- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- मुंबई
- /
- विधेयक पेश - लव जिहाद और जबरन धर्म...
महाराष्ट्र विधानसभा: विधेयक पेश - लव जिहाद और जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक के लिए कानून बनाने की तैयारी में सरकार

Mumbai News. राज्य सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी विधेयक "महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026' पेश किया। जिसमें कपटपूर्ण तरीके से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के लिए सख्त प्रावधान शामिल हैं। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य जबरन, धोखे से या लालच देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण और तथाकथित ‘लव जिहाद’ के मामलों पर रोक लगाना बताया गया है। राज्य सरकार इस कानून को के रूप में लागू करने की तैयारी कर रही है। इससे पहले मंत्रिमंडल ने भी इस विधेयक को मंजूरी दी थी। सूत्रों का कहना है कि सोमवार को सदन में इस पर चर्चा हो सकती है। इस बीच विपक्ष ने इस विधेयक का विरोध शुरु कर दिया है।
धर्म परिवर्तन से पहले देनी होगी 60 दिन की सूचना
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे पहले निर्धारित प्राधिकरण या जिला प्रशासन को 60 दिन पहले सूचना देनी होगी। इसके अलावा धर्म परिवर्तन के बाद 25 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो धर्म परिवर्तन अमान्य माना जा सकता है। इस विधेयक में प्रलोभन की व्यापक परिभाषा दी गई है, जिसमें केवल पैसा ही नहीं बल्कि मुफ्त शिक्षा, रोजगार, शादी का वादा, बेहतर जीवन शैली का आश्वासन या दैवीय उपचार के दावों को भी शामिल किया गया है। यदि विवाह केवल धर्मांतरण के उद्देश्य से किया गया है तो अदालत उस विवाह को अवैध घोषित कर सकती है।
जबरन धर्मांतरण पर कड़ी सजा
विधेयक में जबरन धर्म परिवर्तन कराने वालों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। जबरन या धोखे से धर्मांतरण पर 7 साल तक की जेल, 5 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। ऐसे मामलों में अपराध गैर-जमानती हो सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति के परिजन को संदेह हो कि धर्म परिवर्तन दबाव या धोखे से कराया गया है, तो वे शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद पुलिस जांच करेगी। प्रस्तावित कानून में यह भी प्रावधान है कि यदि धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से धोखे या दबाव में शादी कराई जाती है, तो ऐसे विवाह को अवैध घोषित किया जा सकता है।
देश के अन्य राज्यों में है ऐसा कानून
महाराष्ट्र ऐसा कानून लाने वाला देश का पहला राज्य नहीं है। अब तक 10 से ज्याादा राज्यों ने धर्मांतरण विरोधी कानून बनाए हैं या अध्यादेश पारित किए गए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक, हरियाणा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।
संविधान ने सभी को धर्म चुनने की आजादी दी हैः आव्हाड
इस विधेयक को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच मतभेद देखने को मिला है। शुक्रवार को विधानभवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में राकांपा (शरद) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने इस विधेयक पर सवाल उठाते कहा कि इस विधेयक के पीछे सरकार की भावना समझ में नहीं आती। धर्मांतरण करना गलत है, लेकिन समाज में भेदभाव करना भी उतना ही गलत है। इतिहास में कई लोगों ने सामाजिक अन्याय के कारण अपना धर्म बदला, कई लोगों ने दुख झेले और कई ने आत्महत्या तक की। उन्होंने कि अगर मेरे अपने धर्म में मुझे सम्मान नहीं मिलता और मैं दूसरा धर्म अपनाता हूं, तो इसमें गलत क्या है? संविधान ने हर व्यक्ति को धर्म चुनने की आज़ादी दी है। आव्हाड ने कहा कि जबरन होने वाले धर्मांतरण का हम विरोध करते हैं, लेकिन धर्म बदलना व्यक्ति की स्वतंत्रता है।
धोखे से कराए जाने वाले धर्मांतरण से लोगों को बचाने यह कानूनः भोयर
जबकि गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर कहा कि महाराष्ट्र में धर्मांतरण से जुड़ा विधेयक विधानसभा में पेश किया गया है। खासकर गरीब और कमजोर लोगों को लालच देकर या दबाव बनाकर धर्मांतरण कराने की कोशिशें होती हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून का उद्देश्य किसी एक धर्म को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि नागरिकों को जबरदस्ती, धोखे या लालच देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण से बचाना है।
Created On :   13 March 2026 8:56 PM IST









