एमपीएससी फूड इंस्पेक्टर पेपर लीक मामला: 294 लीक सवालों की लिस्ट में आए थे 100 सवाल, रितुजा को 91 करने का था निर्देश, जिसमें 77 करने थे सही

294 लीक सवालों की लिस्ट में आए थे 100 सवाल, रितुजा को 91 करने का था निर्देश, जिसमें 77 करने थे सही
  • अधिकारी गोपाल मराठे ने प्रवीण तक पहुँचाये थे पेपर के सेट, दोनों एक ही गांव के रहने वाले और पहले से पहचान
  • मास्टरमाइंड प्रवीण पाटिल और अमृत पाटिल के बीच हुई 12 रुपए की डील
  • मयूर ठाकरे ने निभाई थी बिचौलिये की भूमिका

Mumbai News. दिवाकर सिंह. महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) फ़ूड इंस्पेक्टर प्रश्नपत्र लीक मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच की जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचाने वाले चौकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस पूरे फर्जीवाड़े का जाल सरकारी अधिकारियों और बिचौलियों के गठजोड़ से तैयार हुआ था, जिसने परीक्षा की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्राइम ब्रांच की जाँच में सामने आया है कि प्रश्नों के सुपर सेट से एमपीएससी अधिकारी विश्वेश्वर नकाते ने 294 सवालों की जो लिस्ट तैयार कर मास्टरमाइंड प्रवीण पाटिल को दी थी, उसमें से ही 100 सवाल परीक्षा के फाइनल पेपर में आए थे। इन 100 सवालों में से रितुजा को परीक्षा के दौरान 91 सवाल करने का निर्देश था। उसमें से उसे 77 सही करने थे, जबकि 14 गलत करना था, ताकि किसी को भी क्वेश्चन लीक होने का शक ना हो। निर्देशानुसार 100 में से 77 सवालों को रितुजा ने आसानी से हल कर दिया, जबकि 14 को अपने विवेक से किया था।

जाँच में यह भी पता चला है कि 294 सवालों का सुपर सेट तैयार होने के बाद उसका मुख्य हैंडलर और समन्वयक अधिकारी विश्वेश्वर नकाते ही था। उसे इस बात की सटीक जानकारी थी कि 294 सवालों के इसी सुपर सेट में से ही 100 सवाल परीक्षा के दौरान फाइनल पेपर में आयेंगे। इसी पद और पहुँच का फायदा उठाकर उसने चोरी-छिपे अपने पर्सनल लैपटॉप में सभी सवालों को नोट कर लिया था। सवालों का डेटा चोरी करने के बाद उसने इस लिस्ट को दूसरे अधिकारी अभिजीत लेंडवे को एमपीएससी परिसर की पार्किंग में सौंपा। इसके बाद लेंडवे ने उस लिस्ट को तीसरे अधिकारी गोपाल मराठे को दिया, जिसने आगे बढ़कर इसे मास्टरमाइंड प्रवीण पाटिल तक पहुँचाया। मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गोपाल मराठे और प्रवीण पाटिल नंदुरबार जिले के एक ही गाँव के रहने वाले थे और दोनों के बीच पहले से अच्छी जान-पहचान थी। प्रवीण पाटिल ने इसी पुरानी पहचान का इस्तेमाल करते हुए मराठे के ज़रिए ही एमपीएससी का पेपर लीक कराने के लिए एप्रोच किया था।

क्राइम ब्रांच की जाँच में वित्तीय लेन-देन को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। फ़ूड इंस्पेक्टर का पेपर लीक कराकर देने के लिए रितुजा के पिता अमृत पाटिल और मास्टरमाइंड प्रवीण पाटिल के बीच कुल 12 लाख रुपए की डील तय हुई थी। इस पूरी डील को अमलीजामा पहनाने और दोनों पक्षों को मिलाने में वांटेड आरोपी मयूर ठाकरे ने बिचौलिये की मुख्य भूमिका निभाई थी। फिलहाल क्राइम ब्रांच की टीमें मयूर ठाकरे की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं। तय डील के तहत प्रवीण ने अमृत पाटिल से शुरुआती किस्त के रूप में 5 लाख रुपए लेकर एमपीएससी के तीनों आरोपी अधिकारियों में बाँट दिए थे, जबकि 7 लाख रुपए का भुगतान बकाया था। इस 7 लाख की बची रकम को वसूलने के लिए प्रवीण लगातार अमृत पर दबाव बना रहा था। जाँच में यह तथ्य भी स्पष्ट हुआ है कि मार्च 2026 में आयोजित हुई इस परीक्षा से महज़ दो दिनों पहले ही पेपर को सिस्टम से लीक करके प्रवीण तक पहुँचा दिया गया था। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मामले में सामने आए गौरव पाटिल का भाई भी फ़ूड इंस्पेक्टर की इस परीक्षा में शामिल हुआ था, हालांकि वह इसे पास नहीं कर सका। गौरव का दावा है कि उसने अपने भाई के साथ प्रश्नों की कोई लिस्ट शेयर नहीं की थी, लेकिन क्राइम ब्रांच इस दावे का सत्यापन कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, रितुजा ने गौरव को क्वेश्चन की लिस्ट शेयर करने के बाद उससे 5 लाख रुपए की माँग की थी, जिसका प्रमाण दोनों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट्स से मिला है। मामले में रितुजा की गिरफ़्तारी भी तय मानी जा रही है।

फिलहाल क्राइम ब्रांच को मजबूत शक है कि प्रवीण पाटिल और इस गिरोह ने फ़ूड इंस्पेक्टर के अलावा कई अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं के पेपर भी लीक कराए हो सकते हैं, जिसकी व्यापक स्तर पर गहन जाँच जारी है।

Created On :   27 Aug 2026 10:00 PM IST

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