Chandrapur News: चंद्रपुर में खरपतवार मंडया से संकट में धान की फसल , किसानों की बढ़ी चिंता

चंद्रपुर में खरपतवार मंडया से संकट में धान की फसल , किसानों की बढ़ी चिंता
  • तेजी से फैल रहा धान की तरह दिखने वाला खरपतवार
  • पहचान मुश्किल, उत्पादन घटने और लागत बढ़ने का खतरा

Chandrapur News विदर्भ के बड़े धान उत्पादक जिले चंद्रपुर में "मंडया' नाम के एक नए खरपतवार ने धान की फसल पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। नागभीड़ तहसील के चिंधीचक समेत कई इलाकों में इस खरपतवार का फैलाव तेजी से बढ़ रहा है और धान जैसा दिखने वाला यह खरपतवार किसानों के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। इससे उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका है। विदर्भ के चंद्रपुर, गडचिरोली, भंडारा, गोंदिया और नागपुर जिले धान की पैदावार के लिए जाने जाते हैं। इनमें से चंद्रपुर जिले में धान मुख्य फसल है, और इसकी अलग-अलग किस्मों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। क्योंकि यहां के चावल की मांग न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी है, इसलिए किसान बड़े पैमाने पर धान की खेती करते हैं। इस गर्मी के मौसम में मंडया नाम के खरपतवार ने किसानों के लिए एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। यह खरपतवार खास तौर पर नागभीड़ के चिंधीचक समेत कई गांवों में फैला हुआ है।

शुरुआती दौर में यह खरपतवार धान की फसल जैसा दिखता है, जिससे किसानों के लिए इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है। लेकिन, बढ़ने के बाद में यह धान से ज्यादा लंबा हो जाता है और इसका मज़बूत तना धान की वृद्धि पर असर डालता है। इस वजह से, धान का उत्पादन बहुत कम हो जाता है। इस खरपतवार के छोटे दाने पकने के बाद वापस खेत में गिर जाते हैं और इसका फैलाव तेजी से बढ़ता है। किसान अभी पारंपरिक तरीकों से इस खरपतवार को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, निराई असरदार नहीं है क्योंकि धान और खरपतवार में फर्क करना मुश्किल है। इसके अलावा, खरपतवार ज्यादा होने के कारण मजदूरी बढ़ रही है। दिलचस्प बात यह है कि किसानों ने देखा है कि खाद और कीटनाशक के इस्तेमाल के बाद ये खरपतवार और तेजी से बढ़ते हैं। इस वजह से यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।

इसके पहले गाजर घास और अमरबेल जैसे खरपतवार ने किसानों का भारी नुकसान किया है। उसे नियंत्रित करने कृषि विभाग प्रयासरत है तो मंडया की वजह से किसान को अधिक नुकसान होने वाला है। इसे नियंत्रित करने के लिए कृषि विभाग को तत्काल मार्गदर्शन और प्रभावी उपाय योजना करने की आवश्यकता है अन्यथा किसानों को भारी नुकसान होने से आर्थिक संकट में फंसे किसान आत्महत्या को विवश होंगे।

Created On :   24 April 2026 4:01 PM IST

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