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सदन: बावनकुले ने कहा - राज्य में कृषि भूमि के अवैध खरीद-फरोख्त और ईसाई मिशनरी भूमि की होगी जांच, जयकुमार गोरे बोले - हर गांव में श्मशान के लिए व्यापक नीति

Mumbai News. महाराष्ट्र में गैर-किसानों द्वारा कृषि भूमि की खरीद से जुड़े मामलों की राज्यव्यापी जांच कराई जाएगी। ऐसे सभी मामलों की पहचान कर उनका रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और इसके लिए विशेष तंत्र स्थापित किया जा रहा है। यह जानकारी राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के उत्तर में दी। विधायक अनुप भैया अग्रवाल द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर मंत्री बावनकुले ने कहा कि कानून के प्रावधानों के अनुसार कृषि भूमि खरीदने वाला व्यक्ति किसान होना आवश्यक है। हालांकि, राज्य के विभिन्न हिस्सों से इस नियम के उल्लंघन की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। ऐसे मामलों की जांच कर गैर-किसानों द्वारा खरीदी गई कृषि भूमि का राज्यभर में मैपिंग किया जाएगा। इसके लिए जमाबंदी आयुक्त के माध्यम से कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि भूमि पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से स्टाम्प अधिकारियों को संबंधित व्यक्ति की भूमि संबंधी जानकारी की जांच का अधिकार दिया गया है। साथ ही, कृषि भूमि खरीदने वाले की किसान पात्रता का सत्यापन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था भी लागू की गई है। वर्ष 2010 की उत्तराधिकार प्रविष्टियों की भी पुनः समीक्षा की जाएगी ताकि मूल सदस्यों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके। यदि राजस्व अभिलेखों में कोई गलत प्रविष्टि या अवैध कार्रवाई पाई जाती है तो उसे निरस्त करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। साथ ही पूरे मामले की पुलिस जांच भी कराई जाएगी। बावनकुले ने कहा कि भविष्य में राज्य में किसान होने का वैध प्रमाण प्रस्तुत किए बिना किसी भी व्यक्ति को कृषि भूमि खरीदने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके लिए सरकार और अधिक प्रभावी नियंत्रण एवं सत्यापन प्रणाली विकसित करेगी।
राज्य में ईसाई मिशनरी भूमि की होगी जांच, तीन महीने में रिपोर्ट - बावनकुले
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में ईसाई मिशनरी संस्थाओं के नाम दर्ज भूमि की जांच कराने का निर्णय लिया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा में घोषणा करते हुए कहा कि अगले तीन महीनों के भीतर जमाबंदी आयुक्त के माध्यम से इन मामलों की जांच पूरी कराई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित भूमि अभिलेखों की समीक्षा कर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। विधानसभा में चर्चा के दौरान बावनकुले ने बताया कि नासिक जिले में ईसाई मिशनरी के नाम पर दर्ज भूमि के रिकॉर्ड की विशेष जांच कराई जाएगी। इसके लिए विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी, जिसमें जमाबंदी आयुक्त कार्यालय, पुलिस विभाग और पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग (आईजीआर) के अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति भूमि अभिलेखों, स्वामित्व और संबंधित लेन-देन की विस्तृत जांच करेगी। राजस्व मंत्री ने कहा कि जांच के दौरान यदि ऐसी निजी भूमि पाई जाती है, जिस पर नियमानुसार सरकार का अधिकार बनता हो, तो उसे सरकारी नियंत्रण में लेने की संभावना पर विचार किया जाएगा। हालांकि जिन भूखंडों पर पहले से आवासीय बस्तियां या सरकारी निर्माण मौजूद हैं, उनके संबंध में अलग से निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरी जांच के बाद तीन महीने के भीतर सरकार इस संबंध में अंतिम निर्णय लेगी।
हर गांव में श्मशान' के लिए बनेगी व्यापक नीति, सुविधा विहीन गांवों को मिलेगी प्राथमिकता : जयकुमार गोरे
महाराष्ट्र सरकार राज्य के प्रत्येक गांव में श्मशान भूमि की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए व्यापक नीति तैयार करेगी। जिन गांवों में अभी तक श्मशान भूमि उपलब्ध नहीं है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर भूमि और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह जानकारी ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने बुधवार को विधानसभा में दी। विधानसभा सदस्य संजय देरकर द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मंत्री गोरे ने बताया कि सरकार ने 'हर गांव श्मशान घाट' की नीति अपनाई है। इस विषय पर हुई चर्चा में विधायक अतुल भोसले, विजय वडेट्टीवार, अमित देशमुख, समीर कुणावार और सरोज अहिरे ने भी भाग लिया। मंत्री गोरे ने बताया कि राज्य के कुल 40 हजार 760 राजस्व गांवों में से लगभग 32 हजार 791 गांवों में श्मशान भूमि की सुविधा उपलब्ध है। शेष गांवों में, जहां यह सुविधा नहीं है, वहां अन्य विकास कार्यों को मंजूरी देने से पहले श्मशान भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में श्मशान भूमि के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं है, उनके लिए अलग और व्यापक नीति तैयार की जा रही है। इसके तहत आवश्यकता के अनुसार सरकारी भूमि उपलब्ध कराना, सामुदायिक श्मशान भूमि विकसित करना, भूमि अधिग्रहण अथवा भूमि खरीद जैसे विकल्पों पर भी सरकार सकारात्मक रूप से विचार कर रही है। इसके लिए सभी जिला कलेक्टरों से ऐसे गांवों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी। जयकुमार गोरे ने बताया कि श्मशान भूमि के विकास कार्यों के लिए जिला योजना समिति, जिला परिषद सेस तथा अन्य उपलब्ध निधियों से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की भी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा वन विभाग, राजस्व विभाग और अन्य सरकारी विभागों की भूमि श्मशान भूमि के लिए उपलब्ध कराने संबंधी आवश्यक निर्णय लेने हेतु शासन स्तर पर समन्वय और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
वन पट्टाधारकों को मिलेगा अलग सातबारा
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के लाखों आदिवासी एवं पारंपरिक वन निवासी परिवारों के लिए एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब वन अधिकार कानून के तहत भूमि प्राप्त करने वाले वन पट्टाधारकों को उनकी जमीन के लिए अलग 'नमुना 7ई' (सातबारा) और 'गांव नमूना 12ई' जारी किया जाएगा। इसकी घोषणा राज्य के राजस्व मंत्री ने विधानसभा में की। सरकार के इस फैसले से राज्य के 2 लाख से अधिक आदिवासी परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। राजस्व मंत्री ने सदन में बताया कि अब तक वन अधिकार अधिनियम के तहत भूमि का पट्टा मिलने के बावजूद आदिवासी लाभार्थियों का नाम सातबारा में केवल 'अन्य अधिकार' के कॉलम में दर्ज किया जाता था। जबकि भूमि के मुख्य स्वामित्व वाले कॉलम में 'महाराष्ट्र शासन - वन विभाग' का उल्लेख रहता था। इस तकनीकी व्यवस्था के कारण आदिवासी किसानों को किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) बनवाने, बैंकों से कृषि ऋण लेने, कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ प्राप्त करने और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में मुआवजा हासिल करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बावनकुले ने बताया कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में उनके अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया था। समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने वन पट्टा धारकों के लिए अलग नमुना 7ई और गांव नमूना 12ई लागू करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव के बाद आदिवासी किसानों को एग्रीस्टैक सहित कृषि क्षेत्र से जुड़ी सभी सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिलेगा। साथ ही किसान पहचान पत्र, फसल ऋण, कृषि अनुदान और प्राकृतिक आपदा सहायता जैसी सुविधाएं प्राप्त करने में अब किसी प्रकार की तकनीकी बाधा नहीं आएगी
Created On :   8 July 2026 10:12 PM IST
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