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MP News: भोपाल-देवास, लेबड़-जावरा और जावरा-नयागांव मार्ग पर टोल वसूली बंद नहीं करेगी राज्य सरकार

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मप्र शासन टोल की तीन बीओटी परियोजनाओं, भोपाल-देवास, लेबड़-जावरा एवं जावरा-नयागांव मार्ग पर टोल वसूली बंद नहीं करेगी। मप्र लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से मिली अधिकृत जानकारी के अनुसार, इन तीनों मार्गों पर लागत से कई गुना अधिक टोल की वसूली नहीं हुई है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 20 दिसंबर 2024 के प्रकरण में दिए गए निर्णय नोएडा ब्रिज के परियोजना के विशिष्ट तथ्यों एवं अनुबंधीय परिस्थितियों पर आधारित हैं। ये परिस्थितियां इन तीनों मार्गों के अनुबंधों पर परिलक्षित नहीं होती हैं। इसलिये अनुबंध की शर्तों के अनुसार कंसेशन अवधि तक टोल वसूली बंद किया जाना उचित नहीं है।
पीडब्ल्यूडी के अनुसार, तीनों टोल सड़कों की परियोजना लागत 1360 करोड़ रुपये है जोकि विभाग द्वारा अनुमानित है तथा इसका उल्लेख कंसेशन अनुबंध में किया गया है। तथापि, कंसेशनायर एवं बैंक द्वारा आंकी गई वास्तविक परियोजना लागत सामान्यत: कुल परियोजना लागत से अधिक होती है। इसका कारण यह है कि वास्तविक परियोजना लागत विभिन्न कारणों, जैसे कंसेशनायर को उपलब्ध ऋण पर ब्याज दर, कंसेशनायर द्वारा अंतिम रूप से तैयार की गई परियोजना की डिजाइन, निर्माण पद्धति, उसकी तकनीक तथा अन्य परियोजना-विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर निर्धारित होती है।
31 मार्च 2026 तक जावरा-नयागांव परियोजना में कंसेशनायर द्वारा 2 हजार 873 करोड़ 95 लाख रुपये व्यय किया गया है, जबकि टोल से 2 हजार 684 करोड़ 60 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं, अर्थात अभी तक टोल वसूली कुल व्यय का 93.41 प्रतिशत ही की गई है। इसी प्रकार, भोपाल-देवास परियोजना में सभी वास्तविक खर्चों को जोडक़र कंसेशनायर का कुल व्यय 1 हजार 934 करोड़ 2 लाख रुपये है, जबकि टोल से 2 हजार 104 करोड़ 88 लाख रुपये प्राप्त हए हैं।
यह टोल वसूली कुल व्यय का लगभग 108 प्रतिशत है, अर्थात लागत से कई गुना वसूली जैसी कोई स्थिति नहीं है। लेबड़-जावरा परियोजना में कुल व्यय 3 हजार 10 करोड़ 60 लाख रुपये है, जबकि टोल से 2 हजार 436 करोड़ 28 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं। अर्थात अभी तक केवल 81 प्रतिशत व्यय की ही टोल वसूली हुई है। इसके अलावा, मप्र सडक़ विकास निगम की बीओटी (टोल) परियोजनाओं में टोल वसूली संबंधित कंसेशन अनुबंधों के प्रावधानों के अनुसार नियत कंसेशन अवधि के लिए की जाती है।
कंसेशन अवधि भोपाल-देवास में 25 वर्ष है जो कि वर्ष 2033 तक है, लेबड़-जावरा में 30 वर्ष है जो कि वर्ष 2038 तक है एवं जावरा-नयागांव में 25 वर्ष है जो कि वर्ष 2033 तक है। वर्तमान में किसी सक्षम न्यायालय द्वारा इन परियोजनाओं में अनुबंधानुसार की जा रही टोल वसूली को अवैध अथवा सार्वजनिक संपत्ति से अनुचित लाभ अर्जित करना नहीं माना गया है। भारत सरकार के मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट के तहत यातायात कम या अधिक होने की स्थिति में कंसेशन अवधि बढ़ाने या घटाने का प्रावधान है जिसके पालन में लेबड़-जावरा परियोजना में यातायात कम होने की स्थिति में अनुबंध अनुसार कंसेशन अवधि 5 वर्ष के लिए बढ़ाई गई है।
Created On :   30 July 2026 1:07 AM IST












