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राज्यसभा: बारामती और अहमदाबाद विमान हादसे की जांच कर रही एएआईबी, डॉ मेधा कुलकर्णी ने आरटीई में की महत्वपूर्ण सुधार की मांग

New Delhi News. राकांपा (अजित) के दिवंगत नेता अजित पवार की बारामती में हुए विमान हादसे को लेकर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने सोमवार को कहा कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) बारामती हादसे की जांच कर रहा है। इसकी प्राथमिक रिपोर्ट भी आ गई है। इसके साथ-साथ एएआईबी अहमदाबाद विमान हादसे की की भी जांच कर रहा है। राज्यसभा में राजद सांसद मनोज झा के पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय मंत्री ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एएआईबी के पास विमान हादसे की पारदर्शी तरीके से जांच के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। नायडू ने बताया कि ऊपर बताए गए दोनों हादसों की जांच अंतरराष्ट्रीय मानक से की जा रही है। बारामती और अहमदाबाद में हुए विमान हादसे का रहस्य अभी भी बना हुआ है। झा ने यह मुद्दा उठाया था कि पायलट एसोसिएशन ने मांग की थी कि इन दोनों हादसों की जांच एक तय प्रक्रिया के हिसाब से की जानी चाहिए।
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डॉ मेधा कुलकर्णी ने आरटीई में की महत्वपूर्ण सुधार की मांग
भाजपा सांसद डॉ मेधा कुलकर्णी ने शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 (आरटीई) में कुछ महत्वपूर्ण सुधार करने पर जोर दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सरकारी, निजी अनुदानित तथा अल्पसंख्यक स्कूलों में भी आरटीई के विद्यार्थियों के लिए प्रवेश का मार्ग खोलने पर विचार करे । साथ ही आरटीई के अंतर्गत 25 प्रतिशत सीटों के लिए स्कूलों को देय प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा समय पर प्रदान की जाए। इसके साथ ही उन्होंने कई अन्य बिंदुओं पर सुधार की मांग की। डॉ कुलकर्णी ने राज्यसभा में इस विषय को उठाते हुए कहा कि महाराष्ट्र में इस वर्ष लगभग 3 लाख 5 हजार बच्चों ने आरटीई के अंतर्गत आवेदन किया, जबकि लगभग 1 लाख 1 हजार बच्चों को विभिन्न स्कूलों में प्रवेश मिला। महाराष्ट्र में आरटीई के अंतर्गत कुल 1 लाख 9 हजार सीटें उपलब्ध हैं। इस कारण अनेक गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित रहना पड़ता है। इस वजह से आरटीई नीति में महत्वपूर्ण सुधार की जरूरत है। भाजपा सांसद ने सुझाव दिया कि प्रत्येक स्कूल के अलग-अलग प्रवेश स्तर होते हैं। आरटीई प्रवेश के लिए एक सक्षम, पारदर्शी और तकनीक आधारित केंद्रीकृत एडमिशन सॉफ्टवेयर प्रणाली विकसित की जाए। देश में साक्षरता का स्तर 100 प्रतिशत तक पहुंचाने और स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या शून्य करने के लिए आरटीई की प्रभावी और न्यायसंगत तरीके से अमल करना अत्यंत आवश्यक है।
Created On :   16 March 2026 9:19 PM IST












