MP News: जल जीवन मिशन प्लानिंग, डिजाइन का परीक्षण किए बिना शासन को भेजे प्रोजेक्ट, चेताकर लौटाया

जल जीवन मिशन प्लानिंग, डिजाइन का परीक्षण किए बिना शासन को भेजे प्रोजेक्ट, चेताकर लौटाया

भास्कर ब्यूरो, भोपाल। मप्र लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जल जीवन मिशन (जेजेएम) के 8032 रिवाइज्ड प्राेजेक्ट की परतें खुलती जा रही है। इन प्रोजेक्ट को रिवाइज करने से पहले शासन ने अिधकारियों को लिखित में कहा था कि अच्छे से प्लानिंग करें, डिजाइन, मॉनीटिरंग आिद का परीक्षण करने के बाद ही शासन के पास अप्रूवल के लिए भेजा जाए, लेकिन ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिन्हें प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) पीएचई जिम्मेदार अधिकारियों और आउटसोर्स एजेंसी मेसर्स अर्नस्ट एंड यंग एलएलपी-मेसर्स शाह टेक्नीकल कंसल्टेंट्‌स (जेवी) ने बिना जांचे-परखे ही शासन को भेज दिए।

इसके चलते प्रमुख अभियंता और परिक्षेत्र अिधकारियों को शासन ने चेताया कि रिवाइज्ड प्रोजेक्ट्स की डीपीआर की ठीक से छानबीन कर उसकी खामियां दूर करें और फिर शासन को पेश करें। शासन को इसके लिए पत्र भी लिखने पड़े। इसके बावजूद जिम्मेदार अिधकािरयों ने डीपीआर में दर्जनों खामियां छोड़ी।

शासन ने चेताकर डीपीआर लौटाई

शैलेष कुमार जैन, अवर सचिव मप्र शासन ने 29 अगस्त, 2023 को प्रमुख अिभयंता, एसके अंधवान को पत्र लिखा था कि रीवा-मऊगंज के 33 एकल ग्राम नल-जल प्रोजेक्ट रिवाइज (रिवाइज्ड डीपीआर) की गई है, जिन्हें शासन के पास अप्रूवल के लिए भेजा गया है, लेकिन इनकी टेक्नीकल रिपोर्ट अस्पष्ट है। इनकी लागत के तुलनात्मक पत्रक में प्रोजेक्ट्स के विभिन्न घटकों की मात्रा और लागत बढ़ने के कारणों की भी स्पष्ट जानकारी नहीं है। शैलेष कुमार जैन ने यह भी लिखा कि इन प्रोजेक्ट्स को लेकर प्रमुख अिभयंता कार्यालय के मनोज अवस्थी और श्वेता औचट (दोनों प्रभारी कार्यपालन यंत्री) ने शासन स्तर पर उपस्थित होकर बताया कि रीवा-मऊगंज के 33 प्रोजेक्ट्स का प्रमुख अिभयंता कार्यालय में परीक्षण नहीं किया गया है।

इन प्रोजेक्ट्स को सीधे शासन के पास अप्रूवल के लिए भेज दिया गया है। बिना परीक्षण, खामियों के चलते शासन को भेजी गई रिवाइज्ड डीपीआर शैलेष कुमार जैन ने प्रमुख अिभयंता पीएचई को लौटा दी। ज्ञात हो कि रीवा-मऊगंज के कुल 255 प्रोजेक्ट्स रिवाइज किए गए। इनकी लागत 25.95 प्रतिशत बढ़ी है। इनमें से 141 प्रोजेक्ट ऐसे है, जिन्हें बिना टेंडर के ठेकेदार को दे दिए गए हैं।

विसंगतियां सुधारने 19 पत्र

अनूपपूर के 25, उमरिया के 11, मंडला के 24, नरसिंहपुर के 7, सतना के 10, सिवनी के 2, छिंदवाड़ा के 28, जबलपुर के 11, बालाघाट के 2, परासिया के 1, कटनी के 28 28 डीपीआर में विसंगतिया पाई गई। इन्हें सुधारने के लिए बार-बार पत्र लिखे गए। जानकारी मिली है कि इसके लिए 19 बार पत्राचार किया गया।

इन खामियों को नहीं पकड़ पाए अिधकारी-पीएमयू

- 28 अगस्त, 2023 को अधीक्षण यंत्री की बैठक में पता चला कि डीपीआर में तकनीकी जानकारी ही नहीं दी गई।

- तुलनात्मक प्रपत्र में पहले किए गए रिवाइज की जानकारी समाहित करते हुए तैयार की गई तकनीकी रिपोर्ट नहीं पेश की।

- मूल योजना की डीपीआर को ही अगस्त 2023 तक का खर्च माना गया और उसके अनुसार 12 प्रतिशत जीएसटी की गणना कर ली गई। वास्तविक व्यय अनुसार तुलनात्मक प्रपत्र नहीं दिया।

- प्रोजेक्ट्स में पम्पिंग मशीनरी का सिलेक्शन, सब एस्टीमेट, प्रस्तावित पम्प का हेड, केबल, सक्शन पाइप आदि का ठीक से परीक्षण नहीं किया।

- डिस्ट्रीब्यू्शन सिस्टम की डीपीआर का भी फिर से परीक्षण करवाना पड़ा।

- अनेक प्रोजेक्ट्स में लेआउट प्लान और गूगल मैप के नक्शों में प्रस्तावित पुनरीक्षित योजना के घटक व समस्त जानकारी सही से नहीं पेश की। नक्शे अस्पष्ट एवं पठनीय नहीं दिए।

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