Jabalpur News: एमयू विखंडन में भी भेदभाव, सारी मलाई उज्जैन को

एमयू विखंडन में भी भेदभाव, सारी मलाई उज्जैन को
85 में से लगभग 60 कॉलेज जाएंगे उज्जैन, शेष जबलपुर को मिलेंगे, यूनिवर्सिटी के अस्तित्व पर ही आ जाएगा संकट

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। मप्र मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के विखंडन के खिलाफ बीते कुछ माह में उठे विरोध के स्वर खामोश तो अब भी नहीं हैं, लेकिन शायद उनकी आवाज जिम्मेदारों ने अनसुनी कर दी है। बार-बार विभिन्न संस्थाओं के विखंडन से छलनी हुआ शहर, एक बार फिर छला गया है। मेडिकल यूनिवर्सिटी दो हिस्सों में बटेगी, यह तो तय हो गया है।

इस पर भी जिम्मेदारों ने शहर से एमयू के अस्तित्व को ही मिटाने में काेई कसर नहीं छोड़ी है। इस विखंडन में भी भेदभाव साफ दिख रहा है। जिस शहर में प्रदेश की पहली और एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी बनी, उसके हिस्से में बमुश्किल 10 से 15 कॉलेजों का संचालन आएगा, दूसरी ओर 60 से ज्यादा कॉलेजों के साथ पूरी मलाई उज्जैन के हिस्से में जा रही है। इससे यह भी साफ हो गया है कि आने वाले वर्षों में जबलपुर में एमयू का अस्तित्व भी संकट में आ जाएगा।


तो खर्च निकालना भी हो जाएगा मुश्किल

लोगों का कहना है कि पहले तो यूनिवर्सिटी को बांटने का निर्णय ही गलत है, उस पर अगर यह निर्णय लेना ही है तो दोनों हिस्साें में बराबर कॉलेज आने चाहिए। जबलपुर के साथ इस निर्णय में भी भेदभाव साफ दिख रहा है।

इंदौर, ग्वालियर, भोपाल जैसे शहर भी उज्जैन के हिस्से में हैं। केवल 10 से 15 कॉलेजों के साथ प्रबंधन के लिए विवि का संचालन करना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि विवि की आय के एक मात्र स्रोत कॉलेज ही हैं। जब 1500 से 2 हजार बच्चे ही बचेंगे तो विवि के लिए खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।

प्रतिष्ठा और गौरव पर सीधा आघात

एमयू के पूर्व कार्यपरिषद् सदस्य डॉ. पवन स्थापक का कहना है कि जब पहली बार विवि के विखंडन की बात आई थी, तब यह आश्वासन मिला था कि बंटवारा नहीं होगा, लेकिन आगे कुछ नहीं हुआ। नर्सिंग-पैरामेडिकल पाठ्यक्रम हटाकर पहले यूनिवर्सिटी को कमजोर किया गया और अब दो हिस्सों में भी तोड़ दिया गया। यह जबलपुर की प्रतिष्ठा और गौरव पर सीधा आघात है। इससे जबलपुर का प्रबुद्ध वर्ग, चिकित्सक और जागरूक लोग आहत हुए हैं।

जबलपुर पर पड़ने वाले प्रमुख प्रभाव

वर्तमान में पूरे प्रदेश के छात्र और कॉलेज संचालक अपने कार्यों के लिए जबलपुर आते हैं। नया कैंपस खुलने से जबलपुर का "सेंट्रल हब' वाला दर्जा प्रभावित होगा।

परिसंपत्तियों का बंटवारा होगा। इससे संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा दूसरे शहर में शिफ्ट हो सकता है। नया हिस्सा बनने से जबलपुर के अधीन कॉलेजों की संख्या बहुत कम हो जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक गतिविधियों और भविष्य की विस्तार योजनाएं खत्म हो जाएंगी।

निर्णय का विरोध, घंटाघर पर विभिन्न संगठनों ने किया प्रदर्शन

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, भारतीय वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन, महिला समिति, सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन तथा किसान समिति के बैनर तले पदाधिकारियों ने सोमवार को घंटाकर के पास एकत्रित होकर एमयू के विखंडन के निर्णय को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

पदाधिकारियों ने कहा कि देश में मेडिकल यूनिवर्सिटी के बंटवारे का यह पहला उदाहरण है और प्रश्न उठाया गया कि जनप्रतिनिधियों ने इस विखंडन पर आपत्ति क्यों नहीं दर्ज की। हाईकोर्ट, विद्युत मंडल, कृषि विवि, रादुविवि आदि संस्थाओं का विखंडन पहले ही हो चुका है, यह सिलसिला कब तक चलेगा? इस मौके पर डॉ. पीजी नाजपांडे, टीके राय घटक, डीके सिंह, सुभाष चंद्रा, सुशीला कनौजिया, संतोष श्रीवास्तव, राजेश गिदरोनिया आदि मौजूद रहे।

Created On :   21 July 2026 5:04 PM IST

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