पुलिसिंग गायब: स्कूली बच्चियों पर मंडराता रहता है मनचलों का खतरा, मोबाइल से फोटो तक खींचते हैं

स्कूली बच्चियों पर मंडराता रहता है मनचलों का खतरा, मोबाइल से फोटो तक खींचते हैं
रियलिटी: पहले स्कूलों और कॉलेजों के आसपास लगातार होती थी पेट्रोलिंग, मजनू अभियान तक चलाए गए, अब पुलिस को कोई मतलब ही नहीं

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। कुछ साल पहले तक पुलिस का पूरा नहीं तो आधा ध्यान स्कूलों और कॉलेजों के आसपास रहता था। महिला पुलिस को यह जिम्मेदारी दी जाती थी कि वे रोजाना सुबह से दोपहर तक स्कूलों और कॉलेजों के आसपास कई चक्कर मारें और जो भी आवारा तत्व नजर आए उसे पकड़ें और पूछताछ करें। अब ऐसे कोई आदेश ही नहीं होते।

शोहदे कहें या गुंडे-लुच्चे स्कूलों और कॉलेजों के आसपास खुलेआम घूमते हैं। ठेलों और टपरों पर घंटों खड़े होकर फब्तियां कसते हैं, मासूम बच्चियों के साथ छेड़छाड़ करते हैं, मोबाइल पर फोटो खींचते हैं और वीडियो भी बनाते हैं। यदि कोई विरोध करता है तो वे उस पर चाइना चाकू से हमला कर देते हैं।

उल्लेखनीय है कि इन दिनों स्कूलों और कॉलेजों में भीड़ है, बच्चियां नए सत्र के उत्साह में लगातार संस्थान जाती हैं। ऐसे में आवारा तत्व उनकी राह पर रोड़ा बनकर खड़े हो जाते हैं। मंगलवार को हालातों की पड़ताल की गई तो हालात गंभीर दिखे। कई युवक स्कूलों के गेट के समीप ही अजीब से अंदाज में खड़े नजर आए।

सवाल पर स्कूल-कॉलेजों के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि यह रोजाना के हालात हैं। आवारा तत्व रोज किसी न किसी बच्ची का पीछा करते दिखते हैं। बच्चियों को देखकर द्विअर्थी कमेंट करते हैं। स्कूलों और कॉलेजों के आसपास लगे चाय-पान के टपरे और ठेले इन तत्वों के ठिकाने बन जाते हैं। वे वहां खड़े होकर बच्चियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हैं।

आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जब छेड़छाड़ से मना करने पर परिजनों या सहयोगियों पर चाकू से हमला किया जाता है। उनकी इतनी हिम्मत इसलिए हो गई है क्योंकि पुलिस खामोश है। स्कूल और कॉलेज के आसपास पुलिस की गाड़ी नजर ही नहीं आती। लोगों का कहना है कि इसकी कड़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए।

सिविल लाइंस क्षेत्र भी सुरक्षित नहीं

नागरिकों ने बताया कि सिविल लाइंस क्षेत्र तक अब छात्र-छात्राओं के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है। यहां शिक्षण संस्थाओं की भरमार है, लेकिन उसी तेजी से यहां कब्जों की भी भरमार हो गई है।

रादुविवि, साइंस कॉलेज, महाकौशल कॉलेज, नवयुग कॉलेज, जीएस कॉलेज, वेटरनरी से लेकर सदर की ओर पेंटीनाका पर ही सेंट अलॉयसियस, सेंट जोसफ आदि संस्थान हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं हैं। इन क्षेत्रों में सड़क किनारे, ठेलों और टपरों पर खड़े तत्वों पर कभी कार्रवाई ही नहीं होती।

हॉस्टल के आसपास भी ऐसे ही हालात

जानकारों का कहना है कि निजी हों या सरकारी संस्थानों के हॉस्टल, ये भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। इनके आसपास भी आवारा तत्वों का डेरा होता है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के हॉस्टल के पास ही ठेले और टपरे हैं। एमएलबी स्कूल, होमसाइंस कॉलेज के आसपास भी ठेले-टपरों की संख्या बढ़ती जा रही है।

हर विभाग खामोशी ओढ़े नजर आ रहा

अभिभावकों का कहना है कि पहले स्कूल-कॉलेज शुरू होने के पहले ही नगर निगम द्वारा इन संस्थानों के आसपास के कब्जे हटवाए जाते थे। पुलिस लगातार पेट्राेलिंग करती थी और स्कूल और कॉलेज के शिक्षक खुद आसपास नजर रखते थे, लेकिन अब किसी को कोई मतलब ही नहीं रह गया है।

बच्चों को जैसे खुले जंगल में छोड़ दिया गया है और यह कहा जाता है कि अपनी सुरक्षा खुद करो। बच्चियों को डराकर, धमकाकर या लालच देकर बहकाया जा रहा है। स्कूल-कॉलेज के आसपास दर्जनों की संख्या में ठेले-टपरे हैं और वे आवारा तत्वों के अड्डे बने हुए हैं।

Created On :   1 July 2026 3:17 PM IST

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