MP News: प्रदेश में देह व्यापार के खात्मे के लिए जाबाली योजना के तहत मिलेगा अनुदान

प्रदेश में देह व्यापार के खात्मे के लिए जाबाली योजना के तहत मिलेगा अनुदान
राज्य सरकार प्रदेश में वैश्यावृत्ति के उन्मूलन हेतु जाबाली योजना के तहत स्वैच्छिक संस्थाओं को अनुदान देगी। इसके लिये महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्वैच्छिक संस्थाओं से आवेदन मंगायें हैं।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। राज्य सरकार प्रदेश में वैश्यावृत्ति के उन्मूलन हेतु जाबाली योजना के तहत स्वैच्छिक संस्थाओं को अनुदान देगी। इसके लिये महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्वैच्छिक संस्थाओं से आवेदन मंगायें हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार द्वारा संचालित यह योजना एक अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार कार्यक्रम है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य राज्य की विशिष्ट जनजातियों (जैसे बेडिय़ा, बांछड़ा और सांसी) में परंपरागत रूप से व्याप्त वैश्यावृत्ति (देह व्यापार) की कुप्रथा को समाप्त करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोडऩा है।

वर्तमान में जाबाली योजना प्रदेश के प्रभावित जिलों में (मुख्य रूप से नीमच, मंदसौर, रतलाम, मुरैना, उज्जैन आदि) संचालित है। योजना का स्वरूप अब केवल वैश्यावृत्ति उन्मूलन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह इन समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण, पुनर्वास, कौशल विकास (सिलाई, कढ़ाई आदि) और उनके बच्चों की शिक्षा (आश्रम शालाओं व हॉस्टल के माध्यम से) पर केंद्रित है। हालांकि, कैग की कुछ रिपोर्टों और बजटीय समीक्षाओं के अनुसार, इस योजना के लिए आवंटित फंड का एक बड़ा हिस्सा प्रशासनिक शिथिलता के कारण पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पाया है।

योजना के अंतर्गत प्रभावित समुदायों के बच्चों को स्कूलों/आश्रमों में भेजने के लिए लगभग 500 से 525 रुपये प्रति बच्चा प्रति माह की आर्थिक सहायता या छात्रवृत्ति का प्रावधान है ताकि वे इस माहौल से दूर रहकर शिक्षा प्राप्त कर सकें। इसके अलावा, समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक व्यवसाय शुरू करने के लिए महिलाओं/पुरुषों को तकनीकी प्रशिक्षण और व्यावसायिक आवश्यकताओं के आधार पर बैंकों व सरकारी विभागों के सहयोग से 10 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक का ऋण तथा अनुदान (स्वरोजगार योजनाओं के लिंकेज के साथ) उपलब्ध कराया जाता है। इन समुदायों की बालिकाओं के सम्मानजनक विवाह के लिए भी विशेष वित्तीय अनुदान सहायता प्रदान की जाती है।

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