विधानसभा: मुद्दा गूंजा तो हसन मुश्रीफ ने कहा - बाहर से दवाई मंगाने का प्रिस्क्रिप्शन लिखा तो डीन पर होगी कार्रवाई

मुद्दा गूंजा तो हसन मुश्रीफ ने कहा - बाहर से दवाई मंगाने का प्रिस्क्रिप्शन लिखा तो डीन पर होगी कार्रवाई
  • जे.जे. अस्पताल में डॉक्टर, नर्स और दवाइयों की कमी का मुद्दा विधानसभा में गूंजा
  • डॉक्टरों, नर्सों और दवाइयों की उपलब्धता का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया

Mumbai News. विधानसभा में मुंबई के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और दवाइयों की उपलब्धता का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य भर से हजारों मरीज इलाज के लिए जे.जे. अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन वहां पर्याप्त डॉक्टर और नर्स उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में लगभग 60 प्रतिशत दवाइयों की कमी है, जिसके कारण मरीजों को बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। जिस पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा कि जल्द ही अस्पतालों में डॉक्टर और नर्स की भर्ती की जाएगी। मुश्रीफ ने यह भी कहा कि अगर अस्पताल में बाहर से दवाई के लिए प्रिस्क्रिप्शन लिखा गया, तो डीन पर कार्रवाई की जाएगी।

पटेल ने सदन में कहा कि जे.जे. अस्पताल के डॉक्टर बेहतर काम कर रहे हैं और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार देने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से डॉक्टरों और नर्सों के रिक्त पदों को जल्द भरने तथा अस्पताल में दवाइयों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर अस्पतालों को पूरी तरह प्रिस्क्रिप्शन-लेस (बाहर से दवाइयां लिखने की आवश्यकता समाप्त करने) की व्यवस्था कब तक लागू की जाएगी। इस पर जवाब देते हुए राज्य के मंत्री मुश्रीफ ने कहा कि सरकार डॉक्टरों और नर्सों की कमी को दूर करने के लिए गंभीर है। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों और नर्सों के रिक्त पद भी जल्द ही भरे जाएंगे।

दवाइयों की कमी के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य के किसी भी सरकारी अस्पताल में दवाइयों की कमी नहीं है। यदि किसी अस्पताल में मरीजों को बाहर से दवाइयां लिखी जा रही हैं या दवाइयां उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, तो संबंधित अस्पताल के डीन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुश्रीफ ने सदन को बताया कि सरकार पहले ही आदेश जारी कर चुकी है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए प्रिस्क्रिप्शन लिखकर नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी मरीज को ऐसी शिकायत है तो वह इसकी जानकारी सरकार को दे, संबंधित अस्पताल के डीन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Created On :   8 July 2026 10:01 PM IST

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