जबलपुर न्यूज: रैबीज को खत्म करना है, जानवरों को नहीं, हर डॉग खतरनाक नहीं होता

कोई डॉग काटे तो सबसे पहले 15 मिनट पानी और साबुन से धोने पर विषाक्तता कम हो जाती है, वैक्सीन हर हाल में लगवाएं,

डिजिटल डेस्क जबलपुर |यदि िकसी इंसान को कोई रैबीज से पीड़ित डॉग काट लेता है तो जरूरी नहीं कि उसका असर एक-दो दिनों, दस-बीस दिनों में नजर ही आए। 12 साल तक तो सामान्य माना जा सकता है लेकिन हो सकता है िक उसका असर जीवन में कभी भी नजर आ सकता है। यानी िकसी भी कीमत पर रैबीज को हल्के में न लिया जाए और जैसे ही डॉगी, बंदर, घोड़ा या कोई भी स्तनधारी जानवर आपको काटे तो हर हाल में रैबीज की वैक्सीन लगवानी चाहिए। रही बात प्राथमिक उपचार या सावधानी की तो सबसे पहले जिस जगह पर काटा गया है उसे नल के नीचे करीब 15 िमनट तक धोएं और साबुन लगाएं। इससे 80 से 90 फीसदी विषाक्तता समाप्त हो जाएगी और उसके बाद चिकित्सक की सलाह से इंजेक्क्शन लगवा लें।

उपरोक्त जानकारी पशुचिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के पशु जन स्वास्थ्य एवं महामारी विज्ञान विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ रणविजय सिंह ने विशेष चर्चा में देते हुए बताया कि सन 2030 तक रैबीज को समाप्त करने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे। इसके लिए

सबसे पहले तो सड़कों पर घूमने वाले श्वानों का बधियाकरण और टीकाकरण िकया जाना चाहिए। किसी भी जानवरों की प्रजाति का नाश नहीं िकया जा सकता बल्कि उनके खतरों को दूर किया जा सकता है। रैबीज किसी भी आवारा पशु से नहीं होता बल्कि उसी जानवर से होता है जिसे रैबीज की बीमारी होती है। इसका पता करना भी बहुत आसान है। आपको लगता है िक कोई श्वान बीमार है और उसे रैबीज हो सकता है क्योंकि उसकी हरकतें बदल जाती हैं तो उसे 7 से 8 िदनों के लिए इंसानों से दूर करके बांध दें। उसे दूर से खाना-पानी देते रहें। उसे रैबीज होगा तो अधिकतम 10 िदनों में यह बीमारी उसे मार देगी, क्योंकि एक बार रैबीज होने पर उसका कोई इलाज नहीं है। और यदि उसे रैबीज नहीं है तो वह जिंदा रहेगा।

दूध पीने से रैबीज नहीं होता-

बहुत से लाेग डर जाते हैं और रैबीज के डर के चलते दूध तक नहीं पीते। इस पर डॉ. सिंह कहते हैं िक रैबीज दूध से नहीं फैलता है। दूध को हमेशा उबालकर ही पीना चाहिए। आपका कहना है िक हर कालोनी और मोहल्ले वाले डॉगी के वैक्सीनेशन और उनके बधियाकरण पर ध्यान दें तो रैबीज की समस्या हमेशा के िलए समाप्त हो सकती है। डॉगी दुश्मन नहीं हैं वे भी इस संसार का एक हिस्सा हैं।

रैबीज प्रबंधन पर दी जानकारी-

नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय के अंतर्गत कुलपति डॉ मंदीप शर्मा के मार्गदर्शन एवं अधिष्ठाता डॉ एसएस तोमर के नेत्तृत्व में डॉ रणविजय सिंह, सह प्राध्यापक डॉ भावना गुप्ता एवं सहायक प्राध्यापक डॉ रश्मि कुलेश द्वारा सेंट एलायसियस कालेज के प्राणी शास्त्र विभाग के छात्र छात्र-छात्राओं को विश्व रेवीज़ दिवस के अवसर पर कुत्तों तथा इंसानों में व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से रेबीज़ प्रबंधन विषय पर जानकारी दी गई ।


Created On :   28 Sept 2026 8:03 PM IST

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