भोपाल हाईवे: पांच महीने बाद भी हालात जस के तस, ब्रिज निर्माण की प्रोग्रेस जीरो

पांच महीने बाद भी हालात जस के तस, ब्रिज निर्माण की प्रोग्रेस जीरो
फरवरी में ढहा था शहपुरा आरओबी, एमपीआरडीसी ने नई एजेंसी से काम कराने निकाला टेंडर, अगले माह भी वर्किंग शुरू हुई तो ब्रिज बनने में लगेंगे 8 से 10 माह

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। जबलपुर से भोपाल हाईवे में शहपुरा के नजदीक ढहा आरओबी का हिस्सा अभी भी बनना आरंभ नहीं हो सका है। इसके निर्माण को लेकर मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट काॅर्पोरेशन ने टेक्निकल जांच की, जिसमें सामने आया है कि बीते 5 माह में इसके निर्माण को लेकर वास्तव में प्रोग्रेस जीरो है।

ब्रिज को नया रूप देने की जिम्मेदार राजस्थान की जिस बांगड़ इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी के ऊपर है, उसने बीते माहों में अब तक जहां निर्माण होना है, वहां केवल ढहा हुआ हिस्सा ही साफ किया है। किसी भी तरह से अन्य निर्माण का मूवमेंट नहीं है।

मौके पर एमपीआरडीसी के अधिकारियों ने काम में किसी तरह की गति न देख, अन्य एजेंसी से काम कराने के लिए अब टेण्डर तक निकाल दिया है। जिस कंपनी ने इस आरओबी को बनाया था वह अब तक ब्रिज बनना कैसा है यह तय नहीं कर सकी है।

केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने ब्रिज के एप्रोच निर्माण में हो रही देरी पर जवाब भी मांगा है। जानकारों का कहना है कि यदि नई कंपनी भी टेण्डर फाइनल होने के बाद ब्रिज का निर्माण अगस्त, सितंबर माह से आरंभ करती है, तो अगले 8 से 10 माह में इसका काम पूरा हो सकेगा।

डेढ़ साल की कवायद से गुजरना होगा

ब्रिज का हिस्सा फरवरी माह के तीसरे सप्ताह में ढहा था। इसके बाद निर्माण तुरंत आरंभ हो जाता, तो अब तक संभव है कि टूटे हुए हिस्से में भी सुधार के बाद ट्रैफिक शुरू हो जाता, लेकिन अभी जो प्रोसेस है उसको लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि संभावना है कि ब्रिज 2027 मार्च, अप्रैल तक ही बन सकेगा। यदि थोड़ा और समय लगा तो पूरे डेढ़ साल की कवायद से गुजरना होगा।

जोखिम भरा है रात को यहां से निकलना

अंधमूक चौराहे से तेवर, भेड़ाघाट, सहजपुर, शहपुरा, मनकेड़ी, बेलखेड़ा और नौरादेही के जंगल की सीमा तक रात में चलना खतरों से भरा है। इसका कारण यह है कि सड़क के किनारे के हिस्से में मार्किंग ही नजर नहीं आती। बीच के हिस्से में सीमेण्टेड पैनल क्रैक हैं, तेज बारिश में हाईवे पर वाहन 30 से 40 किलोमीटर से आगे नहीं बढ़ता, क्योंकि सड़क को नार्म्स के अनुसार अपडेट नहीं रखा गया है।

दिल्ली और भोपाल से निगरानी के बाद भी है ऐसी दशा

शहपुरा आरओबी जल्द बने और इसको पूरी क्वालिटी के साथ बनाया जाए। इसको लेकर केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय, भोपाल एमपीआरडीसी सीधे तौर पर निगरानी कर रहे हैं। जब दिल्ली, भोपाल से इसकी समीक्षा की जा रही है, तब भी ऐसी स्थिति है।

जो लाेग अभी भोपाल हाईवे में डायवर्ट होकर शहपुरा मंडी की सड़क से जा रहे हैं, उनका कहना है कि अधिकारी निर्माण को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। यदि सख्ती के साथ निर्माण आरंभ कराया जाता, तो अब तक इसका निर्माण आधे से ज्यादा पूरा हो सकता था।

एक नजर इस पर

शहपुरा आरओबी का हिस्सा फरवरी माह में गिरा।

इसको 400 मीटर अब एप्रोच के रूप में बनाना है।

इसका निर्माण पहले वाली कंपनी को ही करना था।

ढहा हिस्सा कैसा बनना है अभी यह तय नहीं हो सका है।

देरी देख अब एमपीआरडीसी ने इसके लिए टेण्डर निकाला।

Created On :   20 July 2026 4:03 PM IST

Tags

Next Story