Bhopal News: पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के प्रावधानों को भी नहीं माना जबलपुर नगर निगम प्रबंधन, 407 बिल्डिंग परमिशन दी, लेकिन फ्लाई एश ब्रिक्स पर नहीं किया गौर

पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के प्रावधानों को भी नहीं माना जबलपुर नगर निगम प्रबंधन,  407 बिल्डिंग परमिशन दी, लेकिन फ्लाई एश ब्रिक्स पर नहीं किया गौर

डिजिटल डेस्क, भोपाल। जबलपुर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन और ग्वालियर नगर निगमों ने 2018 से 2023 के बीच 407 बिल्डिंग परमिशन दी। इनमें शासन के निर्देशानुसार फ्लाईएश ब्रिक्स लगना था, लेकिन नगर निगम प्रबंधन ने परमिशन में इसका उल्लेख ही नहीं किया। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अधिसूचना (जनवरी 2016) के अनुसार भवन निर्माण में फ्लाई ऐश ब्रिक्स का उपयोग किया जाना है। ताकि ऊपरी मिट्टी के उत्खनन पर रोक लगाई जा सके और ताप विद्युत संयंत्रों की राख का भी उपयोग किया जा सके। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने ताप विद्युत संयंत्रों से 300 किमी के दायरे में होने वाले निर्माण में फ्लाई ऐश ईंटों का उपयोग करने का प्रावधान कर रखा है, लेकिन चारों नगर निगम इसे नहीं माना। इसके चलते मप्र शासन ने सभी नगर निगमों को निर्देशित किया कि फ्लाई ऐश ईंटों का उपयोग किया जाए।

पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार ईंटों के निर्माण के लिए ऊपरी मृदा (टॉपसाइल) के उत्खनन को प्रतिबंधित करने और कोयला या लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत संयंत्रों के 300 किमी के भीतर भवन निर्माण में फ्लाई ऐश ईटों का उपयोग किया जाना है।

चारों नगर निगमों ने भवन निर्माण अनुमतियों में फ्लाई ऐश ईंटों की शर्त के साथ अनुमति दी जाना थी, लेकिन नगर निगम प्रबंधनों ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया। 2018 से 2023 के बीच नगर निगम जबलपुर ने 57, ग्वालियर ने 48, भोपाल ने 127, इंदौर ने 118 और उज्जैन नगर निगम ने 57 भवन अनुमतियां दी लेकिन किसी में भी फ्लाई ऐश ईंटों की शर्त नहीं जोड़ी। जबकि सभी नगर निगम ताप संयंत्रों से 300 किमी के दायरे में है।

जबलपुर से संजय गांधी ताप विद्युत संयंत्र की दूरी 162 से 230 किमी के दायरे में है। भोपाल से सतपुड़ा ताप विद्युत संयंत्र की दूरी 180 किमी, इंदौर की खरगौन सुपर ताप विद्युत संयंत्र की दूरी 105किमी, ग्वालियर की परीक्षा ताप विद्युत संयंत्र से 120 किमी दूरी और उज्जैन की श्री सिंगाजी ताप विद्युत संयंत्र खंडवा से 180 किमी दूरी है। इन संयंत्रों से आसानी से फ्लाई ऐश ब्रिक्स व फ्लाई ऐश पहुंच सकती है, लेकिन नगर निगमों ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार की भी नहीं मानी।

Created On :   25 March 2026 8:37 PM IST

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