताजनक स्थिति के रूप में सामने आई है।
-कटनी–सिंगरौली रेलवे लाइन पर संजय-दुबरी टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली इस रेल परियोजना पर वर्ष 2010 से अब तक 39 से अधिक वन्यजीवों की मौत दर्ज की गई है। इसलिए विशेषज्ञ इस रेलमार्ग के पुनर्संरेखण की मांग कर रहे हैं।
Created On :   30 July 2026 1:33 AM IST












