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Chandrapur News: किसान बोले - हमें न मुआवजा चाहिए, न हम जमीन देंगे...

Chandrapur News प्रस्तावित एमआईडीसी औद्योगिक परियोजना के विरोध में गोंडपिपरी तहसील में गुरुवार 23 अप्रैल को अभूतपूर्व जनआंदोलन देखने को मिला। 12 गांव के किसानों ने एकजुट होकर " न मुआवजा चाहिये न जमीन देंगे' की चेतावनी देकर तहसील कार्यालय पर सैकड़ों किसानों जोरदार विरोध प्रदर्शन कर आंदोलन किया जिससे प्रशासन पशोपेश में है।
आंदोलन के दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि उद्योगों के नाम पर किसानों के अस्तित्व को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री और जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि "जमीन छीनने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' इस दौरान प्रशासन की भूमिका पर भी तीखी आलोचना की गई। इस आंदोलन में करंजी, वढोली, चेक पेल्लूर, वडकुली, सिरसी देऊलवार सहित 12 गांवों के लोगों ने एकजुट होकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
किसानों ने कहा कि इस परियोजना से उपजाऊ कृषि भूमि नष्ट हो जाएगी, जल संसाधनों पर भारी दबाव पड़ेगा और पर्यावरणीय नुकसान भी होगा। साथ ही, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और सामाजिक व पर्यावरणीय प्रभाव रिपोर्ट को केवल औपचारिकता बताया गया। "हमारी सहमति के बिना जमीन लेना हमारे अधिकारों का उल्लंघन है,' ऐसा किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा।
यदि प्रशासन जबरन कोई कार्रवाई करता है तो गोंडपिपरी औद्योगिक संघर्ष समिति के नेतृत्व में आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। " न मुआवजा चाहिये न जमीन देंगे' इस स्पष्ट रुख के साथ किसानों ने प्रशासन को चुनौती दी। "हमारी खेती, हमारा अधिकार' के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। मांगें पूरी नहीं होने पर सड़क जाम, बंद और जिला स्तर पर बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। इस आंदोलन में सैकड़ों की संख्या में किसान, युवा, महिलाएं शामिल थीं।
चार दशक में नहीं आए उद्योग, नौकरी की उम्र भी निकल गई 1980 के दशक में गोंडिपपरी तहसील के करंजी की लगभग 35 एकड़ मौके की कृषि जमीन एमआईडीसी के लिए सरकार ने अधिग्रहित की। तत्कालीन बाजार मूल्य के आधार पर किसानों को मुआवजा भी मिला है किंतु चार दशक बाद भी करंजी एमआईडीसी की जगह पर एक भी उद्योग नहीं शुरु हो सका है। यह जगह वर्तमान में महज बुजुर्गों के मनोरंजन और टहलने के काम में आ रही है।
हाल ही में क्षेत्रीय विधायक ने विधानसभा के सत्र में प्रयास किए और एमआईडीसी में उद्योगों के आने की उम्मीद जागी है किंतु किसानों का स्पष्ट आरोप है कि 4 दशक से जिन किसानों की उपजाऊ जमीन अधिग्रहित की गई थी उनके आश्रितों की आज नौकरी की आयु बीत चुकी है। इसलिए अब 12 गांव के किसानों विरोध कर रहे हैं।
Created On :   24 April 2026 4:26 PM IST















